ऐसे में पत्रकारों की एकता को कौन बचाए : पत्रकार एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए किसी हद तक जा सकते हैं। मामला उत्तराखंड के रामनगर श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के एक पदाधिकारी का है जिसने एक पत्रकार से मारपीट करने वाले आरोपी की जमानत कराकर दूसरे पत्रकार को नीचा दिखाने का कार्य किया है। जमानत कराने वाले पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई न होने से पत्रकारों में रोष है। विवाद हुआ था 10 मार्च को। भवानीगंज स्थित कालोनी में कवरेज के दौरान एक अखबार काशीपुर टाइम्स के पत्रकार असलम सिदिदकी के साथ जमील अहमद की कहासुनी हुई थी।
पत्रकार असलम कालोनी में पेड़ कटने की सूचना मिलने पर कवरेज करने गए हुए थे। जमील ने अपने साथियों के साथ असलम से मारपीट की और कैमरा छीन लिया था। इस घटना की श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने कड़े शब्दों में निंदा की थी। पुलिस ने असलम की तहरीर पर मारपीट करने वाले जमील के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। जमील ने भी असलम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सोमवार को श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के नगर महासचिव व टीवी100 के पत्रकार आसिफ इकबाल ने आरोपी जमील अहमद की गुपचुप तरीके से जमानत करा दी। जमानत कराने की सूचना उन्होंने यूनियन के पदाधिकारियों को देना तक उचित नही समझा।
पत्रकार से मारपीट के आरोपी की जमानत यूनियन के पदाधिकारी द्वारा कराए जाने से नगर के पत्रकार भड़क उठे। उन्होंने तत्काल बैठक कर जमानत कराने वाले पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। पर्यटक आवास गृह में श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष गणेश रावत ने आपातकालीन बैठक बुलाई। असलम ने पत्र लिखकर मामले को संगठन के सामने रखते हुए न्याय दिलाने की मांग की। कई पत्रकारों का कहना था कि किसी पत्रकार से मारपीट करने वाले आरोपी की एक जिम्मेदार पद पर बैठे पदाधिकारी ने जमानत कैसे दे दी। यह बड़ा गंभीर मामला है।
पदाधिकारी के गैर-जिम्मेदार रवैये पर उसके खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्रवाई की जानी चाहिए। जमानत कराने के मामले में आसिफ ने अपने कृत्य के लिए सार्वजनिक रूप से माफी तो मांग ली। मगर उसके खिलाफ कोई अनुशासनहीनता की कार्रवाई न होने से कई पत्रकारों में रोष देखा गया। उनका कहना था कि आसिफ ने जिम्मेदार पद पर रहते हुए यह जानबूझकर किया। यह साथी पत्रकार को नीख दिखाने वाला कदम है। कई पत्रकरों ने आसिफ के खिलाफ कार्रवाई न होने के बाद अब संगठन से अलग होने का मन बना लिया है।
कार्रवाई न होने से गुस्साए कई पत्रकार कुछ दिनों में संगठन से इस्तीफा दे सकते है। मामले में आसिफ पर नरम रवैया रखने पर संगठन के अध्यक्ष गणेश रावत के खिलाफ भी कई पत्रकारों में गुस्सा देखा गया। बैठक में जितेंद्र पपनै, प्रभात ध्यानी, गोविंद पाटनी, सलीम मलिक, चंदन बंगारी, त्रिलोक रावत, गिरीश पांडे, शमीम दुर्रानी, हरीश भटट, राजीव अग्रवाल, चंचल गोला, नौशाद सिदिदकी, चंद्रसेन कश्यप, जफर सैफी, दानिश खान सहित अनेक पत्रकार मौजूद रहे।












amit agarwal budaun
June 23, 2010 at 8:12 am
naya kuch nahi hai suna nahi kya Lakdi ko lakdi katwaye ghar ka bhedi lanka dhaye lakdi k katne ka rsta na hota kuladhi mei gar lakdi ka dasta na hota
zafar saifi (aj)
June 24, 2010 at 6:30 pm
yeh behad gambhirtapurn or sambensheel mamla hai. isme dono pakcho ka pakch janna jaroori tha. jitna dukhad yeh mamla hai utna hi dukhad ghar ki baat ko sarvjanik karna hai.
zafar saifi (aj)
June 24, 2010 at 6:36 pm
galat or dukha hota hai keval ek hi pakch ko sunna. ghar ki baat ko sarvjanik karna bhi galat hota hai.
ajay
July 5, 2010 at 8:51 am
cuting master hain sab
ajay
July 5, 2010 at 8:52 am
gas cylander waale ko pakad liya rikshaw pakad liya ration pakad liya jaise crime branch ke officer ho