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आडवाणी कृष्ण हैं, मैं अर्जुन हूं : राजनाथ सिंह

अनुराधा प्रसाद और राजनाथ सिंहप्रेस विज्ञप्ति

राजनाथ सिंह चुनाव आयोग के वरुण गांधी पर दिए गए फैसले पर खफा हैं। उनका कहना है- “अगर हमें अपनी मर्यादा में रहना चाहिए तो कोई संवेधानिक संस्था है तो उसे भी अपनी मर्यादा में रहना चाहिए”। न्यूज़24  की एडिटर इन चीफ  अनुराधा  प्रसाद से एक खास बातचीत में राजनाथ सिंह खुल कर बोले- अपने और आडवाणी  के रिश्तों के बारे में, जेटली से मतभेदों पर और पार्टी में अपने के कद के बारे में।

अनुराधा प्रसाद और राजनाथ सिंहप्रेस विज्ञप्ति

राजनाथ सिंह चुनाव आयोग के वरुण गांधी पर दिए गए फैसले पर खफा हैं। उनका कहना है- “अगर हमें अपनी मर्यादा में रहना चाहिए तो कोई संवेधानिक संस्था है तो उसे भी अपनी मर्यादा में रहना चाहिए”। न्यूज़24  की एडिटर इन चीफ  अनुराधा  प्रसाद से एक खास बातचीत में राजनाथ सिंह खुल कर बोले- अपने और आडवाणी  के रिश्तों के बारे में, जेटली से मतभेदों पर और पार्टी में अपने के कद के बारे में।

वरुण गांधी के जहरीले भाषण पर जब राजनाथ सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा- “इस तरह का भाषण नहीं देना चाहिए, गलत भाषण नहीं देना चाहिए। वो कह रहा है कि उसने गलत भाषण नहीं दिया। वरुण से जैसे ही मैने पूछा, वरुण ने कहा- आप जांच करवा लें वो मेरी आवाज़ नहीं है। ऐसे में हम कैसे वरुण पर अविश्वास कर लें। अब इसकी जांच हो रही है, तो जांच हो जाने दीजिए।” राजनाथ सिंह का चुनाव राजनाथ सिंहआयोग को लेकर गुस्सा साफ था- “चुनाव आयोग का यह अधिकार नहीं है कि वो किसी राजनीतिक पार्टी को सुझाव दे कि आपकी पार्टी का ये उम्मीदवार होगा, ये उम्मीदवार नहीं होगा।”

जब राजनाथ से अनुराधा प्रसाद ने पूछा कि वो वरुण गांधी पर विश्वास कर रहें हैं लेकिन चुनाव आयोग पर नहीं तो उन्होंने इसका कारण भी साफ किया। राजनाथ सिंह ने कहा “चुनाव आयोग पर इस लिएविश्वास नहीं क्योंकि पिछले वर्ष लखनऊ में सीडी कांड हुआ, चुनाव आयोग ये जानता था कि राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह लखनऊ के सीडी कांड में नहीं हैं, लेकिन इसी चुनाव आयोग ने राजनाथ सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। सच्चाई जानने के बाद भी चुनाव आयोग ने मेरा नाम वापस नहीं लिया।”

अरुण जेटली के साथ विवाद पर पूछे गए सवालों पर राजनाथ संभल कर बोले। उन्होंने कहा कि मै सभी नेताओं वेंकैया नायडू, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज का आदर करता हूं। ये लोग बीजेपी के लिए एसेट हैं। कुरेद जाने पर राजनाथ ने माना कि दोनो नेताओं में मतभेद हैं लेकिन उन्होंने कहा कि इसे कुछ अखबार व टीवी पत्रकारों ने ज्यादा तूल दिया है। राजनाथ बोले- “विचारों में भिन्नता किसी मुद्दे पर हो सकता है, यह कोई समस्या नहीं है। लेकिन कांग्रेस और कम्युनिस्टों की तरह हमारे यहां बंटवारा नहीं होता। हमारे यहां किसी भी मित्र को पूरा अधिकार है कि वो कोई सुझाव दे सकता है। मैं अध्यक्ष हूं लेकिन आटोक्रेट नहीं हूं, डिक्टेटर नहीं हूं। मुझे सुझाव चाहिए मित्रों का।” सुधांशु मित्तल के मामले पर उनके अधिकार को अरुण जेटली अनुराधा प्रसादकी चुनौती पर राजनाथ सिंह ने कहा कि उनके अधिकार को किसी ने कभी चैलेंज नहीं किया-“कोई चैलेंज करे तब न, किसी ने चैलेंज ही नहीं किया कभी, सब सहयोग करते हैं, जो कहता हूं, सब मानते हैं।”

