: न्यूज शतक : सोने से पहले सौ। जी हां, सिर्फ 15 मिनट में देखिए सौ खबरें। खबरों की भूख मिटाने न्यूज24 पर आ गया है ‘न्यूज शतक’। न्यूज 24 पर रात 11.30 बजे आप देख सकते हैं ‘न्यूज शतक’। न्यूज 24 का ये नया बुलेटिन देश विदेश से खंगालकर सौ सबसे अहम खबरें आपको दिखाएगा। देश विदेश की सभी बड़ी खबरें आपको इस बुलेटिन में मिलेंगी।
न्यूज शतक दुनिया भर के न्यूज चैनलों के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड है। अभी तक एक बुलेटिन में इतनी खबरें किसी भी चैनल ने नहीं दिखाईं। दूसरे चैनलों को 50 खबरें जुटाने में ही पसीना छूट जाता है। इस लिहाज से न्यूज 24 ने एक नया इतिहास रचा है। सौ खबरों का कोई बुलेटिन सबसे पहले न्यूज 24 पर ही आया है। ये बुलेटिन खास तौर पर उनके लिए है जो कम वक्त में दिन भर की सारी खबरें देख लेना चाहते हों। या फिर दिन भर की भागदौड़ के चलते जो खबरों से नावाकिफ रह गए हों, उनके लिए ये बुलेटिन बहुत खास है। खर्च करने हैं सिर्फ 15 मिनट और मिलनी हैं देश विदेश की सौ खबरें। तो सोने से पहले सौ खबरें देखना मत भूलिए।
बुलेटिन- न्यूज शतक
वक्त-रात 11.30 बजे












Abhishek sharma
August 5, 2010 at 9:14 am
Regional channels me to perday 100 se jyada visual story aati hai.scroll, flash,breaking.ki koi seema nahi.koi teer nahi maar dala 15 min me 100 khabar.
[email protected]
Saril Shanker
August 5, 2010 at 9:44 am
Dear Abhishek Ji,
Lagta hai aap media mein kaam nahin karte kyonki agar karte hote toh aisi choti baat nahin karte. Kisi ki kisi se tulna karna accha nahin lagta. Aur agar aap galati se media mein kaam karte hain toh apna vyavhar sudhariye, kisi ki taang kheechna, majak banana kisi bhi tarah se theek nahin.
Vaise meri taraf se News 24 to unke is abhinav prayog ke liye meri tarf se hardik badhai.
shabab anwar(journalist)
August 6, 2010 at 5:38 am
nishit roop se yeh news24 ka ek nyaa kirtimaan hai.meri or se bahut2 badhaai
abhishek
August 6, 2010 at 7:09 am
डिसक्लेमर की तरह ख़बरें पढ़ी जाने लगी हैं। बीमा विज्ञापन के बाद तेजी से बड़बड़ाने की आवाज़ आती है कि इश्योरेंस इज द सब्जेक्ट टू..टाइप से। जो सुनाई तो देता है समझ नहीं आता। तमाम न्यूज़ चैनलों पर न्यूज़ अब पांचवें गियर में पढ़ा जाने लगा है। बैकग्राउंड म्यूज़िक से ही अहसास हो जाता है कि या तो आप वीडियो पार्लर में कार चला रहे हैं या नोएडा दि्ल्ली एक्सप्रेसवे पर कार भगा रहे हैं। एक्सलेटर जैसी कानफोड़ू आवाज अहसास दिलाती है कि एक खबर खत्म हो कर दूसरी आ गई है। फटाफट,सुपरफास्ट,तेज,स्पीड टाइप के नामों के कवर के नीचे न्यूज उसेन बोल्ट की तरह दौड़ लगा रहा है।
ज़रूर दलील होगी कि लोगों के पास वक्त कम है। उन्हें दफ्तर से लेकर पखाना जाना होता है। इस बीच टीवी भी देखना होता है तो क्यों न दरवाज़े तक पहुंचते पहुंचते पूरी बुलेटिन खत्म कर दी जाए। जल्दी ही ऐसा पत्रकार नौकरी पा जाएगा जो पांच सेकेंड में पांच ख़बरें पढ़ देगा। मीडिया में स्पीड एडिटर का पद बन सकता है। ये सभी न्यूज़ शो लोकप्रिय हैं। टीआरपी के बीस हज़ार बक्सा परिवार में सराहे जा रहे हैं। वर्ना टीआरपी से निकले आइडिया उत्पादक ऐसे शो को पांच मिनट में गाड़ कर देते। लेकिन न्यूज दनादन के इस काल में खबरें चटपटी के साथ झटपटी होती जा रही हैं।
