इंडियन एक्सप्रेस समूह के मुंबई से प्रकाशित होने वाले मराठी अखबार ‘लोकसत्ता’ के मुख्य संपादक कुमार केतकर इन दिनों एक अन्य अखबार से काफी खफा हैं. इसकी वजह यह है कि उनके प्रतिस्पर्धी अखबार ‘लोकमत’ ने केतकर के बारे में एक खबर प्रकाशित कर दी. इस खबर में कहा गया है कि कांग्रेस की ओर से राज्यसभा टिकट पाने के लिए कुमार केतकर भी प्रयासरत हैं.
इसी खबर के आधार पर मुंबई के अंग्रेजी दैनिक ‘फ्री प्रेस जर्नल’ ने भी रविवार को पहले पन्ने पर यह खबर प्रकाशित कर डाली. फिर क्या, कुमार केतकर खफा हो गए और उन्होंने एक पेज का स्पष्टीकरण जारी कर डाला. ज्ञात रहे कि केतकर वरिष्ठ दिवंगत कम्युनिस्ट नेता कॉम्रेड श्रीपाद अमृत डांगे की विचारधारा से प्रभावित हैं. कांग्रेस की खुलकर हिमायत करते आए हैं.
देश चलाने का अधिकार केवल कांग्रेस को ही है, ऐसा उनके लेखों से प्रतीत होता है. इसीलिए केतकर ने हमेशा इंदिरा गांधी और इमरजेंसी का खुलकर समर्थन किया है. इकानॉमिक्स टाइम्स में सहायक संपादक, महाराष्ट्र टाइम्स और लोकमत में वे संपादक पद पर रह चुके है. महाराष्ट्र टाइम्स में उनके कार्यकाल में सोनिया गांधी की इतनी वाहवाही हुआ करती थी कि मजाक में लोग उस अखबार को ‘सोनिया टाइम्स’ कहा करते थे.
कुमार केतकर का कांग्रेस प्रेम देखकर मुंबई के पत्रकार यह मान रहे थे कि कांग्रेस एक ना एक दिन उन्हें राज्यसभा में जरूर भेजेगी. फिलहाल लोकमत में खबर प्रकाशित होने के बाद केतकर खफा हो गए हैं. उनका कहना है कि एक राज्यसभा सीट की खातिर वह अपनी राजनीतिक आजादी खोना नहीं चाहते हैं. केतकर के बारे में ‘फ्री प्रेस जर्नल’ में प्रकाशित खबर को यहां पढ़ा जा सकता है… केतकर












vijay yadav
June 5, 2010 at 1:21 pm
मुंबई में सिर्फ कुमार केतकर पर ही कांग्रेसी होने का आरोप नहीं लगाया जाना चाहिए । मुंबई में और भी ऐसे कई समाचार पत्र है जो कांग्रेसी बोली बोलते है। जैसे कि हिंदी हमारा महानगर । इसके आलावा एक और अखबार था जो इन दिनों बंद है । नाम है दो बजे दोपहर । इस अखबार को वरिष्ठ पत्रकार व कांग्रेसी नेता श्री राम मनोहर त्रिपाठी जी ने शुरू कराया था। फिलहाल यह अखबार मुंबई कांग्रेस प्रवक्ता निजामुद्दीन राइन के पास है। इसके आलावा और भी कई साप्ताहिक – दैनिक पत्र कांग्रेसी भाषा बोलते मिल जायेंगे। मेरा तो सिर्फ इतना कहना है कि जिसकी जहाँ पटती है उसकी वही विचारधारा है। क्यों कोई किसी पर टिप्पड़ी करता है।
– विजय यादव
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Rakesh Tiwari
June 5, 2010 at 7:44 pm
Kumar Ketkar is agent of congress he may not be called as a journalist
kundan sahoo
June 6, 2010 at 6:30 pm
pata nahin ye kya sunane mil raha hai ketkarji ke vishay mein, achchhe patrakar hai, aise khabron ko to ochhe log chatkhare lele kar padhenge.
doha dekhiye-
Maan sahit vish khaayike sambhu bhaye jagdeesh !
bina maan amrit piye, rahu kataye sheesh !!
daagdar kaun hain, darda pariwar ya ketkar, ye bahutere patrakaar jante honge !
Dr Matsyendra Prabhakar
June 7, 2010 at 6:48 am
Bhai, aaj ki Patrakarita men kahin-koi-kisi ka agent nahin hai. Aisa kah kar apni juban nahin gandi karni chahiye. Main-Aap-Hum Sabhi apne-apne kam men apne tarike se lage hain, aur hona bhi chahie; kyonki budhi ya vivek ka koi paimana to hai nahin, aur agar hai to sirf safalta ko iska paimana kaha ja sakta hai. Iss aadhar par sabhi swarthoan athva apne hiton ke hi AGENT hue, phir kisi vajah se kamyabi na mile to doosre par aarop kyon? Uchit va upyukt awsar ke anuroop kadam na uthana AKARMANYAYATA hi kahi jayegi, always remember ‘Time and Tide wait for none’ Abhiyan zari rakhen-Bhai Kumar Ketkar jee, ismen koi sharmindagi nahin honi chahie,