नासिर बने हिंदुस्तान, आगरा के नए प्रभारी

नासिरूद्दीन
नासिरूद्दीन
नासिरूद्दीन हैदर खां को हिंदुस्तान, आगरा का नया संपादकीय प्रभारी बनाया गया है। वे अभी तक हिंदुस्तान, लखनऊ में कार्यरत थे। उन्होंने डिप्टी रेजीडेंट एडिटर पद पर आगरा में ज्वाइन किया है। नासिरूद्दीन नए जमाने के उन चंद पढ़े-लिखे पत्रकारों में शुमार किए जाते हैं जिनके पास सामाजिक सरोकार और पत्रकारीय दृष्टि एक साथ मौजूद है। नासिर ने सभी बड़े और ज्वलंत मुद्दों पर कलम के जरिए हस्तक्षेप किया है। साहित्य, रंगकर्म और पत्रकारिता के रिश्ते को बराबर भाव से निभाने वाले नासिर प्रिंट मीडिया में अपनी सक्रिय और सशक्त उपस्थिति के साथ-साथ वेब माध्यम में भी अच्छे-खासे सक्रिय हैं। वे हिंदी ब्लागिंग के पुराने ब्लागरों में शुमार किए जाते हैं। उनके ब्लाग का नाम ढाई आखर है। इसके साथ-साथ वे महिलाओं के मुद्दे पर जेंडर जिहाद नामक वेबसाइट का संचालन भी करते हैं।

नासिर के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए जब उन्हें फोन किया गया तो उन्होंने खुद को एक मीटिंग में व्यस्त बताया। उनके बारे में वेब माध्यम के जरिए जो जानकारी उपलब्ध हो पाई है, उसे यहां दिया जा रहा है। नासिर ने अपने ब्लाग प्रोफाइल में अपनी पसंदीदा फिल्मों की लिस्ट में ‘मुगल ए आजम’, ‘प्‍यासा’, ‘दो बीघा जमीन’, ‘जागते रहो’, ‘मेघे ढाका तारा’, ‘सुवर्णरेखा’, ‘चोख’, ‘महापृथ्‍वी’, ‘गणशत्रु’, ‘ओमर मुख्‍तार’, ‘बैटलशिप…’, ‘नायकन’, ‘खुदा के लिए’ जैसी फिल्मों का नाम डाल रखा है। पसंदीदा संगीत में ‘हमन है इश्‍क मस्‍ताना’, ‘बाबू जी धीरे चलना’,  ‘ए मोहब्‍बत तू जिंदाबाद’, ‘इमेजिन’, ‘हम देखेंगे’, ‘एक चंबेली के मंडवे तले…’, ‘ये जंग है जंगे आजादी…’, ‘रानार चलछे’ को बताया है। पसंद की किताबों में प्रेमचंद साहित्‍य, माँ, पहला प्रेम, इकतालिसवाँ, अग्निदीक्षा, न जुनू रहा न परी रही, भारतनामा, भगत सिंह और उनके साथियों के सम्‍पूर्ण दस्‍तावेज, स्‍त्री उपेक्षिता, वूमेन एंड इस्‍लाम: फातिमा मेरिन्निसी, रशीद जहां के अफसाने और ड्रामे, चे की डायरी, हुकूक ए निस्‍वाँ के नाम गिनाए हैं।

अपने ब्लाग प्रोफाइल में नासिर ने खुद के लोकेशन की जगह इंडिया का नाम डालने के ठीक बाद एक आडियो क्लिप डाल रखा है जिसे क्लिक करने पर मशहूर गायिका मुन्नी बेगम की आवाज में ये लाइनें सुनाई देती हैं…‘आवारगी में हद से गुजर जाना चाहिए… लेकिन कभी कभार तो घर जाना चाहिए… मुझसे बिछड़ कर इन दिनों किस रंग में हैं वो… ये देखने रकीब के घर जाना चाहिए… उस बुत से इश्क कीजिए लेकिन कुछ इस तरह…. पूछे कोई तो साफ मुकर जाना चाहिए…. अफसोस अपने घर का पता हमसे खो गया… अब सोचना ये है कि किधर जाना चाहिए… बैठे हैं हर फसील पे कुछ लोग ताक में… अच्छा है थोड़ी देर से घर जाना चाहिए… नादान जवानी का जमाना गुजर गया…. अब आ गया बुढ़ापा सुधर जाना चाहिए..।’ 

नासिरूद्दीन जैसे सशक्त पत्रकार के हिंदुस्तान, आगरा का संपादकीय प्रभारी बनने के साथ ही इस यूनिट के नए आरई के नाम पर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। अभी तक पुष्पेंद्र शर्मा का नाम इस पद के लिए सबसे सशक्त दावेदार के रूप में फैलाया गया था लेकिन पुष्पेंद्र के करीबी लोगों ने पहले ही कह दिया था कि वे अमर उजाला छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं। उनका नाम कुछ शरारती तत्वों ने जान-बूझकर फैलाया है ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।

सूत्रों का कहना है कि नासिर के अप्वाइंटमेंट से हिंदुस्तान की उस पालिसी का ही पता चलता है जिसके मुताबिक ग्रुप में आंतरिक बड़े पदों पर ज्यादातर अंदरूनी लोगों को प्रमोट कर नियुक्त किया जाएगा। दिनेश जुयाल ने हिंदुस्तान, देहरादून से इस्तीफा दिया तो वहां पर हिंदुस्तान, आगरा के प्रभारी दिनेश पाठक को प्रमोट कर भेजा गया और दिनेश पाठक की जगह हिंदुस्तान, लखनऊ से नासिर को प्रमोट कर भेजा गया।

इस तरह यह अब स्पष्ट होता जा रहा है कि हिंदुस्तान प्रबंधन अपनी पुरानी टीम के मनोबल व आत्मविश्वास में किसी तरह की कमी देखने को कतई तैयार नहीं है। 

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