अपमानित ना होता तो खुद को पहचान नहीं पाता

अमर बड़े-बड़े आंदोलनों और बड़ी-बड़ी क्रान्तियों का जन्म अपमान की कोख से ही होता है. महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में अच्छे भले वकील थे और अपनी सफल वकालत की मजबूती के कारण प्रथम श्रेणी में यात्रा कर रहे थे, तभी किसी गोरे वर्ण के एक अंग्रेज ने उनके श्याम वर्ण पर टिप्पणी कर उन्हें फर्स्ट क्लास के डिब्बे से फिकवा दिया. फिर क्या था, रंगभेद के कारण हुए इस अपमान के विरुद्ध पिल पड़े गांधी जी ने अंग्रेज साम्राज्यवाद की चूलें भारत से उखाड़ फेंकी.

अमर सिंह की तीसरी कसम

अमर सिंह: अब किसी बेगानी शादी का अब्दुल्ला दीवाना न बनने की कसम खाई : पश्चाताप की आग में जल कर ‘पापों’ से मुक्ति पाने का सिलसिला जारी रखे हुए हैं अमर सिंह : अपने ब्लाग पर नई पोस्ट में वर्तमान जीवन दर्शन की गूढ़ बातें बताईं : बोले- बड़े लोगों में कभी निजी झगड़ा नहीं होता, सिर्फ महत्वाकांक्षाओं का टकराव होता है और इस ‘युद्ध’ में खुद-ब-खुद सेनापति बन जाते हैं मेरे जैसे अब्दुल्ला दीवाना टाइप लोग :