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कमल मोरारका से सबक लें दूसरे मीडिया मालिक

मुंबई के प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार आफ्टरनून डिस्पैच एंड कूरियर में कई तरह के बदलाव होने की खबर है। सबसे पहली जानकारी यह मिली है कि इस अखबार के एडिटर के रूप में टाइम्स आफ इंडिया की एडिशन इंचार्ज कैरोल एंड्राडे ने ज्वाइन कर लिया है। दूसरी सूचना है अखबार के नए आफिस में शिफ्ट होने के बारे में। आफ्टरनून डिस्पैच का आफिस फोर्ट एरिया से हटाकर अब दुनिया के सबसे महंगे इलाकों में शुमार किए जाने वाले नरीमन प्वाइंट में शिफ्ट कर दिया गया है। तीसरी खबर है सेलरी में बढ़ोतरी की। मंदी को धता बताते हुए प्रबंधन ने आफ्टरनून डिस्पैच में काम करने वाले पत्रकारों-गैर-पत्रकारों की सेलरी में जोरदार बढ़ोतरी की है।  

मुंबई के प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार आफ्टरनून डिस्पैच एंड कूरियर में कई तरह के बदलाव होने की खबर है। सबसे पहली जानकारी यह मिली है कि इस अखबार के एडिटर के रूप में टाइम्स आफ इंडिया की एडिशन इंचार्ज कैरोल एंड्राडे ने ज्वाइन कर लिया है। दूसरी सूचना है अखबार के नए आफिस में शिफ्ट होने के बारे में। आफ्टरनून डिस्पैच का आफिस फोर्ट एरिया से हटाकर अब दुनिया के सबसे महंगे इलाकों में शुमार किए जाने वाले नरीमन प्वाइंट में शिफ्ट कर दिया गया है। तीसरी खबर है सेलरी में बढ़ोतरी की। मंदी को धता बताते हुए प्रबंधन ने आफ्टरनून डिस्पैच में काम करने वाले पत्रकारों-गैर-पत्रकारों की सेलरी में जोरदार बढ़ोतरी की है।  

एक तरफ मुंबई के डीएनए और टीओआई जैसे अखबारों में मंदी के नाम पर छंटनी करने और इनक्रीमेंट रोकने जैसे नकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं तो आफ्टरनून डिस्पैच ने आफिस बदलकर व सेलरी बढ़ाकर मुंबई मीडिया जगत में सकारात्मक संदेश दिया है। आफ्टरनून डिस्पैच के कर्ता-धर्ता मशहूर उद्योगपति और मीडिया शख्सियत कमल मोरारका हैं। उनकी ही सोच का नतीजा है हिंदी का मशहूर साप्ताहिक अखबार चौथी दुनिया जिसे कुछ महीनों पहले मशहूर पत्रकार संतोष भारतीय के नेतृत्व में दुबारा शुरू किया गया है।

कमल मोरारका ऐसे मीडिया उद्यमी माने जाते हैं जो अखबार के रोजाना के काम में कभी हस्तक्षेप नहीं करते और मीडिया में कंटेंट की की टीम की संप्रभुता और कंटेंट की सर्वोच्चता व पवित्रता का हर हाल में सम्मान करते हैं। चौथी दुनिया के पुनर्प्रकाशन और आफ्टरनून डिस्पैच की ताजा हलचल से साबित होता है कि मीडिया में मंदी का हल्ला ज्यादा है, मंदी का असल असर वाकई बहुत कम है। काश, मंदी जैसे थोड़े बहुत संकट के इस दौर में दूसरे बड़े मीडिया हाउसों के मालिक भी कुछ इसी तरह का उदार व्यवहार अपने पत्रकारों के साथ दिखा पाते और भारतीय मीडिया इंडस्ट्री में एक नई नजीर कायम कर पाते!

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