
न्यूज 24 पर 26 जनवरी की शाम 7.30 बजे ‘न्यूज स्पेशल’ का सब्जेक्ट था- ‘गणतंत्र तब और अब’। साठ साल पहले क्या था और साठ साल बाद उसकी तस्वीर कैसे बदल गई है, ये शो इसी पर आधारित था। पहली बार ऐसा प्रयोग हुआ जब एक ही सेट पर आधी तस्वीर ब्लैक एंड व्हाइट थी और आधी रंगीन। एंकर सईद अंसारी पेश कर रहे थे साठ साल पहले की तस्वीर, ब्लैक एंड व्हाइट हुलिए में और साठ साल बाद की तस्वीर पेश कर रही थीं अंजना ओम कश्यप।
साठ साल पहले कौन सी कारें सड़क पर दौड़ती थीं? किनके पास ऐसी कारें थीं? आज कैसे बदल गई है कारों की दुनिया? साठ साल पहले कैसी थीं सड़कें, क्या थी सड़कें, आज समंदर में कैसे बन रही है सड़क? इस्टीम इंजन से मेट्रो युग में जाती ट्रेन का सफर भी दिखाया गया इस शो में। यही नहीं, कैसे टाइपराइटर की जगह आया लैपटॉप। साठ साल पहले कैसा होता था कैमरा, अब डिजिटल कैमरे ने कैसे बदल दी फोटोग्राफी की दुनिया। इसी तरह तब और अब की तमाम बातों की पूरी बानगी है इस शो में। एक नया प्रयोग ये भी था कि इस शो में कोई स्क्रिप्ट नहीं थी। हर संवाददाता मौके पर मौजूद होकर तब और अब की कहानी कह रहा था। ये शो न्यूज 24 पर बुधवार सुबह 11.30 बजे फिर से प्रसारित होगा। प्रेस विज्ञप्ति












Vikshpit.Pathak
January 26, 2010 at 5:00 pm
Waise is channel ki ek karastani to batayi nahi aapne, Emotional Atyachaar ke sting me jo ulta dank pada tha channel ko. Un ladkiyon ne jab ye khulasa kar diya ki Channel ki taraf se phone karke on screens emotions dikhane ko bola gaya hain to kis tarah is mahila anchor ne khisiyakar vyaktigat aarop lagane shuru kar diye the.
Rishi Naagar
January 26, 2010 at 8:15 pm
Kaash yeh bhi batate ki 60 saal pahle kis tarah hoti thee patrakarita ur aaj kya ho raha hai…
B.P.Gautam
January 27, 2010 at 2:30 am
Ansari Ko Bolne Ki Tamij Nahi Hai Phir Na Jaane Kaun Si Seting Ke Aadhar Par Banda Tika Huaa Hai.Tej Aur Ashudh Bolne Ke Karan Achchhe Samachaar Bhi Bure Lagte Hain………Sirf Raat Me Time Pass Ke Liye Sahi Hai…Us Samay Dekh Kar Koi Jhunjhlayega To Nahi.
kumar varun
January 27, 2010 at 5:32 am
हाल ही में 22 जनवरी की रात को मौका मिला दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल जाने का …मेरे कुछ परिचित आ रहे थे…उनको लेने गया था…ट्रेन लेट थी तो वक़्त भी काटना था …सोचा की टर्मिनल घूम कर देख लूं…तभी जी.आर.पी के एक जवान से मुलाकात हुई…सिकरवार नाम था उनका…उनके साथ स्टेशन पर चहल कदमी करने लगा…स्टेशन बहुत बढ़िया बना है….सुना है की आने वाले वक़्त में दिल्ली का सबसे बड़ा टर्मिनल होगा…. देश भर के लिए रेल यहाँ से मिला करेंगी…..मैं सोच रहा था की इसको बनाने में करोड़ों रूपये की लागत आई होगी…नजदीक ही मेट्रो स्टेशन भी है…बस स्टेशन भी सटा हुआ है….लाखों रूपये का सामान भी यहाँ रखा हुआ है…तब तो यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था भी चाक चौबंद होनी चाहिए….लेकिन जी.आर.पी जवान ने बताया की कुल 6 जवान ही यहाँ की सुरक्षा में लगे हुए हैं…मैंने दिल में सोचा की गणतंत्र दिवस में कुल दो दिन बाकी हैं,पूरी दिल्ली में है अलर्ट है…सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद है…………….मगर यहाँ कुछ भी नहीं…इतने बड़े स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था मात्र 6 लोगों के हवाले ?
