: एक ने इंडिया न्यूज, दूसरे ने न्यूजएक्स ज्वाइन किया : पीटीआई से स्टार न्यूज पहुंचे रणवीर : अमित ने ईटीवी से टाइम्स नाऊ में लगाई छलांग : सहारा समय एनसीआर चैनल को दो लोगों सुनील कुमार व मधुलिका राय ने छोड़ दिया है. दोनों चैनल की लॉंचिंग के समय से जुड़े हुए थे.
सुनील और मधुलिका एनसीआर में असिस्टेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत थे और इन्क्रीमेंट न होने की वजह से परेशान थे. गौरतलब है पिछले दिनों सहारा समय एनसीआर में बचे रहे गिने चुने लोगों को हरियाणा पंजाब औऱ राजस्थान की भी जिम्मेदारी दे दी गयी थी. सुनील ने इंडिया न्यूज में बतौर प्रोड्यूसर ज्वाइन किया है जबकि मधुलिका ने न्यूज़ एक्स ज्वाइन किया है.
युवा पत्रकार रणवीर ने पीटीआई भाषा से इस्तीफा देकर स्टार न्यूज में ज्वाइन कर लिया है. वे स्टार में असिस्टेंट प्रोड्यूसर बने हैं. आईआईएमसी के स्टूडेंट रहे रणवीर ने पीटीआई भाषा में करीब एक साल तक काम किया.
अमित वर्मा ने टाइम्स नाऊ में प्रिंसिपल करेस्पांडेंट के बतौर नई पारी शुरू की है. वे इससे पहले ईटीवी में बिजनेस रिपोर्टर के तौर पर कार्यरत थे.












mukesh kumar
July 16, 2010 at 8:33 am
ye do log hain kaun. humney inka na to kabhi naam hi suna hai aur na hi kabhi inka kaam hi dekha hai.
Durgesh Shrivastava
July 19, 2010 at 7:28 am
sunil sahara samay ncr ki launching se pahle se sahara ke saath jude hue the. isse phahle wo hastakshep ka kaam sahara ke ek reporter sashidhar pathak ke saath dekh rahe the. Usse pahle Sanjay Srivastava ke saat kaam kar rahe the. unhone jain tv se apni shuruaat ki thi aur baad me canvas naam se ek art mag bhi nikala. Kala jagat ke liye unka naam aparachit nahi hai, ncr me wo apne belag vicharon ke liye jaane jaate the. waise sahara samay ncr se jaldi hi kuch aur log vida honge, sunil ji ko nai paari ke liye shubhkamanayen.
kumarsingh
July 19, 2010 at 2:02 pm
सर ये बड़े दुख की बात हैं की सहारा में आज पुराने लोगों को इस कधर जाना पड़ रहा है। वह भी ऐसे लोगों को जिन्होंने सहारा के चैनलों की नींव रखी….मैं उपेंद्र जी से आपके माध्यम से एक निवेदन करना चाहता हूं कि प्लीज पत्रकारिता के उस स्तम्भ को बरबाद नहीं होने दें….जिसने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा सहारा जैसी वैशाल संस्था को दिया हो,दुनिया जानती है…कि सहारा के लोग आज हर चैनल में मौजूद है…और बहुत अच्छा काम कर रहे है…ऐसा इसलिए की बहार इन लोगों के काम को पहचाना जाता है…जबकि सहारा में ऐसा नहीं होता है…आज के समय में कभी साउड़ करने वाले एक व्यक्ति को पूरे सहारा का टैकनिकल हेड बना दिया गया है…जबकि मुझे ऐसा लगता हैं की उनसे अच्छे जानकारा अभी भी सहारा में मौजूद है…फिर ऐसा क्यों क्या इससे पत्रकारिता का भला होगा…क्या उपेंद्र जी खुद के लिए एक लंबा रास्ता तय कर पायेगें….यही नहीं कुछ इंट्रन रहे लोगों को आज के समय से सहारा में आउटपुट या चैनल हेड तक बनया गया है…आप ही बतायें मित्रों क्या यह उचित है…ऐसे में सहारा में एक दूसरे के प्रति लोगों में द्वेष पैदा होगा की नहीं…हां यदि सहारा के उचवर्ग ने फुट डालो और राज करो वाली नीति अपनायी हैं तो यह भी कहां तक उचित है…आखिर क्यों कोई भी व्यक्ति…वरिष्ठ पत्रकारा अपने से नीचे वाले व्यक्ति के अंडर में काम करना चाहेगा…दुख होता इन सब सूचनाओं से क्योंकि यह तो चमचा पत्रकारिता हो गयी है..मित्रों इसके बारे में जल्दी से कुछ सोचिए…वरन हम सब मारे जाएगे…एक दिन…..कुमार सिंह
kumarsingh
July 24, 2010 at 4:25 pm
मित्र यही तो सहारा में काम करने वाले लोगों का दुर्भाग्य हैं कि उनके काम को अदंर वाले ही नहीं पहचानते तो आप कैसे पहचान सकते है। लेकिन काम करने वाले हमेशा…चुप-चाप काम करते रहते है…मुकेश जी….कुमार सिंह