मीडिया से कुल 15 लोग परिषद में शामिल किए गए : राष्ट्रीय एकता परिषद (एनआईसी) का जो पुनर्गठन किया गया है उसमें इस बार मीडिया से जुड़े काफी लोग शामिल किए गए हैं. हिंदी अखबारों, हिंदी समाचार एजेंसियों, हिंदी चैनलों से भी कई लोग राष्ट्रीय एकता परिषद के हिस्से बनाए गए हैं. भास्कर के ग्रुप एडिटर श्रवण गर्ग, हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर, नई दुनिया के प्रधान संपादक आलोक मेहता, यूएनआई के प्रधान संपादक एके भंडारी, एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर पंकज पचौरी ऐसे नाम हैं जो सीधे तौर पर हिंदी पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं. उर्दू पत्रकारिता की बात करें तो इंक्लाब के एडिटर शाहिद लतीफ और सियासत के संपादक जाहिद अली खान को राष्ट्रीय एकता परिषद में शामिल किया गया है. दी हिंदू अखबार के एन. रवि और पी. साईंनाथ भी परिषद में शामिल किए गए हैं.
टीओआई से कंसल्टिंग एडिटर दिलीप पडगांवकर, एचटी व हिंदुस्तान की मालकिन शोभना भरतिया, पीटीआई के सीईओ एमके राजदान, इंडियन एक्सप्रेस के एडिटर इन चीफ शेखर गुप्ता, मलयाला मनोरमा के एडिटर मैमेन मैथ्यू, बिजनेस स्टैंडर्ड के एडिटर टीएन नैनन, सन टीवी नेटवर्क के चीफ एडिटर वी. राजा, लोकसत्ता के एडिटर कुमार केतकर, सीएनएन आईबीएन के चीफ एडिटर राजदीप सरदेसाई, एनडीटीवी की ग्रुप एडिटर बरखा दत्त और डेक्कन हेराल्ड के एडिटर केएन तिलक कुमार भी राष्ट्रीय एकता परिषद के मीडिया कोटे में नामित हुए हैं.
राष्ट्रीय एकता परिषद के अध्यक्ष प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हैं. पुनर्गठन के बाद परिषद के सदस्यों की संख्या 147 हो गई है. सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार नवगठित परिषद में प्रधानमंत्री के अलावा 14 केन्द्रीय मंत्री, लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता, राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के 30 मुख्यमंत्री, 20 राजनीतिक दलों के नेता, छह राष्ट्रीय आयोगों के प्रमुख, 20 मीडियाकर्मी, 15 व्यवसायी, 33 जानी-मानी हस्तियां तथा सात महिला प्रतिनिधि हैं. एनआईसी राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श और असरदार पहलकदमियों के मंच के तौर पर काम करती है. वह राष्ट्रीय एकता से जुड़े मसलों की समय-समय पर समीक्षा कर सरकार को अपनी सिफारिशें देती है.












akash
April 13, 2010 at 5:55 pm
Basically it is a reward to Mr Arun Kumar Bhandari, the General Manager and Chief Editor of United News Of India (UNI) for the selfless service, he is doing to revive the sinking ship of UNI. It is an open secret that UNI group has been a victim of long running conspiracy. Also, it is a severe blow to those, who are trying hard to sabotage all such positive moves. Such persons, at the behest of some elements, hidden behind the curtain, are trying to create trouble for those, who are leaving no stone unturned to retain lost glory of UNI.
anil pande
April 13, 2010 at 7:31 pm
राष्ट्रीय जुगाड़ परिषद !
……………………………..
यारों ने यहाँ भी जुगाड़ फिट कर ही लिया.
हिन्दी पत्रकारिता के मठाधीश और अंग्रेज़ी के माफिया का मिलन स्थल बन गया तथाकथित राष्ट्रीय एकता परिषद.
वही घिसे-पिटे नाम.
आलोक मेहता तो हर सब्ज़ी का आलू है !
शशि शेखरवा तो यहाँ भी गरियाता फिरेगा.
इनसे कोई पूछे , कितने पत्रकारों की नौकरी खाई है, और कितनो का करियर तबाह किया है?
