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धन लाभ के लिए प्रभात खबर छोड़ा : अश्क

ओमप्रकाश अश्कप्रभात खबर के कार्यकारी संपादक पद से इस्तीफा देने वाले ओमप्रकाश अश्क ने दैनिक हिंदुस्तान, धनबाद में स्थानीय संपादक के रूप में ज्वाइन कर लिया है। ओमप्रकाश अश्क से भड़ास4मीडिया ने संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि कोलकाता में हिदुस्तान अखबार लांच करने की कोई योजना नहीं है। इस बारे में प्रकाशित खबर तथ्यहीन है। प्रभात खबर छोड़ने के कारणों के बारे में अश्क का कहना था कि इस अर्थ प्रधान समय में आर्थिक लाभ के कारण मुझे प्रभात खबर छोड़कर हिंदुस्तान ज्वाइन करना पड़ा। अश्क ने प्रभात खबर, इसके प्रबंधन और प्रधान संपादक हरिवंश को याद करते हुए कहा कि मैं निजी तौर पर प्रभात खबर और इसके प्रधान संपादक हरिवंश, जिनके साथ मैंने काम किया है, जीवन भर आभारी रहूंगा। उनकी निगरानी-निर्देशन में बहुत कुछ सीखा। प्रभात खबर के 25 साल पूरे होने पर मैं मंगलकामना करता हूं। 25 साल पूरे होने के मौके पर प्रभात खबर से इस्तीफा देना क्या उचित है?

ओमप्रकाश अश्कप्रभात खबर के कार्यकारी संपादक पद से इस्तीफा देने वाले ओमप्रकाश अश्क ने दैनिक हिंदुस्तान, धनबाद में स्थानीय संपादक के रूप में ज्वाइन कर लिया है। ओमप्रकाश अश्क से भड़ास4मीडिया ने संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि कोलकाता में हिदुस्तान अखबार लांच करने की कोई योजना नहीं है। इस बारे में प्रकाशित खबर तथ्यहीन है। प्रभात खबर छोड़ने के कारणों के बारे में अश्क का कहना था कि इस अर्थ प्रधान समय में आर्थिक लाभ के कारण मुझे प्रभात खबर छोड़कर हिंदुस्तान ज्वाइन करना पड़ा। अश्क ने प्रभात खबर, इसके प्रबंधन और प्रधान संपादक हरिवंश को याद करते हुए कहा कि मैं निजी तौर पर प्रभात खबर और इसके प्रधान संपादक हरिवंश, जिनके साथ मैंने काम किया है, जीवन भर आभारी रहूंगा। उनकी निगरानी-निर्देशन में बहुत कुछ सीखा। प्रभात खबर के 25 साल पूरे होने पर मैं मंगलकामना करता हूं। 25 साल पूरे होने के मौके पर प्रभात खबर से इस्तीफा देना क्या उचित है?

इस सवाल पर अश्क कहते हैं कि परिवर्तन की बात जनवरी से चल रही थी। मैंने इसकी जानकारी प्रधान संपादक को निजी तौर पर दे दी थी। मुझे उस समय राष्ट्रीय सहारा, गोरखपुर का प्रस्ताव मिला था पर पारिवारिक कारणों के चलते उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। बच्चे झारखंड में थे। मेरी गोरखपुर जाने की स्थिति नहीं थी। रही बात छोड़ने की तो इसके पीछे उद्देश्य केवल आर्थिक उन्नति है। प्रभात खबर उस घर जैसा है जहां हम लोग प्रेम से चटाई पर बैठते थे, अब जहां हूं वहां सोफे की स्थिति है। दोनों अपनी जगह पर अच्छे हैं। प्रभात खबर की अपनी सीमाएं हैं। मैंने पैसे बढ़ाने के लिए वहां बारगेन करना, दबाव बनाना या ब्लैकमेल करना उचित नहीं समझा। इसके लिए जो उचित रास्ता था, वही अपनाया।

ज्ञात हो कि ओमप्रकाश अश्क ने अगस्त 1990 में प्रभात खबर ज्वाइन किया। बीच में कुछ वर्षों तक जनसत्ता, कोलकाता में रहे। उसके बाद फिर प्रभात खबर से जुड़े और कोलकाता, धनबाद व पटना एडिशनों की लांचिंग कराई। रांची में रहते हुए काफी दिनों तक प्रधान संपादक हरिवंश के सहयोगी के रूप में प्रभात खबर के सातों एडिशनों का काम देखते रहे। कोलकाता में प्रभात खबर ग्रुप के बिजनेस साप्ताहिक अखबार कारोबार खबर की लांचिंग कराई पर बाद में इस अखबार को बंद करना पड़ा था।

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