झूठे नाम से कमेंट लिखने वाले राघव, दम हो तो सामने आओ

यशवंत जी, ‘भास्कर का यह संपादक चापलूसों व चाटूकारों का पोषक है‘ शीर्षक से मेरे द्वारा लिखे गए आलेख पर मुझसे जुड़ी दो टिप्पणियां प्रकाशित हुई है। मैं इस पर अपना पक्ष भी रखने के साथ ही यह स्पष्ट करना चाहूंगा कि मेरे 21 साल के पत्रकारिता जीवन से जुड़े किसी भी मुद्दे पर कोई साथी चाहे तो मुझसे खुली बहस कर सकता है।अवनीश जैन के खिलाफ जो आरोप मैंने लगाए हैं उन पर मैं आज भी कायम हूं, इन्हें साबित करने का माद्दा रखता हूं और झूठे नामों से जो लोग सामने आ रहे हैं उनकी भी हकीकत जानता हूं। कृपया मेरे कमेंट को प्रकाशित करने का कष्ट करें।

भास्‍कर का यह संपादक चाटुकारों और चापलूसों का पोषक है

सुधीर अग्रवाल के बारे में एक बात विख्यात है और वह यह कि वे कोई भी निर्णय जल्दबाजी में नहीं लेते है लेकिन अवनीश जैन के मामले में उन्होंने बहुत देर कर दी और इसका खामियाजा अखबार को इंदौर में अपनी प्रतिष्ठा खोने के साथ ही एक अच्छी टीम से वंचित होने के रूप में भी चुकाना पड़ा। इसके पीछे कई कारण है पर सुधीरजी के प्रति आज भी वैसा ही सम्मान होने के कारण मैं उन तक नहीं जाना चाहूंगा।

सुधीर अग्रवाल को एक पत्रकार का अलविदा पत्र

अरविंद तिवारी, जो इंदौर में दैनिक भास्कर के आधार स्तंभ माने जाते थे, ने पिछले दिनों भास्कर छोड़ दिया। अरविंद राजनीतिक व प्रशासनिक क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखते थे। भास्कर में उन्होंने अनेक खबरें ब्रेक की। उनके भास्कर छोडऩे का बड़ा कारण इंदौर के संपादक अवनीश जैन से अनबन रहा। वे 1 जनवरी 2010 से भास्कर टीवी के संपादक के रूप में सेवाएं दे रहे थे। अब 1 मई से पत्रिका में नेक्सट टू एडीटर की भूमिका में समाचार समन्वयक का दायित्व संभाल रहे हैं।