अपना उल्लू सीधा करने के अलावा, देश की एकता के लिए कौन सी इबारत लिख दी है?
winit
April 14, 2010 at 8:47 am
Ab Tazzub nahi hota ……….jab media me apne se safal logo ki uplabdhi par kuch kunthagrast log shaalinta k dayre se bahar jake tippani karte hai….apni baat ko prabhavi banane k liye shabdo ka sahi chayan na kar pane wala khud ko patrakar kehta kyu hai,??, sadak chhap mawali aur unme antar to hona hi chahiye
Dewaker
April 14, 2010 at 10:22 am
खुदा का शुक्र विनोद मेहता और नीलाम मिश्र इस जमात में शामिल नहीं हैं। कोई तो बचा इस हुजूम से।
vikash
April 14, 2010 at 1:34 pm
Congratulations to Mr Arun Kumar Bhandari for being inducted in the council. Basically, he is working overtime to bring UNI back on track. My best wishes to him.
अमित गर्ग
April 14, 2010 at 2:11 pm
रह-रह आँखों में चुभती है पथ की निर्जन दोपहरी
आगे और बढे तो शायद दृश्य सुहाने आयेंगे…!
सुरेश पांडे
April 14, 2010 at 2:59 pm
राष्ट्रीय एकता परिषद में यूएनआई के प्रधान संपादक भंडारी जी के नॉमिनेशन पर भोपाल के सेंटर प्रेस क्लब ने भंडारी जी को बधाई दी है। इस संदर्भ में आज सेंटर प्रेस क्लब की एक बैठक आयोजित की गई जिसमें अरूण भंडारी जी की नियुक्ति पर उन्हें बधाई दी गई। क्लब के सदस्यों ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि ये मध्यप्रेदश के प्रेस जगत के लिए गौरव की बात है।
यूएनआई का एक कर्मचारी
April 14, 2010 at 3:03 pm
राष्ट्रीय एकता परिषद में यूएनआई के प्रधान संपादक अरुण भंडारी जी की नियुक्ति से यहां काम करने वाले कर्मचारियों में काफी उत्साह है। मेरी राय में अब उन्हें संस्थान में वीआरएस सकीम लागू कर देनी चाहीए जिससे संस्थान को उन लोगों से मुक्ति मिले जो कोई काम नहीं करते। यूएनआई को अब नए और उर्जावान लोगों की जरूरत है।
anil pande
April 14, 2010 at 7:25 pm
winit ji,
दरबार की भाषा बड़ी शालीन होती है.
जो कड़वी बात लिखते हैं, वो मवाली नही होते. और न ही असफल !
कभी ब्लू लाइन बसों मे सफर कीजिए. गली-कूचों , झोपड़ पट्टियों से गुज़ारिए.
मवालियों की भाषा की झलक मिल जाएगी.
या फिर, कभी शशि शेखर जी के इर्द-गिर्द बैठिये. उनके मुखारविंद से जो सड़क छाप गाली सुनेगे, तबीयत हरी हो जाएगी.
आपने कैसे मान लिया कि सत्ता के इन शोहदों से कम सफल हैं हम?
इस देश का हर आम पत्रकार, और सिर्फ सूचना से सरोकार रखने वाला कलम का सिपाही इनसे बेहतर है !
SONU KUMAR
April 17, 2010 at 6:52 am
ARE BHAI ESA LAGTA HAI PATRKARITAKE NAM PAR DESH KO DHOKA DENE VALA PURA GANG IKHTA HO GYA
pawan sahu
April 18, 2010 at 9:16 am
sabse pehle in mahanubhavo ko badhai jo is parishad ke sadasya bane he, mme bhi is kshetra ka chota hissa hoon to mera bhi kartavya banta he ki me apne kshete ki kher khabar loon. main inke bare itna hio kehna chahoonga ki ap jo bhi kush banepar itna mat bholna ki ap ek hindustaani patrakar he………………………
sujit
April 21, 2010 at 10:56 am
BHAI SAHAB YE PRASUN BHAI SAHAB JO HINDI KI PATRAKARITA ME EK MAALDA RAKHTE HAI UNKAA NAME KAHA JAYA LAGTA HAI YE SAB SETTING HAI