इस्लामाबाद : तालिबान ने पाकिस्तानी मीडिया को उसके दृष्टिकोण की अनदेखी करने के खिलाफ अंतिम चेतावनी दी है। तालिबान का दावा है कि समाचार पत्र और टीवी चैनल सच को छुपा रहे हैं और सेना के सहयोगी की तरह काम कर रहे हैं।
पाकिस्तान तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद उमर ने उत्तरी वजीरिस्तान कबाइली इलाके में सेना के काफिले पर आतंकवादी हमले के कुछ घंटे बाद पेशावर स्थित पत्रकारों को ईमेल के जरिए यह चेतावनी जारी की। सेना के काफिले पर हुए हमले में सात सैनिक मारे गए थे और 16 अन्य जख्मी हो गए थे।
उत्तर वजीरिस्तान में तालिबान मीडिया सेंटर का खुद को एक प्रवक्ता बताने वाले उमर ने कहा, ‘मीडिया सेना के नजरिए को ही क्यों पेश कर रहा है। क्या यह इस बात का सुबूत है कि मीडिया भी सरकार और सेना के सहयोगी के रूप में काम कर रहा है या सच छुपाने के लिए उन्हें मजबूर किया जा रहा है।’ उमर ने कहा, ‘इस ईमेल को पाकिस्तान के मीडिया के लिए लिखी आखिरी चेतावनी माना जाना चाहिए। मीडिया ने सरकार और सेना के सहयोगी के रूप में काम करना यदि बंद नहीं किया तो तालिबान को मीडिया से भी वैसा ही व्यवहार करना पड़ेगा जैसा वह चाहते हैं।’ एजेंसी












उमेश चतुर्वेदी
April 25, 2010 at 8:29 am
यशवंत जी,
तालिब का बहुबचन तालिबान होता है। इसलिए तालिबानियों शब्द का इस्तेमाल गलत है। सिर्फ तालिबान से भी काम चल सकता है।
यशवंत
April 25, 2010 at 12:04 pm
थैंक्यू उमेश भाई. चेंज करा दिया.