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सहारा मीडिया के एचआर हेड चंदेल गए!

प्रताड़ित करने के उद्देश्य से दूर भेजे गए ‘सहारा समय’ के कई रिपोर्टरों को वापस बुलाया गया : पता चला है कि सहारा मीडिया के एचआर हेड एके चंदेल सहारा परिवार के हिस्से नहीं रहे. उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. सहारा से जुड़े एक भरोसेमंद सूत्र की बातों पर भरोसा करें तो एके चंदेल ने खुद अपना इस्तीफा प्रबंधन को सौंप दिया है. हालांकि इस घटनाक्रम की अभी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई है.

प्रताड़ित करने के उद्देश्य से दूर भेजे गए ‘सहारा समय’ के कई रिपोर्टरों को वापस बुलाया गया : पता चला है कि सहारा मीडिया के एचआर हेड एके चंदेल सहारा परिवार के हिस्से नहीं रहे. उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. सहारा से जुड़े एक भरोसेमंद सूत्र की बातों पर भरोसा करें तो एके चंदेल ने खुद अपना इस्तीफा प्रबंधन को सौंप दिया है. हालांकि इस घटनाक्रम की अभी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई है.

कुछ दिनों पहले चंदेल का तबादला सहारा के लखनऊ स्थित मुख्लायय कर दिया गया था. इसे एक तरह से डिमोशन या पनिशमेंट के रूप में देखा जा रहा था. अब सूचना है कि उन्होंने आखिरी बार सहारा प्रणाम बोल दिया है. सूत्रों के मुताबिक सहारा में स्टाफ के उत्पीड़न, जबरन इस्तीफा लेने, प्रताड़ित करने के लिए किसी दूर जगह भेज देने जैसे कार्यों को अंजाम इन्हीं चंदेल ने ही दिया. चंदेल के जाने के बाद उनके सेकेंड मैन रहे लोकेश शर्मा को एचआर का प्रभार दिया गया है. हालांकि एचआर से पीड़ित सहारा वालों का कहना है कि चंदेल से कम दोषी लोकेश नहीं हैं. लोकेश ने भी उत्पीड़न अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इसलिए पीड़ितों की बददुआ उनके साथ भी है.

एक अन्य सूचना के मुताबिक सहारा समय में जिन रिपोर्टरों को प्रताड़ित करने के लिए दूर भेजा गया था, उनमें से कइयों को वापस बुला लिया गया है. इलाहाबाद से जम्मू भेजे गए सुशील तिवारी को फिर इलाहाबाद ब्यूरो में काम करने के लिए कह दिया गया है. बनारस से रत्नेश राय को श्रीनगर और निमेष राय को गुवाहाटी भेजा गया था. इन्हें वापस बनारस बुला लिया गया है. कंचन को नोएडा बुलाया गया था. उन्हें फिर इलाहाबाद जाने के लिए कह दिया गया है. इन लोगों ने दूर तबादला किए जाने के बावजूद इस्तीफा नहीं दिया. नई जगह ज्वाइन करके या तो छुट्टी ले लिया या फिर वहीं काम करने लगे. इनका कहना था कि वे खुद इस्तीफा नहीं देंगे, अगर सहारा उन्हें निकालता है तो निकाले. सहारा मीडिया में नए वरिष्ठों के आने के बाद इन लोगों के एक बार फिर से अच्छे दिन वापस लौटते दिख रहे हैं.

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0 Comments

  1. sadanand

    February 19, 2010 at 3:29 pm

    Chandel ke dwara sataye gaye sabhi Sahara Bandhuon ko hardik badhaiya

  2. अमित गर्ग

    February 19, 2010 at 3:35 pm

    देर आये दुरुस्त आये…
    काश! सहारा, दूसरे मीडिया संस्थानों से दर-बदर की ठोकरें खाने को मजबूर हुए काबिल लोगों को भी अपने यहाँ मौका देने की कोई कोशिश करे…!

