उनकी जगह मेरी मां होतीं तो!

यशवंत भाई, मुझे अब रहा नहीं जा रहा है. मुझे ऐसा लग रहा है कि हम लोग कितने असहाय हैं कि हम अपनी मां तक की इज्जत-मान-सम्मान की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं. सिस्टम इतना क्रूर व हिंसक हो गया है कि अब हमारी निर्दोष बेटियों-माओं-भाभियों-चाचियों तक को नहीं बख्शा जा रहा है. हमारे पत्रकार साथी चुप बैठे हैं. मैं कुछ लिख रहा हूं. इसे publish जरूर करना. एक और बात भाई साहब. मैं आपके साथ हूँ. किसी भी पदेशानी में याद जरूर करेंगे मुझे.

आपका

अभिजीत सिन्हा

सीनियर करेस्पांडेंट

रफ्तार टाइम्स न्यूज, पटना