अन्‍ना का चेहरा देख छोड़ दिया भोजन

छात्र राजनीति में रहते हुए हम लोग अक्सर एक नारा लगाते थे..सत्ता के हम सभी दलाल, फिर भी भारत मां के लाल। उस वक्त जोश था, होश नहीं। अर्थ नहीं समझते थे। आज 21-22 वर्षों के बाद रामलीला मैदान में पहली बार टीवी स्क्रीन पर यह नारा लगाते हुए मैंने कुछ नौजवान भाइयों को देखा तो बरबस ही मुठ्ठियां भींच गईं।

एसपी के इन चिरकुट चेलों का दोगलापन

: कब तक एसपी का नाम ले-लेकर दोगले लोग अपने दाग को उजले कहते रहेंगे : सुरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ एस.पी. सिंह को यह देश जानता है। उन जैसा शानदार पत्रकार सौ-दो-सौ सालों में एक बार ही पैदा होता है। विलक्षण प्रतिभा के धनी एसपी ने रविवार को रविवार बनाया, आज तक को आज तक। इसके अलावा बहुत कुछ किया, जिस पर बाद में जिक्र। यहां जिक्र उनके चेलों का, जो आज की तारीख में विभिन्न मीडिया हाउसों में काम कर रहे हैं।

यह किस किस्म की बहस है हुजूर!

आनंद सिंह खबरिया चैनलों पर बहस देखना मेरा पसंदीदा शौक रहा है। इसे और हवा दी है एनडीटीवी इंडिया के प्राइम टाइम ने। यह 9 से 10 बजे (रात) में शायद सातों दिन आता है। मैं प्राइम टाइम डिबेट इसलिए देखता हूं क्योंकि प्रायः रोज ही मेरे पसंदीदा एंकर्स इसमें जुड़ते हैं। चाहे वो निधि कुलपति हों, रवीश या फिर अभिज्ञान प्रकाश। ये लोग बहस को एक दिशा देने वाले एंकर हैं। आप कड़े शब्द बोल कर इन्हें डायवर्ट नहीं कर सकते।

पूनम पांडे जैसों का नंगापन ज्‍यादा दिनों तक नहीं टिकता : नलिन रंजन

नलिन रंजन सिंह। यही है उनका पूरा नाम। आम्रपाली ग्रुप के बैनर तले बनी फिल्म गांधी टू हिटलर के हीरो और पटकथा लेखक। नई दिल्ली स्थित एनआरएआई इंस्टीट्यूट आफ मास कम्युनिकेशन के डायरेक्टर। रंगमंच से किशोरावस्था में ही जुड़े रहने वाले नलिन ने गांधी टू हिटलर यह सोच कर बनायी कि परदेस में भारत की जिस गरीबी को चित्रित कर लोग माल बटोरते रहे हैं, वह मिथ्या है। भारत, परदेश में भी गरीब नहीं है।

‘हम वतन’ के नए संपादक आरपी श्रीवास्तव, 14 पत्रकारों ने नई पारी शुरू की

भोपाल से प्रकाशित होने जा रहे अखबार ‘हम वतन’ के नए संपादक की नियुक्ति हो गई है. इनका नाम है रवि प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ आरपी श्रीवास्तव. पिछले 16 वर्षों से खुद का 16 पेज का अखबार ‘पंचायत पोस्ट’ निकाल रहे आरपी ने करियर की शुरुआत एक मैग्जीन से की थी. बाद में वे सहारा ग्रुप से जुड़ गए. सरल-सहज व्यक्तित्व वाले आरपी का खुद का अखबार ‘पंचायत पोस्ट’ ग्रामीण पत्रकारिता के लिए जाना जाता है.

पत्रकार आनंद को मातृशोक

बोकारो के पत्रकार आनंद सिंह की माता श्रीमती मनोरमा सिंह का पिछले दिनों निधन हो गया. वे 71 साल की थीं तथा दमा और मधुमेह से पीडि़त थीं. वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थीं. उनका इलाज बोकारों के एक हॉस्‍पीटल में चल रहा था. बीच में उनकी हालत ज्‍यादा खराब हो गई. उन्‍हें आठ दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया था. अथक प्रयास के बाद भी डाक्‍टर उन्‍हें बचाने में सफल नहीं हो सके.

हिंदुस्तान छोड़ आनंद ने पोर्टल लांच किया

हिंदुस्तान, वाराणसी में कार्यरत रहे आनंद सिंह ने लंबी छुट्टी के बाद अब संस्थान को गुडबाय बोल दिया है. उन्होंने नई पारी की शुरुआत वेब मीडिया के साथ की है. आनंद के संपादकत्व में पिछले दिनों खबर इंडिया डॉट कॉम पोर्टल लांच किया गया.