  3. sadanand

    February 19, 2010 at 3:36 pm

    sahara mein der aayad durust aayad poori tarah se fit hota hai. Der se hi sahi par nyaya karne ke liya Aadarniya Sahara shri ko dhanyavaad. Sabhi sahara karmi jo Noida mein Karyarat hain unko badhaiyan

  4. k

    February 20, 2010 at 5:27 am

    तलवार दोनों तरफ चल सकती है, जो काटते हैं वो कटते भी हैं।
    those who live by sword, died by sword

  5. अनाम

    February 20, 2010 at 5:54 am

    हां चंदेल तो पहले ही विदा हो गए थे, लेकिन जाना चाहिए लोकेश शर्मा को भी. ये साहब ही लोगों को एचआर बुलाकर धमका कर इस्तीफा लेने का काम करते थे. और यहां तक कि एक जूनियर कर्मचारी ने इस्तीफा नहीं दिया तो गेट पर नोटिस चस्पां करा दिया कि इन्हें अंदर न आने दिया मानो उसने कोई गबन किया हो.
    चंदेल के सिर्फ जाने से एच आर सुधर गया हो ऐसी भी बात नहीं है. सुधार की जरूरत अभी है.इसके लिए दूरदर्शिता चाहिए. वो नए मैनेजमेंट में कितना है. कहना मुश्किल है.
    चैनलों को सुधारने के लिए यहां काम कर रहे लोगों की क्षमता की पहचान की जरूरत है. शीर्ष पर जो नकारा लोग बैठे हैं उन्हें हटाने की जरूरत है. बाहर से लोगों को बुलाने मात्र से क्रांति हो जाएगी. ऐसा नहीं है.
    आखिर ऐसा क्यों होता है कि यहीं के कर्मचारी स्टार आजतक जी न्यूज जाकर जबरदस्त काम करते हैं और यहां रहते हुए वो सामान्य समझे जाते हैं. गलती कहीं न कहीं उन लोगों की है जो शीर्ष पर बैठे हैं

  6. roshan

    February 20, 2010 at 6:58 am

    katal ka hukum dainai walai masti sai ghoom rahai hai…..becharai jallad ko fansi laga di gayi…aur log taliyan bhi baja rahai hain ….kamaaal hai.>:(

  7. Krishna Mohan

    February 20, 2010 at 7:02 am

    बहुत सही लिखा है अनाम ने.यहाँ काम करने वालों को नाकारा सिद्ध करने की पुरानी परंपरा है.सी.बी.सिंह भी पुरानी गेंग के मेंबर रहे हैं पर उन्हे पुरुस्क्रत किया गया है.घोर आश्चर्य????

  8. Vishal

    February 20, 2010 at 7:11 am

    Shayad bahut he kum logo ko yey baat malum hogi ke is media industry mey Mr. Lokesh Sharma jiasa qualified or efficient aadmi nahi hey. Company interest mey kiya gaya kaam utpeedan ke class mey nahi aata hey or phir is aadmi ka mr chandel sey koi comparasion karna bahut he galat hoga, mr chandel ek bahut he inefficient hr head they, yey baat keval seniors he nahi balki sarey sahara key employees jaantey hey. Mr Lokesh, Mr chandel sey pahley he HR head they, company ke kuch seniors ke najdeekiyo ke vajay sey HR Head banayeygayey they na ke unke kabeeliyat ke vajay sey. Lakin kuch bhe ho Sahara Key liyey accha ho aise meri kamna hey

  9. RAJIV

    February 20, 2010 at 6:03 pm

    एच आर हेड को हटाने से कुछ नहीं होगा…सहारा समय में तो अभी वो बड़ी मछलियां बाकी हैं जिन्होंने सहारा समय को डुबोया है..गरीब आदमी का पैसा काट लिया गया लेकिन इन मठाधीशों को नहीं हटाया गया..नया मैनेजमेंट भी कुछ खास करता नहीं दिखाई दे रहा है…यानि ढाक के तीन पात ही दिखाई दे रहा है सहारा समय….यहां पर कुछ नहीं हो सकता;D

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