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हलचल

बाहर सब्जी दुकान अंदर प्रेस क्लब का सामान

चलिए आपको प्रेस क्लब बस्ती घुमा लाते हैं। जरूरी नहीं कि बस्ती जनपद के बारे में आप जानते हों। थोड़े आलोचक-समालोचक किस्म के होंगे तो शायद आचार्य रामचंद्र शुक्ल को जानते होंगे। आचार्य शुक्ल का यह गृह जनपद है। यहीं के अगौना नामक ग्राम में वह जन्म लिये थे। खैर, मूल विषय से आचार्य प्रवर का कोई सम्बंध नहीं है। लेकिन परिचय के लिए बताना जरूरी समझा गया। अब आपको हम सड़क मार्ग से बस्ती ले चलते हैं।

चलिए आपको प्रेस क्लब बस्ती घुमा लाते हैं। जरूरी नहीं कि बस्ती जनपद के बारे में आप जानते हों। थोड़े आलोचक-समालोचक किस्म के होंगे तो शायद आचार्य रामचंद्र शुक्ल को जानते होंगे। आचार्य शुक्ल का यह गृह जनपद है। यहीं के अगौना नामक ग्राम में वह जन्म लिये थे। खैर, मूल विषय से आचार्य प्रवर का कोई सम्बंध नहीं है। लेकिन परिचय के लिए बताना जरूरी समझा गया। अब आपको हम सड़क मार्ग से बस्ती ले चलते हैं।

लखनऊ पहुंचिये वहां से लखनऊ-गोरखपुर राजमार्ग पर चलते चले जाइए। कोई पांच घंटे के सफर के बाद आप पवित्र सरयू और पावन अयोध्या पार करने के बाद बस्ती पहुंच जायेंगे। फोर लेन से नीचे उतरें तो खुद-ब-खुद शहर या कि कस्बे में प्रविष्ट हो जायेंगे।

ध्यान रहे कि सलामती के लिए यहां गोसाईं जी की यह दोहा पढऩा बेहद जरूरी है- प्रविसि नगर कीजै सब काजा, हृदय राखि कौशलपुर राजा। गड्ढा-गुड्ढी, नगर वधुओं, बेलगाम ऑटो, चिंचियाते बस-ट्रक, लुटेरे-अपराधी आदि से बचने के लिए यह पंक्ति बेहद कारगर साबित हो सकती है। डेढ़-दो किलोमीटर पश्चिम सरकने के बाद आप कंपनी बाग चौराहा पहुंचेंगे वहां से दस कदम और आगे बढऩे पर सामने कोने में आपको सब्जी-भाजी की कई दुकानें मिलेंगी। बस समझिए कि आप पहुंच गये अपने मुकाम पर, यही तो है बस्ती का प्रेस क्लब।

आलू-नेनुआ का भाव पूछते हुए आप ध्यान से दर-ओ-दीवार को निहारिए तो बिना किसी तकल्लुफ के वहां प्रेस क्लब ‘पोता’ हुआ मिलेगा। मुख्य दरवाजे पर बुढ़ऊ महाराज यानी कि अलीगढिय़ा ताला भी लटकता हुआ मिलेगा। ताला तो ताला है बिना चाबी के खुलेगा नहीं। और चाबी तो अध्यक्ष प्रकाश गुप्ता जी के पास बिल्कुल सुरक्षित है। करीब एक दशक पहले जब वह सर्वानुमति से अध्यक्ष बने थे तभी ताला बंद कर चाबी रख लिए और अपने साथी महासचिव और उपाध्यक्ष की मदद से बाहर सब्जी मंडी खोल दिए। वैसे अध्यक्ष जी मुख्यत: व्यवसायी ही हैं और पंसारी की दुकान चलाते हैं। पत्रकारिता से ज्यादा उनको हर्रे-बहर्रै, नागरमोथा, जटामासी याकि जितनी भी दुर्लभ जड़ी-बूटियां हैं उनकी विशद जानकारी है।

