सहारा की एफटीपी पर से होते हैं विजुअल चोरी : आईबीएन, स्टार, आजतक, जी न्यूज, पी7न्यूज, न्यूज24, एनडीटीवी, इंडिया टीवी, एमएच1ये ऐसे चैनल हैं जिनकी एफटीपी से विजुअल कॉपी नही होते. इनकी एफटीपी लाक होती है. कोई चोरी करना चाहे तो फीड चोरी नही हो सकती. इनसे कॉपी नही होती. लेकिन सहारा से आप कहीं भी किसी भी जगह किसी भी टाइम फीड कापी कर सकते हैं.
सभी स्ट्रिंगर्स व रिपोर्टर्स को यूजरनेम व पासवर्ड का पता होता है. कई बार एक स्ट्रिंगर को दुसरे चैनल के स्ट्रिंगर से भी फीड लगवानी पड़ती है तो पासवर्ड सभी को पता होता है. लेकिन पासवर्ड पता होने के बाद दुसरे चैनल से कॉपी नहीं होती लेकिन सहारा एक ऐसा चैनल है जिससे कॉपी होती है. इस कारण लोग इसका फायदा उठा रहे हैं. दिल्ली व एनसीआर में सहारा के चालीस के करीब फील्ड रिपोर्टर हैं. यह संख्या बाकी चैनलों की तुलना में चार गुना है. जब कोई घटना होती है तो कई चैनलों के रिपोर्टर मौके पर जाना जरूरी नहीं समझते. उनका मानना होता है कि जब तक वे वहां पहुंचेंगे तब तक तो सहारा वाला एफटीपी पर विजुअल भी डाल देगा क्योंकि सहारा का रिपोर्टर हर गली में है. सहारा वाले सबसे पहले पहुंच जाते हैं. इसलिए सहारा वाले के ही विजुअल से काम चल जाएगा. बाकी के डिटेल पुलिस से ले लेंगे. इस तरह हर घटना की खबर को आठ से दस चैनल वाले सहारा से उठाते हैं.
स्ट्रिंगर ही नहीं, अधिकतर टीवी चैनल के अन्दर बैठे लोग भी सहारा से फीड उठा सहारा से पहले विजुअल चला देते हैं. आजकल सहारा से हर रोज चोरी हो रही है. ऐसा नहीं कि सहारा वालों को यह पता न हो. कई बार सहारा के स्ट्रिंगर्स इस बात की शिकायत करते हैं. वे एसाइनमेंट पर बोलते हैं. तब उन्हें कहा जाता है कि आप आईटी में बोलिए. कुल मिलाकर कहीं कोई सुनवाई नहीं और कहीं कोई कार्रवाई नहीं. इस प्रकार सहारा अब बहुतों का सहारा बन गया है. सहारा से जुड़े वरिष्ठ लोगों से अनुरोध है कि अपने फील्ड रिपोर्टरों की मेहनत को बेकार ना जाने दें. सहारा की एफटीपी लाक करें ताकि कोई भी खबर न उठा सके. भड़ास4मीडिया के जरिये ये बात सहारा के आकाओं तक पहुंचे और इस पर कार्रवाई हो, इसी उद्देश्य से यह पत्र भेज रहा हूं.
हम लोग यदि नाम बदलकर या फोल्डर बदलकर फीड डालें तो भी थोड़ी-थोड़ी कॉपी करके दुसरे लोग पता लगा लेते हैं कि फीड कौन सी है. इस तरह सहारा के वेस्ट इलाके के स्ट्रिंगर के कवरेज को दूसरे चैनल के ईस्ट इलाके के स्ट्रिंगर बिना खबर कवर किए ही सहारा के एफटीपी से उठाकर अपने चैनल पर अपने नाम से चलवा देता है. हद तो तब हो गई जब लोग अपने पर्सनल विजुअल भी आदान-प्रदान करने के लिए सहारा की एफटीपी पर डालते हैं और दूसरे से कहते हैं कि सहारा में है, उठा लो. कई चैनल तो ऐसे हैं जिनके लोग कवरेज पर नहीं आते. अपने ऑफिस मै बैठे-बैठे स्क्रिप्ट भी सहारा वाले से मांगते हैं और कहते हैं कि फीड तो तेरे वाली उठा ली है, अब स्क्रिप्ट भी भेज दे. इसलिए आप से अनुरोध है कि इस बात को सहारा के आला अधिकारियों तक पहुंचायें व इस मेल को भेजने वाले का नाम व मेल आईडी भी गोपनीय रखे. धन्यवाद.
