मीरा और रहमान में ठनी : चैनल जल्द लांच करने पर अड़े राज्यसभा के उपसभापति : राज्यसभा सचिवालय और लोकसभा सचिवालय के बीच एक अदद चैनल को लेकर ठन गई है। लोकसभा की तर्ज पर राज्यसभा चैनल के ड्रीम प्रोजेक्ट पर हीला-हवाली से राज्यसभा के उपसभापति के रहमान खान बिदक गए हैं। रहमान खान और लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार के साथ बैठकों के लंबे सिलसिले के बाद भी फैसला सिफर रहने से राज्यसभा सचिवालय का धैर्य टूटने लगा है। दैनिक भास्कर से बातचीत में रहमान खान ने साफ कहा कि, लोकसभा सचिवालय हमारे निर्णय से सहमत हो या असहमत राज्यसभा चैनल अब जल्द लांच करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि नए चैनल की प्रक्रिया में दो से चार महीने का समय लग सकता है। चैनल की बात पूछने पर खान साहब के शब्दों में थोड़ी रंजिश साफ झलकी। कारण भी बिल्कुल साफ है। संसदीय सचिवालय के उच्चपदस्थ सूत्रों की मानें तो हर छोटी-बड़ी बातों के लिए राज्यसभा सचिवालय को लोकसभा सचिवालय के आगे हाथ फैलाना अब बर्दाश्त नहीं हो रहा। हाल ही में संसदीय परिसर में राज्यसभा सचिवालय के उपर से कैंटीन को दूसरे स्थानांतरित करने मसले पर भी लोकसभा सचिवालय के साथ काफी हुज्जत हुई थी। भले ही कहने को राज्यसभा उच्चसदन है लेकिन संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार राज्यसभा की सभी फाइलें बतौर नोडल एजेंसी लोकसभा सचिवालय से होकर ही जाती है। ऐसे में लोकसभा स्पीकर का आदेश ही सर्वोपरि माना गया है।
संसदीय सचिवालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने दैनिक भास्कर को बताया है कि पिछले कुछ महीनों से उच्चसदन के उपसभापति रहमान खान ने व्यक्तिगत रुचि लेकर जल्द से जल्द नए चैनल को लेकर ठोस निर्णय लेने के पक्ष में थे, मगर किन्हीं कारणों से हर बैठक के बाद फैसला लटकता गया।
सूत्रों ने बताया कि फैसले में देरी की वजह से रहमान खान ने लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को यहां तक सुझाव दिया कि लोकसभा चैनल में होने वाले खर्चों को आधा-आधा बांट कर राज्यसभा के लिए भी लोकसभा चैनल का नया नामकरण कर प्रसारण का आधा समय राज्यसभा को भी आवंटित कर दिया जाए। इससे न सिर्फ खर्च की बचत होगी बल्कि लोगों को दोनों सदनों की प्रमुख कार्यवाही देखने का अवसर मिल सकेगा। लेकिन बात बन सकी। सूत्रों ने बताया कि बदली परिस्थिति में राज्यसभा का चैनल लाने की तैयारी चल रही है ताकि दर्शकों को उच्चसदन की कार्यवाही के साथ-साथ प्रश्नकाल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर सारगर्भित बहस-मुहाबिसों में भागीदार बनाया जा सके। साभार : दैनिक भास्कर











