मैंने इस्तीफा नहीं दिया : यशवंत व्यास

अजय उपाध्याय ने भी अमर उजाला ज्वाइन करने की चर्चा को नकारा : उच्च पदस्थ सूत्र इन दोनों की ज्वायनिंग की संभावना जता रहे : प्रिंट मीडिया में इन दिनों दो-तीन चर्चाएं जोरों पर हैं. एक यह कि तेज-तर्रार पत्रकार यशवंत व्यास भास्कर को गुडबाय बोल अमर उजाला जा रहे हैं. भास्कर समूह की मैग्जीन ‘अहा जिंदगी’ के संपादक यशवंत व्यास को लेकर चर्चाएं व अफवाह भड़ास4मीडिया के पास काफी समय से पहुंच रही है पर कहीं से पुष्टि न हो पाने के कारण इनसे संबंधित किसी भी खबर का प्रकाशन नहीं किया गया. पिछले दो-दिनों से चर्चाओं में तेजी आने के चलते आज जब भड़ास4मीडिया ने यशवंत व्यास से संपर्क किया तो उन्होंने इस्तीफे की खबर और अमर उजाला जाने की चर्चाओं से पूरी तरह इनकार किया. उन्होंने इसे ‘बेकार की बात’ करार दिया. 

पर भास्कर से जुड़े कुछ उच्च पदस्थ सूत्र दावे के साथ कह रहे हैं कि यशवंत व्यास ने इस्तीफा दे दिया है और निकट भविष्य में किसी दूसरे अखबार में बड़े पद पर ज्वाइन कर सकते हैं. वहीं, कुछ लोग अमर उजाला में उनके ग्रुप एडिटर बनकर आने की बात कह रहे हैं तो अन्य कुछ लोग अमर उजाला में ही ग्रुप एडिटर की बजाय उन्हें कोई और बड़ी जिम्मेदारी सौंपे जाने की संभावना जता रहे हैं.

संभव है कि यशवंत व्यास ने इस्तीफे का नोटिस प्रबंधन को सौंप दिया हो और रिलीव होने तक इस्तीफे की सूचना व नई ज्वायनिंग के बारे में कोई खुलासा न कर रहे हों पर जब तक वे खुद या फिर भास्कर प्रबंधन की तरफ से इस्तीफे देने की बात को कोई कनफर्म नहीं करता, तब तक यही मानना चाहिए कि यशवंत व्यास कहीं नहीं जा रहे हैं और भास्कर समूह के साथ बने हुए हैं.

दूसरी चर्चा वरिष्ठ पत्रकार अजय उपाध्याय के बारे में फैली हुई है. उनके बारे में भी दो तरह की बातें कही जा रही है. एक तो यह कि वे अमर उजाला के ग्रुप एडिटर बन रहे हैं तो दूसरा यह कि वे अमर उजाला में ग्रुप संपादकीय सलाहकार की हैसियत से ज्वाइन करने वाले हैं. भड़ास4मीडिया से बातचीत में अजय उपाध्याय इन चर्चाओं को खारिज करते हैं और कहते हैं कि अगर कोई बात होगी तो वे बताने से नहीं हिचकेंगे.

ज्ञात हो कि मीडिया में कार्यरत वरिष्ठ लोग समय-समय पर दूसरे मीडिया हाउस के कर्ताधर्ताओं से मिलते रहते हैं. कई बार मामला सिर्फ औपचारिक परिचय और विचार-विमर्श के स्तर का होता है. पर उन मीडिया हाउसों में कार्यरत लोग दूसरे मीडिया हाउस के वरिष्ठ के अपने कर्ताधर्ता से मिलते देख चर्चा शुरू कर देते हैं और कयास लगाने लगते हैं. कई बार ये चर्चाएं, अफवाह और कयास वेब-ब्लाग संचालकों तक भी पहुंचा दिया जाता है. कई वेब-ब्लाग संचालक बिना संबंधित शख्स से बात किए ही कयासों को प्रकाशित कर बैठते हैं जिससे अफवाहों व चर्चाओं में तेजी की मात्रा और ज्यादा बढ़ जाती है. यशवंत व्यास और अजय उपाध्याय के मामले में भी यही हो रहा है.

