Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

कहिन

एसपी बनने के लिए उतना बड़ा मन चाहिए

आनंद राययशवंत भाई, नमस्कार, कुशल से रहकर आपकी कुशलता की कामना है. एसपी के बारे में आपकी रिपोर्ट पढी. बेबाक रपट मन को छू गयी. लगा कि एसपी की माटी का तेवर बोल रहा है. लगा कि एसपी जैसा कोई भी वहां मौजूद होता तो बहस की शुरुआत शिखा नाम की उस लड़की के सवालों से करता, जिसने वाजिब मुद्दे उठाये थे. पर हम उम्मीद किससे करें, अब कौन आखिरी आदमी की वकालत करेगा. एक बात कहूँगा कि आप जिन्हें नया कह रहे हैं वही लोग पुराने मूल्यों के साथ खड़े हैं. एसपी की श्रद्धांजलि सभा में जाने वाला नया पत्रकार मेरी नजर में संवेदनशील होने के साथ अपने गौरव के प्रति जागरूक तो है. एक फ़िल्म कारपोरेट देखी थी. उसमे एक संत को अपने आध्यात्मिक ज्ञान से नहीं बल्कि भौतिक अप्रोच से दिए गए आशीर्वाद को फलीभूत कराते देखा.

आनंद राययशवंत भाई, नमस्कार, कुशल से रहकर आपकी कुशलता की कामना है. एसपी के बारे में आपकी रिपोर्ट पढी. बेबाक रपट मन को छू गयी. लगा कि एसपी की माटी का तेवर बोल रहा है. लगा कि एसपी जैसा कोई भी वहां मौजूद होता तो बहस की शुरुआत शिखा नाम की उस लड़की के सवालों से करता, जिसने वाजिब मुद्दे उठाये थे. पर हम उम्मीद किससे करें, अब कौन आखिरी आदमी की वकालत करेगा. एक बात कहूँगा कि आप जिन्हें नया कह रहे हैं वही लोग पुराने मूल्यों के साथ खड़े हैं. एसपी की श्रद्धांजलि सभा में जाने वाला नया पत्रकार मेरी नजर में संवेदनशील होने के साथ अपने गौरव के प्रति जागरूक तो है. एक फ़िल्म कारपोरेट देखी थी. उसमे एक संत को अपने आध्यात्मिक ज्ञान से नहीं बल्कि भौतिक अप्रोच से दिए गए आशीर्वाद को फलीभूत कराते देखा.

आज तो बड़ी-बड़ी हांकने वाले और आदर्श का पाठ पढाने वाले लोग अपने भौतिक संसाधनो से पत्रकारिता को पुष्पित और पल्लवित कर रहे हैं. ऐसे लोगों का बड़ा नाम हो गया है. ऐसे लोगों के लिए अब विचार कोई मायने नहीं रखते. ऐसे लोग तो मंचों पर नसीहत जरूर देते हैं लेकिन तुरंत नीचे उतर कर अपने चेलों को समझाते हैं कि मंच की बातें अलग होती हैं और जीवन की बातें अलग. पर मैं निराश नहीं हूँ. मुझे वह आदमी अच्छा लगता है जो जैसा है वैसा दिखाता है. मेरे पास कोई आदर्श की बात नहीं है. बस यही कि छोटी जगह पर जन सरोकार के लिए जूझ रहा हूं. एसपी को ठीक से जानता हूं और मिला हूं इसलिए उनकी बात आयी तो कुछ कहने से रोक नहीं पाया. बस इतना कहना चाहूंगा कि एसपी जैसे लोग बिरले होते हैं. अगर सब एसपी हो जाते तो फिर इतनी बात कहां से होती. एसपी जैसा बनने की कोशिश करके भी कोई वैसा नहीं बन सकता. एसपी बनने के लिए उतना बड़ा मन होना चाहिए और अब तो पत्रकारिता के दलदल में बड़े मन वाले भी छोटे होने लगे हैं. आप अपनी जंग जारी रखें, आपको हमारी शुभकामना.

धन्यवाद्

आपका

आनंद राय

पूर्व अध्यक्ष

गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब गोरखपुर

[email protected]

09415210457

 

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...