पत्रकारों को मुगालता हो गया है कि वह मीडिया हो गया है : अजय उपाध्याय

: न्यू मीडिया कर रहा सच्ची पत्रकारिता – राजीव सिंह : वाराणसी। वेब पत्रकारिता या न्यू मीडिया ही आगामी दिनों की पत्रकारिता है क्योंकि इस ओर आज के दौर में लोगों का रूझान तेजी से बढ़ रहा है। इस नयी पत्रकारिता में सच का बोलबाला समझ में आता है। जहां अभी तक न तो अपनी टीआरपी बढ़ाने की जरूरत समझी जा रही है और न ही प्रिंट मीडिया की तरह विज्ञापन के लिए किसी के पक्ष में वन साइडेड होकर लिखा जा रहा है।

यशवंत व्यास सलाहकार संपादक बने

अमर उजाला में दो-दो सलाहकार संपादक हुए : ग्रुप एडिटर रखने की गलती नहीं करेगा अमर उजाला : शशि शेखर के समय हुए प्रयोगों का फायदा हिंदुस्तान को मिल रहा, नुकसान अमर उजाला उठा रहा : भास्कर समूह की मैग्जीन अहा जिंदगी के संपादक पद से इस्तीफा देने वाले यशवंत व्यास के बारे में सूचना है कि उन्होंने अमर उजाला, नोएडा में ज्वाइन कर लिया है. उनका पद सलाहकार संपादक (न्यू इनीशिएटिव) का है. सूत्रों के मुताबिक नवरात्र के दौरान वे कामकाज शुरू कर देंगे. बताया जा रहा है कि यशवंत व्यास अमर उजाला के साथ काम करते हुए खुद के प्रोजेक्ट्स पर भी काम करेंगे, इसीलिए उन्होंने सलाहकार संपादक के रूप में ज्वाइन किया है. सूत्रों के मुताबिक यशवंत ने यही प्रस्ताव भास्कर समूह के सामने रखा था. वे भास्कर में सलाहकार के तौर पर काम करना चाहते थे.  

मैंने इस्तीफा नहीं दिया : यशवंत व्यास

अजय उपाध्याय ने भी अमर उजाला ज्वाइन करने की चर्चा को नकारा : उच्च पदस्थ सूत्र इन दोनों की ज्वायनिंग की संभावना जता रहे : प्रिंट मीडिया में इन दिनों दो-तीन चर्चाएं जोरों पर हैं. एक यह कि तेज-तर्रार पत्रकार यशवंत व्यास भास्कर को गुडबाय बोल अमर उजाला जा रहे हैं. भास्कर समूह की मैग्जीन ‘अहा जिंदगी’ के संपादक यशवंत व्यास को लेकर चर्चाएं व अफवाह भड़ास4मीडिया के पास काफी समय से पहुंच रही है पर कहीं से पुष्टि न हो पाने के कारण इनसे संबंधित किसी भी खबर का प्रकाशन नहीं किया गया. पिछले दो-दिनों से चर्चाओं में तेजी आने के चलते आज जब भड़ास4मीडिया ने यशवंत व्यास से संपर्क किया तो उन्होंने इस्तीफे की खबर और अमर उजाला जाने की चर्चाओं से पूरी तरह इनकार किया. उन्होंने इसे ‘बेकार की बात’ करार दिया. 

हिंदी मीडिया में टैलेंटेड लोग नहीं आ रहे

अजय उपाध्यायहमारा हीरोअजय उपाध्याय 

”दिल्ली में पूरे एक साल संघर्ष किया और दो-दो दिन भूखे रहा,  मेरे इतने ही विरोधी हैं जिन्हें मैं शायद अपनी उंगलियों पर आसानी से गिन सकता हूं, मैं एक ओपीनियन मैग्जीन हर प्लेटफार्म पर लांच करना चाहता हूं, जर्नलिज्म में सबसे बड़ी कमी ये है कि इसने राजनीति से अपना मुंह मोड़ लिया है, मार्केट के दबाव में कई बार कंटेंट भी री-डिफाइन हुआ है”