मीडिया में कुछ ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो पाकिस्तान को कई तरह की सूचनाएं पहुंचा रहे हैं और पड़ोसी देश के लिए गुपचुप तरीके से काम भी कर रहे हैं। यह सनसनीखेज जानकारी सूचना और प्रसारण मंत्रालय तक पहुंचाई गई है। यह जानकारी किसी और को नहीं बल्कि देश की खुफिया एजेंसियों को मुंबई ब्लास्ट मामले की जांच के दौरान हत्थे लगी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इन सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए इनकी स्कैनिंग शुरू करा दी है। मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्र का कहना है कि टीवी न्यूज चैनलों, अखबारों, प्रेस क्लबों और पत्रकार संगठनों से जुड़े कुछ पत्रकारों पर शक की सुई घूम रही है। मीडिया से जुड़ा मसला होने के चलते सरकार इस पर फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है। सूत्रों की मानें तो मीडिया से जुड़े कुछ लोगों की पृष्ठभूमि और उनकी आवाजाही की चुपचाप छानबीन शुरू करा दी गई है।
इनके फोन काल पर भी नजर रखी जा रही है। खासकर ऐसे पत्रकारों का, जिनके पास विदेश से लगातार फोन आते रहते हैं या विदेश फोन किए जाते हैं, ब्योरा इकट्ठा किया जा रहा है। चर्चा यहां तक है कि मुंबई और दिल्ली, इन दो जगहों पर कुछ ऐसे पत्रकार मीडिया में सक्रिय भूमिका में हैं जो अपनी हैसियत का इस्तेमाल करते हुए अंदरखाने पड़ोसी देश के लिए कई तरह से मददगार बनते हैं। इसमें सूचनाएं पहुंचाने से लेकर इमेज बिल्डिंग तक का काम तक शामिल है।
ये पत्रकार पाकिस्तान विरोध की आग पर पानी डालने के लिए सक्रिय संगठनों को मदद पहुंचाते हैं और उनकी आवाज को मंच प्रदान करते हैं। बताया यह भी जाता है कि मुंबई ब्लास्ट के दौरान कई तरह की सूचनाएं कुछ पत्रकारों द्वारा विदेश भेजी गईं। कुछ ने अपने मीडिया माध्यम का पाकिस्तान में बैठे कुछ लोगों के लिए जान-बूझ कर इस्तेमाल होने दिया। सरकार मुंबई ब्लास्ट के आसपास के दिनों के काल डिटेल पर सतर्क नजर रखे हुए है। इन सभी आई-गई काल की जांच की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक मीडिया का मामला देखते हुए यह भी संभव है कि सरकार आरोपी मीडियाकर्मी के बारे में पहले मीडिया हाउस प्रबंधन को सूचित करे, विश्वास मे ले फिर उसके बाद कुछ दिनों का गैप देते हुए उसे पूछताछ के लिए हिरासत में ले। इसके पीछे वजह मीडिया हाउस की इमेज न खराब होने देना और मीडिया से पंगा न लेने की मंशा को दर्शाना है। कुछ ऐसे लोग भी हैं जो सीधे किसी मीडिया हाउस से जुड़े होने की बजाय पत्रकार संगठनों और प्रेस क्लबों की राजनीति करते हैं। इनके चाल-चलन पर भी अब नजर रखने की कवायद शुरू की जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार के पास जो सूचनाएं आई हैं, उसकी सच्चाई जांचने के लिए गुपचुप अभियान शुरू कर दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि अभी तक मीडिया को पवित्र इलाका मानकर सरकार इनसे जुड़ी गतिविधियों को आमतौर पर नजरअंदाज करती रही है। लेकिन मुंबई ब्लास्ट मामले की जांच के दौरान मिल रही जानकारियों के बाद सरकार मीडिया से जुड़े लोगों की भी गहन स्कैनिंग शुरू करने पर विचार कर रही है।
जो भी हो, इस मामले से पहले से ही कई तरह के सवालों और आरोपों में घिरी मीडिया को अब और हमले झेलने पड़ सकते हैं।











