
प्रेस विज्ञप्ति : ”अपनी तिकड़मों के बूते उत्तर प्रदेश में शराब के व्यवसाय में एक तरह से एकाधिकार कायम करने वाले पोंटी चड्ढा चार साल से पिछले दरवाजे से कोयले के कारोबार में भी जम कर हाथ काले कर रहें हैं लेकिन यह सारा काम इतनी सफाई से हो रहा है कि किसी को कानोंकान खबर तक नहीं है”। यह बात हम नहीं बल्कि लखनऊ और इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाला हिंदी अखबार डेली न्यूज एक्टिविस्ट (डीएनए) कह रहा है। आज 5 मई के अपने अंक में इस अखबार ने प्रथम पेज पर आठ कालम टाप बाक्स में इसी विषय पर स्टोरी का प्रकाशन किया है। शीर्षक है- ”शराब के साथ कोयले के कारोबार में भी हाथ काले”।
डीएनए की इस स्टोरी के मुताबिक, ”उत्तर प्रदेश में 14,000 ईंट-भट्ठों व हजारों छोटे उद्योगों को कोयले की आपूर्ति के लिए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2006 में उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम को नोडल एजेंसी बनाया था। भारत सरकार से कोयले के उठान और विपणन कार्य के लिए निगम ने रीयल कोनर्जी प्राइवेट लिमिटेड नामक एक कंपनी के साथ वर्ष 2006 में तीन वर्षीय करार किया था। इस कंपनी के खाने के दांत और हैं और दिखाने के अलग। वैसे तो रीयल कोनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स में दिल्ली निवासी गजराज जैन, नोएडा निवासी जुनेद अहमद और जालंधर निवासी मनमोहन सिंह वालिया शामिल हैं परंतु असली मालिक और पर्दे के पीछे से इसे चलाने वाले वास्तव में पोंटी चड्ढा हैं।”
अखबार ने रीयल कोनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के शेयर होल्डरों के विवरण को भी प्रकाशित किया है जिससे साफ पता चलता है कि कंपनी के आसली मालिक पोंटी चड्ढा ही हैं। अखबार का कहना है कि शराब और कोयला कारोबीर पोंटी चड्ढा का यूपी शासन का एक वरिष्ठ अधिकारी खुलकर साथ दे रहा है। वास्तविक हकदारों को सिर्फ 30 से 40 फीसदी ही कोयला मिल रहा है।
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