खबर है कि सहारा प्रबंधन ने अपने एक स्थानीय संपादक अनिल भास्कर को बर्खास्त कर दिया है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ के स्थानीय संपादक रहे अनिल भास्कर को कुछ आरोपों के चलते पिछले दिनों सहारा के नोएडा स्थित आफिस बुला लिया गया था। उन पर लगे आरोपों की आंतरिक जांच चल रही थी। जांच पूरी होने के बाद प्रबंधन ने उन्हें जाने को कह दिया। अनिल भास्कर लखनऊ से पहले राष्ट्रीय सहारा की गोरखपुर यूनिट के स्थानीय संपादक थे। बताया जाता है कि राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ के प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों ने अनिल भास्कर पर कुछ आरोप लगाए थे। उधर अनिल भास्कर से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रबंधन के लोग रोजाना के काम में अपनी मनमर्जी चलाना चाहते थे जिसका अनिल ने विरोध किया।
इसी के चलते अनिल को परेशान करने की नीयत से झूठे आरोपों में फंसा दिया गया। इस प्रकरण के बारे में अनिल का पक्ष जानने के लिए जब उनके मोबाइल नंबर पर फोन किया गया तो उनका मोबाइल स्विच आफ बताता रहा। बताया जाता है कि तेज-तर्रार स्वभाव के अनिल अपनी तेजी की वजह से भी कई लोगों को दुश्मन बना बैठे थे। नाम न छापने की शर्त पर सहारा समूह में कार्य कर रहे एक स्थानीय संपादक का कहना है कि इस ग्रुप में प्रबंधक इस कदर हावी हैं कि वे किसी भी तेज-तर्रार स्थानीय संपादक को बर्दाश्त नहीं कर पाते। उन्हें अपमानित करने के लिए लगातार शिकायतें भेजते रहते हैं।