मालूम नहीं किस डाक्टर ने बताया कि दर्शक पांच मिनट में एक खबर को नहीं समझ सकता। उसके पास वक्त कम है इसलिए पांच मिनट में पचास ख़बरें परोस दो। वो भकोस लेगा। जब पांच मिनट में एक खबर के लिए टाइम नहीं तो किसने किसके कान में जाकर नापा है कि पांच मिनट में पचास खबरें सुनना चाहता है। क्या हम यह मानने लगे हैं कि खबरें इतनी ज़रूरी हो गई हैं कि आदमी डिस्क्लेमर की तरह पढ़े जाने वाले न्यूज को सुनने के लिए तैयार है। ये ख़बरों को मार कर उलटा लटकाने का नया तरीका है। दलील यही होगी कि आजकल लोग बदल रहे हैं। वो ऊर्जावान ख़बरों को पसंद करते होंगे। कुछ दलील ऐसी भी होती है कि ख़बरें बदल गई हैं। मालूम नहीं खबरें बदली हैं या खबरों को लिखने वाले बदले हैं। शायद वो लोग सही भी हैं। न्यूज में लोगों की दिलचस्पी कम होती जा रही है। लेकिन टॉप के चैनलों के किसी भी कार्यक्रम को देखकर नहीं लगता कि न्यूज चैनलों को देखने वाले दर्शकों की संख्या गिर गई हो। थोड़ा बहुत अंतर आता रहता है। लेकिन अगर न्यूज इतना ही ज़रूरी है तो वो क्रेक मेल सेवा की तरह आकर समाज और दर्शक का क्या भला करता है। सुपर फास्ट या क्रेक सेवा या बिना ब्रेक की ख़बरें।
ये एक नया ट्रेंड आ गया है। फार्मूला वन की रफ्तार पकड़े ख़बरें ब्रूम ब्रूम कर रही हैं। ऐसी रफ्तारवान ख़बरों से कैसा मानस बन रहा है भगवान जाने। इन सबका विरोध करने वाले हमारे जैसे लोग पुरातनपंथी ज़रूर कहलाने लगेंगे। लेकनि आप देख रहे हैं कि ख़बरों को प्रस्तुत करने का फार्मेट ही बदल रहा है। ख़बरें तो फिर भी वही हैं। अगर सब कुछ बदल गया है कि तो कोई यह भी साबित करें कि ख़बरें भी बदल गईं हैं। अगर वक्त की इतनी ही कमी हो गई है तो क्या यह माना जाए कि अब न्यूज देखने वाले लोग ही नहीं रहे। अगर न्यूज देखने वाले लोग हैं तो न्यूज शो की टीआरपी अच्छी क्यों नहीं है। टीआरपी एक घपले की तरह परिभाषा के सभी मानकों को बदल रहा है। आज तक कोई ऐसा नहीं मिला जिसके घर कभी टीआरपी मीटर लगा हो। क्या ऐसा हो सकता है कि आपके घर में टीआरपी वाले तीन रिमोट दे जाएं। क्या यह मुमकिन है कि स्त्री,पुरुष और बच्चा अलग अलग समय में एक टीवी को तीन रिमोट से चलाएगा ताकि उसका कोड दर्ज होते ही यह पता चल जाए कि दस बजे बच्चे ने देखा और एक बच्चे महिलाओं ने। फिर यह धारणा बन जाती है कि दोपरह में महिला दर्शकों की संख्या ज़्यादा होती है तो बेलन भी बन गया फैशन टाइप के शो दिखाइये। आम तौर पर हम और आप यही करेंगे कि थोड़े दिनों बाद एक ही रिमोट का इस्तमाल करने लगेंगे।
न्यूज़ को लेकर इतने फार्मूले गढ़े जा रहे हैं या बदले जा रहे हैं कि ठिकाना नहीं। हम सब फार्मेट के चैंपियन कहलाने लगे हैं। कोई खबरों को खोजने और गढ़ने का खिलाड़ी नहीं बन पा रहा है। अगर सुपरफास्ट खबरें ही हकीकत हैं तो आधे घंटे के बुलेटिन के खात्मे का वक्त आ गया है। अब यह हो सकता है कि एक आधे घंटे में पांच बुलेटिन लांच कर दिये जाएं। खबरों को पढ़ने की जगह कोई डिस्क्लेमर ही पढ़ जाए। किसे पता चलेगा कि न्यूज था या डिस्क्लेमर
ravish kumar ki prasangik line
unknow
August 8, 2010 at 7:19 pm
aam admi, jan samasya or ganvo ki khabar to aaj bhi nahi ati. ek-ek ghanta rahul mahajan par laga dete h ye channel. jis din koi channel ganv or garib ki khabar telecast karega us din chahe 15 minute me 5 hi khabare aye vo hogi khabar. ye sab fande h.
rahul singh
August 9, 2010 at 9:49 pm
[i]newes 24 walo ko meri taraf se bagut-2 badhai q ki 15 mint me 100 khabre dikhana apne aap me bahut badi bat hai.aur isse fayda ye hoga ki thode hi time me hum desh duniya ki khabaro se ru ba ru ho sakenge.[/i]
rajesh
October 19, 2010 at 9:35 pm
acchi suruat hai