प्रेस विज्ञप्ति : न्यूज़ 24 की एडिटर इन चीफ अनुराधा प्रसाद से अरुण जेटली ने अपने और बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के रिश्तों में दरार पर बात की। अरुण जेटली ने स्पष्ट किया कि नरेंद्र मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मीडिया ने बनाया है और इस बारे में बीजेपी के भीतर कोई फैसला नहीं हुआ है। अनुराधा ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें चुनाव लड़ने से डर लगता है तो अरुण जेटली ने कहा कि जब पार्टी चाहेगी तो वो चुनाव लड़ेंगे। उन्हें कई राज्यों से चुनाव लड़ने और दिल्ली से चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री बनने तक के ऑफर पार्टी की तरफ से दिए जा चुके हैं लेकिन वो क्षेत्रीय राजनीति में रुचि नहीं रखते।
अनुराधा के ये पूछने पर कि कंधार मामले में आतंकी छोड़ने और जसवंत के आतंकवादिया के साथ जाने के मामले में अटल बिहारी वाजपेयी पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश की जा रही है और आडवाणी को इस फैसले से अलग करके दिखाया जा रहा है, अरुण जेटली ने स्पष्ट किया कि “हम लोग इसे सरकार की कलेक्टिव रिस्पांसबिलिटी मानते हैं और मैंने स्पष्ट कहा कि सरकार में इतना दम था कि एक डिफीकल्ट डिसीजन ले सके और सरकार ने लिया। दोनों तरफ डिफीकल्ट डिसीजन था। 170 लोगों को मरवा देते या फिर 3 को छोड़ देते। हम लोगों ने एक डिफीकल्ट डिसीजन लिया। निर्णय सरकार का होता है और सब लोग उसकी सामूहिक रिस्पांसबिलिटी लेते हैं।”
अनुराधा प्रसाद के ये पूछने पर कि तब तो कलेक्टिव रिस्पांसबिलिटी के हिसाब से आडवाणी जी भी इस फैसले में भागीदार थे, अरुण जेटली बोले, ”इस बात का खंडन किसी ने नहीं किया”। नरेंद्र मोदी को 2014 में प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार घोषित किए जाने के सवाल पर अरुण जेटली अपनी पहले कही बात से पलट गए, बोले- मैंने तो मीडिया के सवाल का जवाब भर दिया था कि अगर वो प्रधानमंत्री बनते हैं तो मुझे खुशी होगी। अरुण जेटली ने कहा कि “मुझे लगता है कि इसका उत्तर बड़ा स्पष्ट है, जब अगला चुनाव आयेगा तो हम नेता चुनेंगे। आज केवल आडवाणी जी नेता हैं। मीडिया पूछता है मोदी जी की प्रशंसा करके तो हम निश्चित रुप से बड़े गर्व में हैं कि मोदी जी की प्रशंसा होती है, हम करेंगे। इसका और कोई आप अर्थ मत लीजिए। आज आडवाणी जी हमारे नेता हैं और ये विवाद इसी के साथ समाप्त हो जाता है।”
जब अरुण जेटली से अनुराधा ने पूछा कि फिर दूसरी पंक्ति के नेताओं में उनके हिसाब से पहले नंबर पर कौन खड़ा है, इस पर जेटली ने अध्यक्ष राजनाथ सिंह का नाम लिया। “पार्टी प्रेसीडेंट इस आलवेज द फर्स्ट एमांग द इक्वल्स। पार्टी प्रेसीडेंट पार्टी के स्ट्रक्चर में हमेशा बराबर वालों में नंबर एक होता है। इसमें कभी विवाद नहीं होता। दूसरा उत्तर सुन लीजिए। हमारी पार्टी में और कांग्रेस में ये अंतर है, वहां भविष्य का नेता हमेशा गांधी होगा। हमारी पार्टी जो केवल मेरिट पर लीडरशिप करती है, वहां पर 15 लोग होंगे जिनमें से कोई नेता हो सकता है।” अरुण जेटली ने राजनाथ सिंह से झगड़े को पार्टी का अंदरुनी मामला करार दिया जिस पर वो केवल पार्टी के भीतर ही बात करना पसंद करेंगे। “मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत झगड़ा नहीं था, कोई व्यक्तिगत झगड़ा नहीं है। पार्टी के अंदर हम सब मिलकर काम करते हैं। लेकिन पार्टी में किसी विषय की चर्चा होती है तो अलग-अलग मत भी होते हैं तो वो पार्टी के भीतर होते हैं। बाहर हम इसका जिक्र नहीं करते।”
अरुण जेटली ने साफ कहा कि उनके लिए बोफोर्स मुद्दा इन चुनावों में मुद्दा नहीं था लेकिन कांग्रेस ने इसे खुद मुद्दा बना दिया है तो हमने भी इसे मुद्दा कुबूल कर लिया। “इसीलिए हमने बोर्फोस का मुद्दा चुनावों में नहीं उठाया था। कांग्रेस ने चुनाव के दौरान सेल्फ गोल किया और वो मुद्दा केवल अब बोफोर्स का नहीं था। उसमें दो और अर्थ थे। पहला अर्थ कि चुनावों के दौरान आप सीबीआई से इस प्रकार की व्यवस्था करवाएं कि क्वात्रोची का रेड कार्नर एलर्ट वापस हो जाए और उसको ट्रेवल करने की फेसिल्टी मिल जाए। एक तरफ बीजेपी और आडवाणी जो कह रहें हैं कि अब स्विस बैंक की सत्ता बदल गई है और वो लोग खुलासा करने को तैयार हैं और दूसरी तरफ आप क्वात्रोची को फ्री ट्रेवल की सुविधा प्रोवाइड कर दें ताकि वो दुनिया में जा कर अपने एकाउंट्स आपरेट कर सके। जब ये इशू आता है तो उसमें केवल बोफोर्स का करप्शन ही नहीं मुद्दा होता। क्वात्रोची को ट्रेवल की सुविधा देने में कांग्रेस की नीयत क्या थी और दूसरा पिछले पांच साल में सीबीआई ने जिस तरह से अपनी स्वायत्तता समाप्त की है, ये बड़ा मुद्दा है।”
अरुण जेटली से न्यूज़ 24 की एडीटर-इन- चीफ अनुराधा प्रसाद की ये पूरी बातचीत आप ”आमने सामने” कार्यक्रम में आज सोमवार की रात 8.30 बजे देख सकते हैं।











