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हमार टीवी अब आपका, दोयम दर्जे से बचने का वादा

कुमार संजॉय सिंहहमार टीवी को पूरी तरह से लांच कर दिया गया है। दो माह पहले इस पुरुबिया चैनल का साफ्ट लांच किया गया था। पाजिटिव मीडिया ग्रुप के इस न्यूज चैनल की लांचिंग पर ग्रुप मैनेजिंग एडीटर कुमार संजॉय सिंह का कहना है, “हम एक अनोखा प्रयोग कर रहे हैं। हम पूर्वी यूपी, बिहार-झारखण्ड की लगभग सभी बोलियों-भाषाओं में बुलेटिन प्रसारित करेंगे। अन्य चैनलों की तरह आंचलिकता के नाम पर अश्लीलता-फूहड़पन परोसने से बचेंगे। पुरुबियों की पसंद के नाम पर होने वाले बाजारू तिकड़म से लड़ेंगे।

कुमार संजॉय सिंहहमार टीवी को पूरी तरह से लांच कर दिया गया है। दो माह पहले इस पुरुबिया चैनल का साफ्ट लांच किया गया था। पाजिटिव मीडिया ग्रुप के इस न्यूज चैनल की लांचिंग पर ग्रुप मैनेजिंग एडीटर कुमार संजॉय सिंह का कहना है, “हम एक अनोखा प्रयोग कर रहे हैं। हम पूर्वी यूपी, बिहार-झारखण्ड की लगभग सभी बोलियों-भाषाओं में बुलेटिन प्रसारित करेंगे। अन्य चैनलों की तरह आंचलिकता के नाम पर अश्लीलता-फूहड़पन परोसने से बचेंगे। पुरुबियों की पसंद के नाम पर होने वाले बाजारू तिकड़म से लड़ेंगे।

हम लोग पूरब की सही तस्वीर सामने लाने की कोशिश करेंगे। वहां की जरुरतों व समस्याओं को सलीके से पेश करेंगे।” कंपनी की तरफ से हमार टीवी को पूरब के मुकम्मल चैनल के बतौर पेश किया जा रहा है। कंपनी की तरफ से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि हमार टीवी भोजपुरी, अंगिका,  मगही, बज्जिका, मैथिली, नागपुरी और खोरठा में भी न्यूज़ बुलेटिन प्रसारित कर रहा है। हमार टीवी अपने गुलदस्ते में जल्द ही अवधी और ब्रज भाषा को भी सजा लेगा।  हमार टीवी देश-दुनिया के सामने पुरबिया हित की बात रखने की कोशिश तो करेगा ही, पूरब की गौरवशाली संस्कृति, सभ्यता और परंपरा की पहचान दिलाने में अपनी भूमिका निभाने में आगे रहेगा।

हमार टीवीहमार टीवी को लांच करने वाली जुझारू टीम के मुखिया कुमार संजॉय सिंह को जनसत्ता, इंडिया टुडे, आज तक और एनडीटीवी में लगभग 18 साल के लंबे कार्यकाल ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक दोनों माध्यमों की गहरी पकड़ दी है। इसका इस्तेमाल उन्होंने इस ग्रुप के तीनों नये चैनलों हमार टीवी, फोकस टीवीएचवाई टीवी को अलग तेवर-पहचान दिलाने के लिये बखूबी किया है। उनका कहना है कि हमार टीवी का मिशन पुरुबिया इलाके के लोगों की असली छवि को दुनिया को सामने पेश करना है। अभी तक जो स्थिति है उसमें पुरुबिया बोली-भाषा के घटिया गीत-संगीत, दोयम दर्जे की फिल्में और भदेस कामेडी व कमेंट्री ही पुरुबिया लोगों की पहचान के रूप में बाजार में प्रचलित है। इनके जरिए ही देश-विदेश के दूसरे हिस्सों के लोग पुरबिया समाज व लोगों को आंकते हैं। पर वस्तु स्थिति इसके ठीक उलट है।

