नवभारत अखबार (मध्य प्रदेश) के मालिकों ने धोखाधड़ी की जो घटना की उसने पत्रकारिता को शर्मासार कर दिया। मशीन के नाम पर 16 करोड़ रुपये का जो प्रकरण हुआ है, उससे सभी हतप्रभ हैं। प्रजातंत्र के चौथे स्तंभ पर सबकी नजर रहती है और यह स्तंभ सरकार और जनता के मध्य सेतु की भूमिका निभाता है परन्तु इन दिनों चौथा स्तंभ भी बड़े व्यापारी की भूमिका अदा कर रहा है और इस स्तंभ के व्यापारी अधिक पैसा कमाने के लिये कई तरह के गलत कार्य करने लगे हैं।
एक नहीं कई उल्टे कार्य दैनिक नवभारत (म.प्र.) के मालिकों द्वारा किये गये। एन.बी. प्लांटेशन में करोड़ों रुपये जनता से लेकर डकार गये। न्यायालय से धारा 138 के कई प्रकरण हैं जिनमें कई गैर-जमानती वारंट जारी है परन्तु पुलिस विभाग समाचार पत्र मालिक एवं पूर्व सांसद होने के कारण प्रफुल्ल माहेश्वरी को गिरफ्तार नहीं कर पा रही है। गिरफ्तारी न करना आम जनता के साथ अन्याय तथा न्यायालय की अवमानना है। इतना ही नहीं, प्रफुल्ल माहेश्वरी ने समाज को मिली सरकारी जमीन को भी बेच दिया था। आपत्ति लगने पर जमीन बिकने से रुकी। ऐसे अनेकों प्रकरण हैं।
महाराष्ट्र बैंक प्रकरण में केंद्रीय जांच ब्यूरो, दिल्ली की टीम ने फर्जी लोन के मामले में राजधानी के बैंक ऑफ महाराष्ट्र एवं मेसर्स नवभारत प्रेस के मालिक माहेश्वरी ग्रुप के आवास और सात ठिकानों पर छापे की कार्रवाई की। साथ ही फर्जी लोन के मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद प्रफुल्ल माहेश्वरी, संदीप माहेश्वरी, संजीव माहेश्वरी, श्रीमती बृज माहेश्वरी से भी पूछताछ की गई है। सीबीआई के एडीजीपी हर्ष बहल ने बताया कि वर्ष 2004 में माहेश्वरी के एमपी नगर जोन वन स्थित नवभारत प्रेस में मशीनरी लगाने के लिए बैंक ऑफ महाराष्ट्र से 15.67 करोड रुपए ऋण के लिए आवेदन किया गया था।
बैंक से मंजूरी मिलने के बाद बैंक मैनेजर राजन मल्होत्रा के सहयोग से चार व्यतियों संदीप चौरसिया, प्रदीप चौरसिया, राकेश भाटिया, अशोक सिंह के नाम से फर्जी एकाउंट खोले गए थे और पूरी ऋण राशि इन्हीं फर्जी एकाउंट में ट्रांसफर करा ली। इस पूरे मामले में बैंक को धोखा देने के आरोप में सीबीआई ने नवभारत प्रेस के डायरेटर प्रफुल्ल माहेश्वरी, संजीव माहेश्वरी, संदीप माहेश्वरी सहित चार निजी लोगों के खिलाफ 420 का मामला दर्ज कर लिया है। इसी सिलसिले में बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल बैंक में भी सीबीआई की टीम पहुंची थी।
भोपाल से राधाबल्लभ शारदा की रिपोर्ट












bijay singh
April 21, 2010 at 2:50 pm
ye purane shatir hain .inke eek vp hain-ashutosh srivastav ,wo bhi wahi hain.employee ka paisa dete nahi bas ghapla karne me sabse aage.
kadi se kadi karyawahi ho.