अब आपको महासचिव महोदय का परिचय दे दें। इनको गीत-संगीत से बेहद लगाव है सो इन्होंने ऑकेस्ट्रा ग्रुप खोल लिया है और वहीं गाते-बजाते हैं। सूत्रों ने बताया कि इनके जैसा ढोलकिया पूरे बस्ती जनपद में नहीं है। वैसे यह एक साप्ताहिक भी निकालते हैं, ‘चलती ट्रेन लटकते मुसाफिर’ टाइप। उपाध्यक्ष जी सभी अखबारों और स्थानीय चैनलों की यात्रा करते हुए अब राष्ट्रीय सहारा में बहुत ही मामूली वेतन पर स्थानपन्न हो गये हैं। बताया जाता है कि ये बहुत ही बड़े सेटिंगबाज भी हैं। कई जगह इनकी पिटाई भी हो चुकी है।

तथ्यात्मक जानकारी जुटाने पर पता लगा कि करीब एक दशक पहले यहां के पत्रकारों के मन में प्रेस क्लब का आइडिया आया और वे तत्कालीन कमिश्नर से मिलकर इसकी स्थापना की मांग किये। कमिश्नर साहब ने ठोस कार्यवाही की लेकिन चले गये तो देवशरण सिंह यादव डीएम बनकर आये। उन्होंने प्रेस क्लब के लिए भूमि और भवन की व्यवस्था करायी। उसके बाद सन् २००१ से ही ये साहिबान ही अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महासचिव का ओहदा संभाले हुए हैं और बाहर लटक रहा है बड़का ताला।

नगर के पत्रकार प्रेस क्लब होते हुए भी चाय-पान की दुकानों पर अड्डेबाजी को मजबूर हैं। सबसे अधिक परेशानी बेचारे ग्रामीण पत्रकारों को होती है। यहां पर किसी भी अखबार के दफ्तर में प्रतिनिधि बैठकर खबर नहीं लिख सकते। वजह बैठने के लिए दो से ज्यादा कुर्सी तक नहीं है। ब्यूरो चीफों के पास तेलबाजों की लाइन लगी रहती है। ऐसे में बेचारे छोटे पत्रकार चाय की दुकान पर खबर लिखकर अपने अपने अखबारों के दफ्तर में देते हैं और चले जाते हैं। दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान और सहारा में विज्ञपत्ति वाले तो  दो से पांच मिनट बैठ जाते हैं मगर ग्रामीण पत्रकार नहीं।

बस्ती से वीआर शुक्ला की रिपोर्ट

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0 Comments

  1. S. Pandey

    July 17, 2010 at 12:31 pm

    B. R. Shukla Ji,

    Bahut Bahut badhgaai aapne yahan ke patrakaaron ki peeda likhi, Kya aap apna mobile no. de sakte hain, mere paas aur bhi khabren hai

  2. T. Ahmad

    July 17, 2010 at 12:36 pm

    Yashwant ji Sabji Mandi ki Photo bhi laga dete to aur bhi achha hota, Patrkaar ikjut hokar teeno ko dhakka mare aur kabja kar le press club par.

  3. sk

    July 17, 2010 at 3:13 pm

    sabhi chutiya hi

  4. markanday mani gkp

    July 17, 2010 at 4:44 pm

    yashwant bahi shukla ji se kahiyaga k sabji ka dam update karte rahe.
    markanday mani gkp