भोजपुरी समाज में जो समृद्ध लोक संगीत की परंपरा है, जो प्रतिभा है, जो मेधा है, जो समझ है, जो संस्कार है, जो रिश्ते-नाते हैं और जो सामूहिकता है… वो  कहीं देखने को नहीं मिलती। दिक्कत यह है कि बाजार के दबाव में जिस तरह की चीजें पुरबिया के नाम पर परोसी जा रही है, वो इस समृद्ध परंपरा के उलट है। कुमार का कहना है, “इस छवि को बदलने का काम हमार टीवी करेगा। हमने निर्णय लिया है कि चैनल को हिट करने के लिए हम दोयम दर्जे की फिल्मों या वीडियो आदि का सहारा कतई नहीं लेंगे। हम स्वस्थ कार्यक्रम पेश करेंगे जिनके जरिए भोजपुरी समाज की असल छवि लोगों तक पहुंचेगी। हम खुद को खबरों पर ज्यादा केंद्रित रखेंगे और इसके साथ जो भी दिखाएंगे वो संजीदगी के साथ दिखाएंगे।”

हमार टीवी पुरुबिया लोगों को एक अलग पहचान दिलाएगा। मिसाल के तौर पर  बाहर के लोगों को ये तो पता है कि देश के पहले राष्ट्रपति पुरुबिया इलाके से थे, पर ये नहीं पता होगा कि दिल्ली के पहले उपराज्यपाल एएन झा, पहले चीफ जस्टिस बीएन  सिंह, दिल्ली के पहले आईजी महावीर सिंह ये सब उसी इलाके के रहे हैं। ऐसे ही ढेर सारे तथ्य हैं जिन्हें दुनिया जानती ही नहीं है इसलिए पुरुबिया समाज की कुछ अजीब सी छवि उनके मन में है। हमार टीवी इस विडंबना से पुरुबिया पहचान को मुक्त कराने की लड़ाई लड़ेगा। इसलिए इस चैनल को केवल बिहार-झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में ही नहीं, पूरे देश के तमाम बड़े शहरों में भी डिस्ट्रीब्यूट किया जा रहा है।

चैनल की तरफ से कहा गया है कि हमार टीवी को बाहर के अलावा एक लड़ाई अपनी जमीन पर भी लड़नी है। अपने  राजनेताओं की अदूरदर्शी नीतियों की वजह से पुरुबिया इलाके के लोग काफी झेल चुके हैं और झेल रहे हैं। जमींदारी खत्म करने के नाम पर यहां गेहूं के साथ घुन की तरह मंझौले किसानों को भी पीस दिया गया, नतीजतन परंपरागत तौर पर लगभग स्वावलंबी रहे गांव शहरों की बाट जोहने लगे और फिर  साठ के दशक में किसान और मजदूर दोनों गांव छोड़कर भागे मगर बंगाल में जूट मिलें, नेपाल में चावल मिलें बंद होने लगीं। असम के चाय बागान में अलगाव की आग लगी तो बडी तादाद में वहां काम कर रहे पुरुबिया मजदूरों के सामने संकट आ गया और फिर ढाई दशक पहले पुरुबियों ने बड़े पैमाने पर दिल्ली, पंजाब और मुंबई का रुख किया। इसके बाद ही उनकी छवि पर और अब तो उनके होने पर भी हमले शुरू हो गए। कुल मिलाकर विस्थापन व जीविकोपार्जन की पीड़ा और अपने नेताओं की नालायकी के शिकार इन पुरुबियों की पीड़ा अब भी अनसुनी सी है। हमार टीवी इन सब मुद्दों को संज़ीदगी से छुएगा। इसके लिए चैनल पर सत्तर फ़ीसदी खालिस ख़बर होगी। बाकी के तीस फीसदी में जो प्रोग्राम होंगे, वो भी इन्हीं बड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द होंगे।

इस ग्रुप की खास बात यह है कि इसने आज तक सिर्फ कामयाबियों के दास्तान लिखे हैं। ग्रुप के अध्यक्ष मतंग सिंह का मानना है कि हमार टीवी पॉजिटिव परिवार के गुलदस्ते का एक ऐसा फूल है जो अपनी अलग ही खुशबू बिखेरेगा। मतंग सिंह के अनुसार इसी साल पॉजिटिव ग्रुप तीन और चैनल लाने की तैयारी में है।

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