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‘पत्रिका में मुझसे जबरन इस्तीफा लिया गया’

पत्रिका, ग्‍वालियर के रिपोर्टर राहुल शर्मा ने आरोप लगाया है कि उससे सिटी चीफ महिपाल सिंह भदौरिया और सर्वे इंचार्ज गौरव जादौन ने जबर्दस्‍ती इस्‍तीफा लिखवा लिया. राहुल ने भड़ास4मीडिया को बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत राजस्‍थान पत्रिका में अपने गृहनगर जयपुर के साथ की थी. कुछ समय काम करने के बाद उसे तथा कुछ अन्‍य सहकर्मियों को ग्‍वालियर से लांच होने वाली पत्रिका की टीम का हिस्‍सा बनने का ऑफर दिया गया. पत्रिका के अधिकारियों ने वादा किया कि जो भी ग्‍वालियर की लांचिंग टीम का हिस्‍सा बनेगा उसके रहने और खाने का खर्चा अखबार वहन करेगा. पत्रिका की ग्‍वालियर में लांचिंग होने के पहले तक वेतन के साथ खाने और रहने का खर्च संस्‍थान की तरफ से मिलता रहा. लेकिन प्रकाशन शुरू होने के बाद रहने-खाने का खर्च मिलना बंद हो गया.

पत्रिका, ग्‍वालियर के रिपोर्टर राहुल शर्मा ने आरोप लगाया है कि उससे सिटी चीफ महिपाल सिंह भदौरिया और सर्वे इंचार्ज गौरव जादौन ने जबर्दस्‍ती इस्‍तीफा लिखवा लिया. राहुल ने भड़ास4मीडिया को बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत राजस्‍थान पत्रिका में अपने गृहनगर जयपुर के साथ की थी. कुछ समय काम करने के बाद उसे तथा कुछ अन्‍य सहकर्मियों को ग्‍वालियर से लांच होने वाली पत्रिका की टीम का हिस्‍सा बनने का ऑफर दिया गया. पत्रिका के अधिकारियों ने वादा किया कि जो भी ग्‍वालियर की लांचिंग टीम का हिस्‍सा बनेगा उसके रहने और खाने का खर्चा अखबार वहन करेगा. पत्रिका की ग्‍वालियर में लांचिंग होने के पहले तक वेतन के साथ खाने और रहने का खर्च संस्‍थान की तरफ से मिलता रहा. लेकिन प्रकाशन शुरू होने के बाद रहने-खाने का खर्च मिलना बंद हो गया.

जब इस बारे में सिटी चीफ से पूछा तो उन्‍होंने कहा कि बंद करने का आदेश ऊपर से आया है. जब मैंने ऊपर बात की तो मुझे कोई जवाब नहीं दिया गया. इसके बाद मुझे सिटी चीफ महिपाल सिंह और सर्वे इंचार्ज गौरव परेशान करने लगे. मुझे मेरे काम को लेकर प्रताड़ित किया जाने लगा.

राहुल ने कहा कि कई बार मेरे ऊपर जातिवादी टिप्‍पणी की गई. मेरे काम में जबरन कमी निकाली जाने लगी. इसके बाद मेरा ट्रांसफर पत्रिका की लांचिंग टीम के रूप में भिंड के लिए कर दिया गया. इस दौरान बीमारी की वजह से मैंने एक सप्‍ताह का अवकाश ले रखा था.

जब अवकाश के बाद दुबारा काम पर वापस लौटा तो मुझे ज्‍वाइन नहीं कराया गया. सिटी चीफ ने कहा- तुम्‍हें ज्‍वाइन नहीं करना है. इसके बाद जब मैंने अपने वेतन भुगतान के बारे में बात की तो सिटी चीफ और सर्वे इंचार्ज ने कहा कि वेतन लेना चाहते हो तो इस्‍तीफा लिखकर दो, तभी वेतन मिलेगा. राहुल ने बताया कि मजबूरी में मुझे इस्‍तीफा देना पड़ा. जबकि पत्रिका के वादे के अनुसार कई माह के रहने और खाने का खर्च मुझे नहीं दिया गया.

राहुल ने यह भी बताया कि इन लोगों की मिलीभगत के चलते कुछ लड़कों को पचीस हजार रुपये लेकर फर्जी अंक पत्र के आधार पर पत्रिका की टीम में ट्रेनी बनाया गया है.

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0 Comments

  1. sunil barua

    August 10, 2010 at 4:13 pm

    pattrika ho ya bhaskar. is mamle main dono ek jaise hain. workers ko jhansa dekar apna kam nikalna inki purani fitrat hai. jab jarurat thi gwl bhej diya. kam nikalene par kick out to hona hi tha.>:(

  2. ramesh rajpoot gwalior

    August 11, 2010 at 7:19 am

    patrika ne bhopal me bhe is tarah kiya tha. launching ke bad logo ka tabadla kar dia tha. gpl me expart hai yah rajsthani. abhe to bkke logo ka bhe yahi hasra hone wala hai.

  3. devendra bhatnagar

    August 11, 2010 at 12:01 pm

    ye to patrika ki fitrat hai dosto. jo bhi patrika mai hai ya jane wale hai woh samjh jaye to unke liye behtar hoga,

  4. punit desh chintak

    August 11, 2010 at 5:18 pm

    see before going to news n another companies.plz recive in written as they commit..

  5. hukum

    August 12, 2010 at 8:18 am

    Dear all , Pahli baat to patrika me jaana hai to kam se kam rajasthani hona jaruri hai. wo dharoharo ko palte hai baaki yadi aap bhaskar se hai ya patrika ke bahar se to aap ki kher nahi launching k baad. Soch samajh ke jaiyoooooooo.

  6. Vikram

    August 12, 2010 at 8:47 am

    Rahul sharms ji Aap Yadi aap sahi hai to koi kuch nahi bigad [paeg. Ek Kalam ke sipahi ko in chooti-chooti Batoon se nahi ghabrana chahiye. Lekin mujhe Aap ki hi Baatoon se Jatiwad ki Boo aa rahi hai, isliye Ye Aaroop Niradhaar hai…….

  7. एडिटर, भड़ास4मीडिया

    August 13, 2010 at 3:15 pm

    संशोधन- राहुल शर्मा संपादकीय विभाग के नहीं बल्कि प्रसार टीम के हिस्सा थे। महिपाल सिंह सिटी चीफ नहीं बल्कि प्रसार टीम के हेड हैं। इस गलती के लिए खेद है।
    -एडिटर, भड़ास4मीडिया

  8. rajesh

    August 14, 2010 at 7:55 pm

    it is not possible in patrika, i m in patrika past 10year, this is record, past 50 year patrika did not kick any employee, person,who did not know patrika culture, vahi aisee aarope laga sakte hi..kam to karna hi padega..this is right, patrika in not professnal like bhaskar, so this is not true

  9. vikram singh people samachar shivpuri photographer

    August 17, 2010 at 8:08 am

    Rahul sharms ji app befikra rahe kyonki intelijent person ke liye charo or raste khule rahate he agar aap me kabliyat he to app ko usse bhi acchi job mil jayega rahi bat sanstha ki to sabki yahi kahani he isliye samay ke sath chalna chahiye na ki bipreet

  10. Ankit Khandelwal

    August 18, 2010 at 12:09 pm

    is khabar main kitni sachai hain?

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