  5. lal baBU

    July 17, 2010 at 6:29 pm

    AREE, YE TO PEHLEPO HI JAIL CHOKAHAI
    SAHARA KA NAAM SKND SHUKLA HI KY

  6. RAM KUMAR

    July 17, 2010 at 6:34 pm

    yashwant g
    press club ke upadayaksh SASHARA M NAHI HI

  7. S pandey

    July 18, 2010 at 4:50 am

    B. R. Shukla Ji, Y TO
    Skand Shukla ko mobil no ha

  8. Sanjay Dwivedi

    July 18, 2010 at 9:16 am

    Shukla jee
    Apka lekh padhkar bahut khusi hui aap isi tarh lekhan karye se jude rahiye.aapki lekhni hamesha aage badhti rahe yahi hamri shubh kamna hai.
    shukla ji mai gramin patrkaar assosition basti ka mahamantri hoon aur main aaj se hi aap ko apne agle kaaryekarm me aamantrit karta hoon.aasha hai aap jaroor aayenge.Sanjay Dwivedi

  9. Pankaj Tripathi

    July 18, 2010 at 9:28 am

    Shukla ji namskaar
    aapka lekh padhkar mujhe laga ki ab to gramin patrkaron ke din laut aayenge jab hum aap aur bhi kuch hamare saathi milkar sach ko ujagar karenge.Apne gramin patrkaron ki peeda ko samjha aur us par likha.iske liye main Pankaj Tripathi-media prabhari gramin patrkaar assocation ke Adheksh aur mahamantri sahit samst gramin patrkaron ki taraf se aapko dhanyebaad gyapit karta hoon.

  10. mazhar husain Journalist

    July 18, 2010 at 12:34 pm

    बी आर शुक्ल जी
    इस लेख के लिए आपको दिली मुबारकबाद आपने तो इन लोगो को धो के रख दिया है ये पूरी तरह से सच है कि प्रेस क्लब होते हुये भी पत्रकार चाय की दुकानों पर खबर लिखते है और साथ ही आपने बस्ती के पत्रकारों कि मजबूरी को भी सामने रख फिय है कि बस्ती का कोई भी पत्रकार इनके खिलाफ अपने हक को पाने के लिए आवाज़ उठा पाने में सक्षम नहीं है प्रेस क्लब तो सर सब्जी मंदी ही लगता है ये बात तो एकदम सही है कि प्रेस क्लब बनने के बाद से आजतक कभी चुनाव तक नहीं हुआ वह लोग ज़बरदस्ती ही अध्यक्ष सहित सारा पद समेटे हुये है अब तो इसका चुनाव होना ही चाहिए बहुत पहले बस्ती के कुछ पत्रकारों ने अपनी आवाज़ ज़रूर बुलान्फ़ किया था लेकिन उसे दबा दिया गया अब तो बस्ती के पत्रकारों को होश में अजाना ही चाहिए लेकिन मुझे लगता है कि अब बस्ती के पत्रकारों में इतनी ताक़त नहीं बची खैर आपकी तरह अपनी आवाज़ बुलंद करने वालो कि ज़रुरत है चलिए आपने कम से कम बस्ती के पत्रकारों को जगाने का प्रयास किया और आपकी तरह कुछ लोग आगे आये तो बस्ती के पत्रकार भी एक दिन ज़रूर जाग जायेंगे हमारी बधाई स्वीकार करें
    आपका मजहर हुसैन…..

  11. R. C

    July 18, 2010 at 1:49 pm

    Sabji Mandi ki Photo bhaj raha hai

  12. Sandeep Goel

    July 18, 2010 at 3:18 pm

    प्रेस क्लब कुछ लोगो की थाती बनकर रह गयी है इस सच को उजागर करने के लिए बहुत बहुत बधाई काश इसे पढ़कर प्रेस क्लब को सब्जी कि दूकान बनाने वाले प्रेस क्लीब अध्यक्ष को कुछ तो अक्ल आये और प्रेस क्लब अपनी गरिमा के अनुरूप अपना स्वरुप पा सके ! अब तो पत्रकारों को प्रेस क्लब का स्वरुप बचाए बनाये रखने के लिए आवाज़ उठाने कि ज़रुरत है जिससे प्रेस क्लब अपनी आभा को पा सके ! प्रेस क्लब को चंद लोगो कि मुट्ठी से निकालने के लिए एड अच्छी पहल होनी चाहिए !

