अरविंद त्रिपाठी ने पुलिस के कंधे पर बंदूक रखकर पत्रकारों को निशाना बनाया है

कानपुर के वरिष्‍ठ पत्रकार अरविंद त्रिपाठी ने कुछ दिनों पूर्व दक्षिणी कानपुर के प‍त्रकारिता के बारे में एक खबर लिखी थी. खबर में बताया गया था कि किस तरह से कुछ पत्रकार खबर बनाने के लिए खेल करते रहते हैं. उनकी यह खबर अम्‍बरीश त्रिपाठी को ठीक नहीं लगी. उन्‍होंने इस खबर को आधी अधूरी बताते हुए इसे व्‍यक्तिगत खुन्‍नस निकालने के लिए लिखा गया लेख बताया. उन्‍होंने तफ्सील से पूरे घटनाक्रम को लिखा है, जिसे हूबहू प्रकाशित किया जा रहा है.- एडिटर

मीडिया की आड़ में क्लीनिक चलाता फर्जी सेक्सोलॉजिस्ट

अरविंद त्रिपाठी कानपुर में काकादेव क्षेत्र में लगातार दूसरी बार भारत गौरव पुरुस्कार प्राप्त देश के नंबर-1 सेक्सोलोजिस्ट होने का दावा करने वाले एक डॉक्टर के क्लीनिक पर 18 जुलाई को कानपुर के आला स्वास्थ्‍य अधिकारियों का छापा पड़ा.  डॉक्टर का क्लीनिक अवैध तरीके से चलाये जाने के कारण से सील कर दिया जाता है. डॉक्टर ने इसके बाद सफाई देते हुए एक प्रेस कांफ्रेंस की.

अपनों के ठुकराए इंद्र भूषण रस्‍तोगी किसे याद हैं?

: बदहाली में जीवन गुजारने को मजबूर है यह पूर्व संपादक :  ये इन्द्र भूषण रस्तोगी,  कोई गुमनामी बाबा नहीं हैं जो देश-भर में इनको कोई जानने वाला न हो. राजेश श्रीनेत जी के अमर उजाला, बरेली में सीनियर रह चुके श्री रस्तोगी देश भर में पत्रकारिता जगत खासकर संपादक मंडली में कभी परिचय के मोहताज नहीं रहे. उनका एक भरा-पूरा सम्पादकीय जीवन का इतिहास रहा है, यदि अभी भी उनके शेष जीवन का संरक्षण हो गया तो देश के भविष्य के निर्माण में इनका महत्वपूर्ण योगदान होगा.

मीडिया के दम पर भ्रष्टाचार से लड़ने में मारे गए गुलफाम

अरविंद देश-भर में चलने वाले भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना हजारे के आन्दोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और यश लूटने के लिए कानपुर के समाजसेवियों में भी होड़ चल रही है.वो चुके नहीं हैं ये बताने और जताने के लिए तरह-तरह के उपक्रम और उपाय किये जाते रहते हैं. कभी फटेहाल और आज मालामाल हो चुके इनके साथ अब जनता नहीं रही है. ये बात उनकी समझ में आ चुकी है. कुछ कालेज के छात्रों को साथ लेकर आन्दोलन चलाकर असफल हो चुके इन समाजसेवियों ने अब नया फंडा निकाला है.

कानपुर प्रेस क्लब पर भारी पड़ा “अन्नागिरी का इफेक्ट”

अरविंदजैसा कि माना जा रहा था “चौथा कोना” का धरना हो तो रहा था अन्ना हजारे के समर्थन में पर उसके परिणाम बहुत ही दूरगामी होने थे. ये आम चर्चा उस धरने में चलती रही थी. कानपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों के द्वारा पर्याप्त दूरी बनाए रखना ये बताने और जताने के लिए पर्याप्त था कि अब वो पत्रकार होने के बावजूद पत्रकारों के सवालों और बहस-मुबाहिसों से अपने मुह चुराने लगे हैं.

फर्जी पत्रकार ने कराई थी करन की हत्‍या

अरविंदआज कानपुर में 2009  में हुए बहुचर्चित और अनसुलझे करन माहेश्वरी ह्त्या-काण्ड के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर ही लिया गया. तीस हज़ार रुपयों के ईनामी अभिषेक अवस्थी को कानपुर के फूलबाग चौराहे के पास से उत्तर प्रदेश की पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स की टीम के द्वारा गिरफ्तार किया गया है.

कानपुर के मीडिया-कारों का नया कारनामा, पुलिस के मुखबिर बने

अरविंद अब अपने कानपुर शहर में भी देश-दुनिया में व्याप्त मीडिया की अच्छाइयां और बुराइयां आ चुकी हैं. इन्हीं में से एक हैं ‘खोजी पत्रकारिता’. इसे काफी हद तक सभी जगहों पर सराहा भी गया है. चाहे वो जूलियन असान्जे के विकीलीक्स के खुलासों का मामला हो या फिर हिन्दू अखबार के द्वारा टू-जी स्पेक्ट्रम का घोटाला देश के सामने लाने का सराहनीय प्रयास ही क्यों न हो. सभी के माध्यम से मानवता और कानून के रसूख को कायम करने का प्रयास किया गया है.