-एक पत्रकार












manoj
April 4, 2010 at 8:16 am
sahara hi nahi balki aise bahut se channels hai jinki FTP lock nahi hai….aur iska result yeh hua ki aaj ki date me har stringer apni news agency khol kar baitha hua hai…..ek news FTP me upload karte hai dus news churate hai….aur yeh dus news naye naye channels ko bahut hi kam rate me bech dete hai….aaj kal daily koi na koi news channel open ho rahe hai, Kyon ho rahe hai malum nahi ? kyon ki 3-4 mahine me hi unki halat patli ho jati hai…. so aise me aise news channel chahte hai ki chori ka to chori ka sahi bas news saste me milna chahiye….so jaan bujh kar apna FTP lock nahi karte…..sahara jaise kuchh bade channels ke FTP bhi lock nahi hai Kyon ki Yahi Technical Head aur Assignment Head partnership me apni apni News Agency chala rahe hai ? News Editor Association ya Govt. ko hi kuchh karna padega otherwise to sab Chalta rahega……main bas itna janta hoon ki Hamare aas-paas agar kuchh galat ho raha hai to hame apni awaz uthani chahiye…[email protected]
कमल शर्मा
April 4, 2010 at 8:52 am
उपेन्द्र राय पता लगाओ, इसमें सच्चाई हो तो तत्काल एफटीपी पर लॉक लगाओ। इस चोरी को रोकना बेहद जरुरी है।
awani
April 4, 2010 at 8:52 am
it is to shoked news for everyone person who realy work , but as such you know that there is no any limit for truth
shivku
April 4, 2010 at 12:41 pm
jo likha hi 100% such hi
Ajay Sharma
April 4, 2010 at 2:05 pm
khabar padhkar koi hairaani to nahi hue bhaiya chor to har jagah baithe hai har vibhag me hai… lekin duniya ki sachchi tasvir dekhane ka dava karne wale news channel me bhi itne shatir chor baithe hai… inka kuhh karna hogaaa…
yaswant ji ander ke logo ko to pahle hi pata tha lekin hairaani is bat ki hai ki sab kuchh jante hue bhi sahara ke logo ne stringer ke dard ko nhi samjha… shameful
Rajender
April 4, 2010 at 4:11 pm
चोरी बंद होते ही काचोरी भी बंद हो जाएगी तो सहारा की हालत भी सुधर जाएगी..
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सचमुच सहारा दिल्ली ही नहीं बल्कि देशभर में बैठे सैकड़ों कामचोर स्ट्रिंगर का ही सहारा नहीं बना हुआ बल्कि खुद सहारा में बैठे सहारा के ऐसे कई बड़े लोगों की सफलता का जरिया भी बना हुआ है जिनका मानना है की सहारा की नैया अब डूबने वाली है..लिहाज़ा अब नौकरी बहुत हुई अब अपना काम शुरू किया जाये….ये लोग ही सहारा को दिम्मक की तरह चाट रहे है…इनकी खुद की न्यूज़ एजेंसियां है जो फीड सहारा से ही उठाते है और फिर कुकुमुर्तों की तरह नित नए आ रहे न्यूज़ चैनलों को सस्ते दामों में फीड बेच देते है…ऐसे कई लोगों ने केवल अपनी अपनी न्यूज़ एजेंसियां ही कड़ी नहीं कर ली बल्कि चैनल तक खोल दिए..और बहुत से खोलने की तयारी में है..इन्हें पता है न्यूज़ तो सहारा से चुराई जा ही सकती है फिर हम क्यों स्टिंगर रखें…रिपोर्टर रखें….यहीं कारण सहारा ने अपनी फीड को लोक नहीं किया..बात केवल स्ट्रिंगर तक ही सिमित नहीं है…देशभर के स्ट्रिंगर तो ऐसा कर ही रहे है दिल्ली में काम कर रहे फिल्ड रिपोर्टर भी सहारा से फीड चोरी कर अपने चैनलों को भेज रहे है…ये लोग फिल्ड में नहीं जाते…इन्हें मालूम है की सहारा से फीड तो मिल ही जाएगी….ऐसे में तकलीफ उन रिपोर्टरों को ज्यादा होती है जो मेहनत कर स्टोरी कवर करके लाते है लेकिन उनकी मेहनत का लाभ दुसरे बड़े चैनलों के रिपोर्टर और बड़े चैनल तक उठा रहे है…
आज छोटे से छोटे चैनल ने भी अपनी FTP लोक की हुयी है लेकिन सहारा ने नहीं की..क्यों.?…खुद सहारा में बैठे बड़े लोग नहीं चाहते..वजह साफ़ है उनकी दुकानदारी या तो बंद हो जाएगी या फिर उनकी खर्चे बढ़ जायेंगे….जिनका मानाने है की सहारा बा डूबता हुआ जहाज है..लिहाज़ा पहले ही अपना पपलू फिट कर लो…अपना कारोबार खड़ा कर लो…संशाधन सहारा की और सफ़लत उनकी व्यक्तिगत…ऐसे लोगों की तादाद इतनी ज्यादा है की प्रबंधन चाहे इस डूबते जहाज को बचने के लिए कितने ही तब्दलों का तबला बजा ले लेकिन इन तबलचियों की काबिलियत और संख्या इतनी है की नए नए आने वाले जुझारो और काबिल लोग भी जाने अनजाने इनकी ही थाप पर नाचते है…कुछ कर गुजरने की चाहत रखने वाले इमानदार लोगों की लिए सहारा में कोइ स्थान नहीं है…दुख तो यही है की कभी में सहारा अखबार की जबरदस्त फैन हुआ करता था…पिछले २० सालों से मेरे पास अखबार जरूर आता है लेकिन उसे केवल देखता भर ही हूँ…यही हाल सहारा एनसीआर और नेशनल का है…में खुद एक बड़े राष्ट्रियं और प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल का रिपोर्टर हूँ…लेकिन सहारा को जैसे चैनल को अपनी आँखों से डूबते हुयी महसूस कर रहा हूँ तो तकलीफ होती है..तकलीफ इस बात की भी की जो चैनल एक आदमीं की आवाज बना हुआ था आज उसकी विश्वसनीयत समाप्त होती जा रही है….यदि सहारा केवल ftp ही लोक कर दे तो उसका असर साफ़ नजर आ जायेगा….ऐसा करने से ऐसे लोग या तो अपना कारोबार बंद कर देंगे और पूरा ध्यान सहारा में दे सकेंगे… या फिर सहारा से काम छोड़कर अपने काम में जूट जायेंगे…दोनों ही सूरतों में फायदा तो केवल सहारा का ही होगा….
