राष्ट्रीय सहारा, नोएडा में एक नए नियम से पत्रकारों व कर्मियों को भले दिक्कत हो रही हो लेकिन हमेशा लेट छूटने वाले पेज अब पटरी पर आ गए हैं और टाइम से छूटने लगे हैं। सहारा में रात 9 बजे से लेकर 10 बजे तक डिनर का टाइम होता है। इस एक घंटे के दौरान लोग अपने लाए टिफिन से डिनर करते हैं या फिर सहारा कैंपस की कैंटीन में खाते हैं। कुछ लोग आफिस के बाहर निकल जाते हैं और किसी रेस्टोंरेंट से डिनर करके लौटते हैं। कुल मिलाकर एक घंटे की इस छूट के दौरान कई लोग दो-दो घंटे आफिस से बाहर रहने लगे थे। नए यूनिट हेड विजय कौल ने एक आदेश दिया कि पेज टाइम से छूटने चाहिए। आमतौर पर अभी तक आखिरी पेज दो से तीन बजे के करीब छूटते थे और अखबार तीन से चार बजे के बीच छपना शुरू होता था।
देर से अखबार छपने से इसे सेंटरों तक टाइम से भिजवाने में काफी दिक्कत आती थी और इसका असर अखबार के सरकुलेशन पर पड़ने लगा था। टाइम से पेज छोड़ने की सभी कोशिशें जब नाकाम हो गईं तो विजय कौल ने रात 9 से 10 के दौरान आफिस से बाहर जाने पर रोक लगा दी। कहा गया कि जो भी बाहर जाएगा वह रजिस्टर में जाने व आने के समय की इंट्री करेगा। सिक्योरिटी वालों को कह दिया गया कि वे रात को बाहर जाने वालों पर खासतौर पर नजर रखें व प्रिंट के लोगों के आने-जाने का हिसाब रखें। इस नए आदेश से सिक्योरिटी वालों ने सहारा कैंपस से बाहर निकलने वाले हर शख्स का आईकार्ड चेक कर पता करना शुरू कर दिया कि वे प्रिंट वाले हैं या टीवी वाले। इस पूछताछ व टोकाटाकी से गैर-प्रिंट वालों को दिक्कत होने लगी। कुछ प्रिंट वालों ने रात 9 बजे के बाद बाहर जाने का टाइम रजिस्टर पर डाला तो उन्हें अगले दिन क्यों न तनख्वाह काट ली जाए टाइप कारण बताओ आदेश सुनने को मिला। इसके बाद से राष्ट्रीय सहारा अखबार के नाइट शिफ्ट के लोगों ने बाहर जाना ही बंद कर दिया। नतीजा यह हुआ है कि अब सारे पेज रात ग्यारह से साढ़े बारह बजे के बीच ही छूट जा रहे हैं। नया नियम कर्मचारियों को भले ही अजीब लग रहा हो लेकिन प्रबंधन तो खुश है कि एक छोटे से नियम से चीजें ढर्रे पर आ गईं।