अपने और लाल कृष्ण आडवाणी के रिश्तों पर बात करते हुए राजनाथ सिंह ने इसे पिता-पुत्र का रिश्ता बताया- “दुनिया चाहे जो भी कहे, मैं उन्हे पिता मानता हूं और अपने को पुत्र मानता हूं। मैं यही महसूस करता हूं, वो मानतें हैं, वो बड़े हैं, मैने देखा है कि किसी चीज पर अगर उन्होंने पसंद न भी किया हो, भले ही क्षण भर के लिए पसंद न किया हो, लेकिन जब भी मैं दूसरी बार गया तो आडवाणी जी ने वैसे ही पुत्र की तरहं स्नेह दिया।” बीजेपी में उनके और आडवाणी के बीच खट्टे-मीठे रिश्तों पर छपने वाली खबरों के कारण पार्टी में दो पॉवर सेंटर की बातों को उन्होंने नकार दिया। उन्होंने कहा- “मै पॉवर सेंटर नहीं हूं, मै तो अध्यक्ष हूं, हमारे यहां मार्गदर्शन होता है, शेष सभी कार्यकर्ता हैं, हमारा मार्गदर्शन करने वाले आदरणीय आडवाणी जी हैं।”

राजनाथ ने कहा कि बीजेपी को चलाने वाले तो लाल कृष्ण आडवाणी हैं- “बस बीजेपी चल रही है तो आडवाणी जी के नेतृत्व में चल रही है। ठीक है, एक संगठनात्मक व्यवस्था होती है, एक अध्यक्ष होता है, महामंत्री होते हैं। अध्यक्ष होने के नाते मीटिंग होती है जो भी मैं फाइनल डिसीजन देता हूं, उसे सब मानते हैं।” जब पूछा गया कि क्या आडवाणीजी बीजेपी को पीछे से चला रहें हैं तो राजनाथ सिंह ने कहा- “पीछे से नहीं, आगे से, कृष्ण वही हैं, हम सभी अर्जुन हैं।” जब राजनाथ से पूछा गया कि सभी राजनेताओं की तरह वो क्या प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देखते हैं तो वो इस सवाल को चतुराई से टाल गए लेकिन राजनाथ ने जरूर माना कि वो भी लालकृष्ण आडवाणी की तरह ही बीजेपी का नेतृत्व करना चाहेगें। राजनाथ ने कहा “जब हो सकता है हम भी कभी कृष्ण बन जाएं।”

पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे राजनाथ सिंह ने गाजियाबाद से चुनाव लड़ने के पीछे कारण गाजियाबाद का दिल्ली से नजदीक होना बताया। उन्होंने कहा कि वो केंद्र की राजनीति कर रहें हैं, ऐसे में उन्हें एक ऐसी सीट चाहिए थी जो दिल्ली के पास हो ताकि वो उस क्षेत्र की जनता का खयाल रख सकें। वो ऐसी किसी सीट से भी चुनाव नहीं लडना चाहते थे जो पिछली बार बीजेपी ने जीती हो। इसीलिए उन्होंने गाजियाबाद को चुना जहां से पिछली बार बीजेपी चुनाव हारी थी।


न्यूज़24 की एडिटर इन चीफ अनुराधा प्रसाद के साथ राजनाथ सिंह की इस खास बातचीत को आप “आमने सामने”  कार्यक्रम में कल शाम यानी 26 मार्च, बृहस्पतिवार शाम  8.30 पर न्यूज़ 24 पर देख सकते हैं। 

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