राजेन्द्र [b][/b][b][/b][url][/url][url][/url]
manu
April 4, 2010 at 5:41 pm
iske bad bhi sahara ki kaisi situation hai ye sabhi jante hai top lebel ke logo ko iske leye sochana chahiye
pankaj
April 4, 2010 at 6:49 pm
janaab ye sirf sahara hiki baat nahi hai. kai big news channels ke stringers to ghar se nikle bina hi story dusre ki ftp se chori kar chalba lete hai vo bhi same visual. inki kitni bhi shikayat karlo koi fark nahi. channel ko to bus story se matlab hai phir chahe chori ki hi kiyu na ho.[b]aaj dusro ko aaina bahi dikha rahe hai jinka khud ka chehra badrang hai.[/b] inse istarheen hone ki aap kalpna bhi nahi kar sakte ho.
deepak
April 5, 2010 at 5:13 am
mai ek kuch din pahle aise news channel me tha jise do or bhi chanle hi.ek bhaki hi oe ek music.mai news wale me tha.wahan ka executive producer hi jise dekta rehta tha ki din bhar NDTV,VOI, SAHARA JANSANDES INDIA NEWS INDIATV ke video copy karta rehta hi or sbko bolta rehta hai ki katwa lo kalwalo.mai kbi nai socha tha ki kahi boluga lekin bhadas par aisi khbr dekhne par man kr gya mujhe bhi bolne pr
Suraj Singh
April 5, 2010 at 5:15 am
bilkul sahi baat hai. jab mai ghaziabad me reporting kiya karta tha to maine wahan aisa hi dekha. kai chennals ke patrkar wahan se feed chori karte. Itna hi nahi ghaziabad ka local chennel bhi sahara ki FTP se Feed CHurate hai…….
rana singh
April 5, 2010 at 2:32 pm
yah gambheer maslan hai bechare sahara ke stringer mehnat karte hai aur kheer koi aur kha jata hai.ek aise hi vakya me sahara ke satna stringer ke satah hua aur assignment ne apni kami na man kar bechare ko bahar kar diya aur uske bill bhi clear nahi kiye.
Anil Kumar Sharma.........................
April 5, 2010 at 5:07 pm
Bilkool Sahi hai … ab Sahara ke aakaaon ko sochnaa chaahiye or apni Ftp Lock kar de …. par bechaare in field reporter ko ye maaloom nhi ki ye sab andar ke logon ki milibhagat se hotaa hai …isliye mujhe nhi lgataa ki ye lock hogi …..ydi khud sahara shri ise pad lege to lock ho sakti ahi otherwise nhi ………………….
Anil Kumar Sharma…………………….
XYZ.....
April 5, 2010 at 8:00 pm
— धन्यवाद श्रीमान जी ….. भड़ास फॉर मीडिया का असर हुआ …. सोमवार शाम से सहारा की ऍफ़ टी पी लोक हो गई … अब आज रात को दस लोगों ने अलग अलग जगह से चेक किया कोपी नही हो रही थी ….. इसके लिए यशवंत जी आपका बहुत बहुत श्कुरिया ….
XYZ…
UPENDRA NATH RAI
April 6, 2010 at 4:58 am
Upendra ji
Namskar,
Hame ummid hai ki Apke Anubhav ka Fayada Hoga Aur Jald Hi SAHARA me bhi lok sistam lag jayega.
UPENDRA RAI
Mo. No.- 09452248330
ALLAHABAD
Nadir
April 6, 2010 at 8:47 am
Sahara Channel is always been used by its people,many of its bureau reporter run their additional feed feeding system through sahara FTP and other infrastructure. To name a few bureau Ranchi,Kolkata,Guwahati bureau sells feed to some other agencies and FTP is the best way to steal as their is no locking system.I am writing this because once for some orissa,northeast and kolkata feed i contacted kolkata bureau and they arranged me everything although i had to pay 2000 for each feeds. Some time later same feed i had seen been telecasted in Sahara national channel.