  13. sarvesh mishra

    July 20, 2010 at 2:01 pm

    press club basti ke bare me itni katu saccai likhne ke liye dhanyaba.

  14. visheshwarYadav

    July 22, 2010 at 1:07 pm

    Shukla ji, Lag raha hai saath me sabji aap bhi bech rahe hai.Koi sabji vale se puchha tumko kisne sabji lagane ka adhikar diya.

  15. S.P. Chand

    July 22, 2010 at 1:10 pm

    Aaapne patrakaro ke liye kya kiya yah to aapne likha hi nahi. Press club ka Yeent aapne rakha tha kya ?

  16. Vinay Gupta

    July 22, 2010 at 1:15 pm

    Shukla ji, aap patrkarita se kitna kamate hai ? kahi aap dalali to nahi karte hai, Verna apna naam gupt kayo rakhte. Aaap patrkarita ke kis chethra me kam karte hai Yah to aapne likha hi nahi?

  17. sudhakar mishra

    July 22, 2010 at 1:22 pm

    B.R. Shukla ji, Namaskar,
    Lagta hai aapke pass press club basti ke bare me achhai jankari hai.Patrakrita ke chetra me aap zero lagte hai, kayoki PRESS CLUB BASTI to sabhi ke liye khula hai, aap bhi jakar batth sakte hai. Ab aap chahe bahar sabji beche ya chay aapki marzi.

  18. rajkumar gupta

    July 29, 2010 at 11:22 am

    शर्म नहीं आती बहुत मिर्चा लग रहा है सच पढ़ कर वैसे भी सच बहुत कड़वा होता है आपलोगों का कमेन्ट लाजिम था मैं भी सोंच रहा था की क्या बात है अभी तक दलालों का कमेन्ट क्यों नहीं आया खैर देर आये दुरुस्त आये आप बताओ कितना हिस्सा मिलता है प्रेस क्लब के अध्यक्ष से दलाली कैन करता है यह तो बस्ती के सारे पत्रकार जानते है प्रेस क्लब के बहार लग रही सब्जी की दुकानों से रोज़ वसूली का ठेका लगता है आप लोगो के ही पास है ! क्यों विनय गुप्ता , एस पी चंद और यादव जी सच पढ़ कर शर्मिंदा होने के बजाय बयानबाजी कर रहे हो शुक्ल जी से पूछ रहे हो की कहा के पत्रकार है अरे तुम्हारा अध्यक्ष भी पत्रकारिता के बारे में कुछ जानता है एक लाइन खबर के लिख दे तो गुलामी करूँगा ! और दलाली तो वह और उसकी मंडली करती है यह बात सभी जानते है ! अरे शर्म करो और सुधार लाओ और अपने अध्यक्ष से कहो इस्तीफ़ा दे दे अब तो विरोध का बिगुल शुक्ल जी ने बजा ही दिया है अब आगे आगे देखो क्या होता है ! तुम और तुम्हारे अध्यक्ष ने क्या किया पत्रकारों के लिए बताओ एस पी चंद जी आपने क्या किया प्रेस क्लब के लिए कितना पैसा दिया आपने प्रेस क्लब को प्रेस क्लब किसी के बाप का नहीं बल्कि पत्रकारों का है ! और नाम गुप्त रखने की बात छोड़ो नाम में क्या रक्खा है वैसे नाम सही है गलत नहीं लेकिन प्रेस क्लब के बारे में जो लिखा गया है वह भी एक कटु सच है अगर थोड़ी सी भी शर्म तुम लोगो में बची है तो अब भी वक़्त है सुधर जाओ वरना अभी तो पत्रकारों ने भड़ास के माध्यम से आवाज़ उठाई है माध्यम कई और भी है तब भागते फिरेगी दलाल मण्डली

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