ये ‘नंबर एक नंबर एक’ क्या है? : रांची : दैनिक भास्कर ने रांची की धरती पर दस्तक क्या दी, इस शहर में मीडिया हाउसों के बीच अघोषित पोस्टर जंग छिड़ गयी है. रांची के आधे से भी अधिक होर्डिंग्स पर अखबार वाले काबिज हो चुके हैं. ये होर्डिंग्स मीडिया हाउसों के प्रचार प्रसार वाले चित्रों से पटे पड़े हैं. होर्डिग जंग में झारखण्ड के तमाम बड़े अखबार शामिल हैं.
दैनिक भास्कर, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण तथा प्रभात खबर के बीच अपने आप को नंबर-1 दिखाने की होड़ लगी है. दैनिक जागरण जहां हमेशा की तरह अपने नंबर-1 लोगो को यूज करते हुये अपने आपको विश्व में सबसे ज्यादा पढा जाने वाला अखबार बता रहा है, तो दैनिक भास्कर अपने को भारत का सबसे बड़ा अखबार समूह होने की दुहाई दे रहा है. वहीं हिन्दुस्तान और प्रभात खबर के बीच अपने आपको झारखण्ड का न.-1 अखबार साबित करने की जद्दोजहद जारी है.
सभी अखबार समूह ज्यादा से ज्यादा होर्डिंग किराये पर ले रहे हैं ताकि इस जंग में वे अपने आप को अव्वल साबित कर सकें. खासकर हिन्दुस्तान और दैनिक भास्कर की पोस्टर जंग पर स्थानीय जागरूक पाठकों और मीडिया हल्के में जबरदस्त दिलचस्पी जगी है. ‘अपनी मर्जी’ डायलाग तो हर एक के जुबान पर है. रांची में अपनी मर्जी चलवाने का स्लोगन लेकर उतरे दैनिक भास्कर को हिन्दुस्तान ने पटकनी देने की कोशिश करते हुये उसके स्लोगन को अपने एक समाचार का शीर्षक बनाते हुये पेज वन पर खेल डाला. और तब जगह-जगह ‘अब चलेगी अपनी मर्जी’ वाले होर्डिंग्स पर किसी का भी नाम नहीं लिखे होने का फायदा भी हिन्दुस्तान को मिला.
लेकिन चौकन्ने भास्कर के मैनेजरों नें तुरंत अपने तेवर बदले और फटाफट सभी होर्डिंग्स पर दूसरा पोस्टर जारी कर दिया जिसमें शहर वासियों से अपनी मर्जी जानने की बात कहते हुये उनके घर आने की बात कही गयी थी. अब बारी हिन्दुस्तान की थी. हिन्दुस्तान नें ‘झारखण्ड की एक ही मर्जी’ ‘सबसे आगे रहेंगे हिस्दुस्तानी’ वाले होर्डिग जगह-जगह लगवा दिये. लेकिन वर्चस्व की यह जंग अभी जारी है और दोनो तरफ से नये नये स्लोगन वाले होर्डिंग्स हर दिन देखने को मिल रहे हैं. अत: इस जंग के अभी और तेज होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.
लेकिन पोस्टर बाजी के चक्कर में आम पाठक इस भ्रम का शिकार हो गया है कि वास्तव में नम्बर 1 है कौन. मंगलवार की सुबह जब मैं घर से दूध लेने के लिये निकला था तो देखा कि सडक पर दो लोग आपस में बहस कर रहे थे. पहला हिन्दुस्तान को झारखण्ड का न- 1 अखबार बता रहा था तो दूसरा प्रभात खबर को झारखण्ड का सबसे अधिक बिकने वाला अखबार बताते हुये उसकी बात काट रहा था. मैं उनकी बातों को नजरअंदाज करके आगे बढने ही वाला था कि अचानक मुझे हिन्दी फिल्म ‘सौदागर’ का एक गाना ‘ये इलू-इलू क्या है’ बजता सुनाई दिया. मेरे मन में विमर्श शुरू हो गया कि ये ‘नम्बर-1 नम्बर-1’ का चक्कर क्या है. न.- 1 के लिये जारी इस जंग से भले ही किसी अखबार को कोई खास फायदा हो या ना हो, किन्तु फिलवक्त रांची शहर में किराये पर होर्डिंग देने वालों के पौ बारह हैं.
रांची से संतोष पाठक की रिपोर्ट












ABC
May 12, 2010 at 5:58 am
Aaj ke date me kisi bhi akhbaar ke parbandhan me yah himmat nahi hai ki voh hordings par net paid circulation ka jkra kare, sabhi sirf readrership ki baat karate hai, jiskaa survey mutthi bhar logon ke bich kiya jaataa hai. Aur to aur ek akhbaar me kaam karane ke karan mujhame bhi comment me apna naam likhane ki himmat nahi hai.
TARUN
May 12, 2010 at 6:45 am
MERE DOST AB BAJEGE HINDUSTAN KE.
SHER KO SWA SHER MELA HAI.
vikas kumar
May 12, 2010 at 6:55 am
ye poster jung koi naya nahi hai, salo se chala aa raha hai. sal me jab bhi IRS/NRS ya phir ABC ki rating aati hai to ye posterbaji suru ho jati hai. kabhi koi akhbar IRS me piche jaata hai to NRS ki duhai deta hai, koi NRS me piche jata hai to IRS ka daman thamta hai. yahi nahi ab to sahar aur reader group ke hisab se bhi aankron ke graph wale hoarding lagte hain.
prabhat
May 12, 2010 at 6:56 am
bhai,yah daur hee kuch aisa hai. Akhbaar matlab COCola…
Nitish
May 12, 2010 at 7:23 am
ye sab paise ka khel hai………
surendra prasad
May 12, 2010 at 8:11 am
sirf no. 1 ki jung jaari hai. karmcharion ki sudh kisi ko nahi hai. sab bekar ki baat hai.
ROCKY RANJAN PATNA
May 12, 2010 at 11:01 am
JHARKAND KA NO-1 AKABHAR TO PRABHAT KABHER KE HAI. HINDUSTAN KA TO AATA PATA NAHI HAI.
Rizwana
May 13, 2010 at 2:15 pm
Jharkhand ka number one newspaper farooqui tanzeem hai.
prahlad
May 13, 2010 at 2:17 pm
well qaumi tanzeem hi number one hai
sonu
May 14, 2010 at 3:49 am
पाठक भाई, ये अखबारों के मालिकान बडे शातिर हैं, सर्कुलेशन और विज्ञापन में नंबर वन की होड करते हैं। कंटेंट और कर्मचारियों के वेतन में नहीं।
SANTOSH JHA
May 14, 2010 at 4:26 pm
YE SB BAHWAS HAI