सूत्रों का कहना है कि इन लोगों की अमर उजाला के निदेशक अतुल माहेश्वरी के साथ बैठक हो चुकी है. इन दोनों को अमर उजाला के नोएडा आफिस आते और अतुल माहेश्वरी से मिलते कुछ लोगों ने देखा, इसी के बाद से चर्चा ने जोर पकड़ लिया.  यशवंत व्यास और अजय उपाध्याय, दोनों ही वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि मीडिया में दूसरों से मिलना-जुलना एक सामान्य प्रक्रिया है और इसके आधार पर कोई कयास नहीं लगाया जाना चाहिए.

भड़ास4मीडिया की भी कोशिश रहती है कि अगर कोई चर्चा या अफवाह है तो वह जिस व्यक्ति से संबंधित हो, उससे सीधे बात कर ली जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए. इसी प्रक्रिया के तहत यशवंत व्यास और अजय उपाध्याय से भड़ास4मीडिया ने बात की और दोनों वरिष्ठों ने चर्चाओं व कयासों को नकारा है.

उधर, अमर उजाला और दैनिक भास्कर से जुड़े कई वरिष्ठों का नाम न छापने की शर्त पर कहना है कि बिना आग धुआं नहीं निकलता. कुछ न कुछ तो है. वैसे भी अमर उजाला में ग्रुप एडिटर का पद खाली है. संभव है इन वरिष्ठों से इसीलिए बातचीत चल रही हो. एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि कोई कुछ भी चर्चा करे या अफवाह फैलाए, जब तक संबंधित व्यक्ति या संस्थान खुद ज्वायनिंग की पुष्टि नहीं करता, तब तक किसी के नाम यूं ही अफवाह फैलाने से जिम्मेदार लोगों को बाज आना चाहिए.

तो ये है पूरी तस्वीर. देखिए, आगे होता है क्या. वैसे, इस पूरे मामले पर आप क्या सोचते हैं. अपनी सारगर्भित टिप्पणी जरूर दें.

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Comments on “मैंने इस्तीफा नहीं दिया : यशवंत व्यास

  • bhaiya ye kaam to aapne bahut achcha kiya. sari jankari de di. lekin yadi bhavishya me in dono me se koi bhi ek amar ujala join karta hai. to fir kya itne bade diggajon ki baaten suruati taur par jooth samajhni chaiye.

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  • KUMAR SAUVIR, mahuaa news, lucknow says:

    yeh dono he MAHARATHI patrakarita jagat me shreshthatam logo me se hae.
    In dono ki he taarkikta, sahajta, sahayog karne ka madda, aur aadmi ko shuruaati daur me hi pahchaan lene ka hausala apatim hae.
    ye mera vyaktigat anubhav hae ki ye dono hi hamesha tapaak se milte hae, jooth ya bahalaane ki liye nahi, balki ek baar mile shakhs ko hamesha yad rakhte hae. yah mera apna tajurba hae. kisi bhi akhbaar ko dhanya kar sakne ak bharpoor madda hae inme,
    KUMAR SAUVIR, MAHUAA NEWS, LUCKNOW
    kumarsauvir@yahoo.com

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  • gyanesh upadhyay says:

    bhadas ke shuru hone se chatur patrkaron ko bahut phayada hua hai. Jab vetan badhotari ka samay aata hai, Swayam aphwah Faila dee jaati hai ki falan patrakar falan jagah ja rahe hain. Ek to charcha ho jati hai, doosari or jahan kaam kar rahe hote hain wahan tankhwah badh jati hai, Dono hathon mey laddu rahta hai. Aam taur par aise aphwah dec-jan aur june-july mey udaai jaati hai.
    kai kabil patrakar to aise bhi hain jo ye tareeka apnakar lakhon ki tankhwah paa rahe hain,
    malikon ko bhi tabhi samajh mey aata hai ya we tabhi jagte hain jab kise patrkar ke jane ki aphwah udati hai.
    Isse chatur patrakaron ko apna market rate ya value ka bhi pata chal jata hai.

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