सब बिकता है तो खबरें क्यों न बेचें : वैदिक

कारपोरेट हाउस जैसा चाहते हैं, पैसा देकर अखबार में वैसा छपवाते हैं- जस्टिस जीएन रे : अकेला अखबार अपने को पवित्र नहीं कर सकता क्योंकि समाज में बुराई के प्रति सहनशीलता विकसित हो गई है- अभय छजलानी : पेड न्यूज सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है, हर दिन पैसा ले-देकर खबरें छप रही हैं- श्रवण गर्ग :