उस रात कोहरा बहुत था….बर्फीली हवाएं चल रहीं थीं…ट्रेन को १० बजे आना था मगर ट्रेन पांच घंटे लेट थी….पूरा स्टेशन खाली……बस मैं और मेरे साथ जी.आर.पी का वो जवान…..
उसने भी शराब पी रखी थी….पूछने पर बताया की “साब ठण्ड बहुत है न इसलिए..”…. तभी एक और आदमी मिला वो कोई शर्मा जी थे….वहीँ पर नौकरी करते थे…वो भी टुन्न….
मैं थोडा हैरान की कोई और क्यों नहीं है यहाँ पर..? ….खैर मैं घूमता रहा ….एक पूछताछ का काउंटर भी था…खुला था ….ट्रेन के बारे मैं मैंने उससे पूछा की भाई ट्रेन कितना लेट है?वो बोला की मुझे क्या पता ?सिस्टम ख़राब है….
मैं वहीँ पर खड़ा होकर इंतज़ार करने लगा तो देखा की यहाँ पर जैसे हालत है कोई बड़ा वारदात हो जाये तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए….करोड़ों रूपये लगा कर स्टेशन बनाया और उसको भगवान् भरोसे छोड़ दिया….
आतंकवादियों ने छब्बीस जनवरी को कोई बड़ी वारदात करने का प्लान बनाया है ये खबर उसी दिन के अखबारों की सुर्खियाँ थी…कॉमन वेल्थ खेलों के लिए दिल्ली को अंतर्राष्ट्रीय लुक देने का पूरा प्रयास किया गया …ये स्टेशन भी इन्ही प्रयासों का फल है ……मगर यहाँ कोई क्यों नहीं है?कोई नहीं इस स्टेशन पर धयान देने वाला…?
प्लेटफार्म की तरफ गया तो देखा की ठण्ड की वजह से टीन से पानी टपक रहा था….यानि की यदि कोई इंतज़ार करने के लिए यहाँ खड़ा होयेगा तो भीगने की पूरी गारंटी है….क्या यही है international quality ?
जी.आर.पी जवानों के लिए जो कमरा बनाया गया था उसमें वो लोग आराम से हीटर जला कर हाथ सेक रहे थे….अब मैं खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा था….मैं सोचने लगा की यदि इस वक़्त कोई धमाका हो जाये तो मैं तो बिन मौत मर जाऊंगा……
पूछने पर उन लोगों ने बताया की स्टेशन अभी ट्रायल पर है….ढंग से शुरू तो मार्च में होगा …तभी सुरक्षा बढ़ेगी….
खैर , सबसे बढ़िया बात ये थी की वक़्त गुजर रहा था ,घडी की सुइयां आगे बढ़ रहीं थीं…कुछ लोग आने लगे थे….दो बजते बजते बीस के आस पास लोग वहां आ चुके थे…बाहर texi वाले और ऑटो वाले भी दिख रहे थे….ट्रेन आई और मेरे परिचित भी ….में उनको लेकर वहां से निकल गया ….मगर मेरे दिमाग से अभी तक ये बात नहीं निकल पा रही की ये स्टेशन सरकार से किसके भरोसे छोड़ा है?
kumar varun
9997507508
Peter Haddad
January 27, 2010 at 7:20 am
Rishi Naagar,
bahut accha vyanga kiyaa hai aapne
pawan kumar
January 27, 2010 at 9:22 am
kash pehle or ab ki patrkarita me aaya jameen or aasmaan ka antar bhi dikhate. or ye bhi dikhate k kis trah se media bajaarwad me badal gayi.
vaibhav shiv
January 27, 2010 at 5:40 pm
kas aap us sachhai ko bhi dikhate jaha ab gantantr nahi tantra me gan hai ….kas ye bhi tab aur ab kaisi patrkarita ho rahi hai kaise mediy trp k liye kuchh bhi parosne lagi