यश जी, वो ‘बकचोदी’ वाली बहस मैंने पढ़ी

यश जी, वो ‘बकचोदी’ वाली बहस मैंने पढ़ी. एक आडियो फाइल भेज रहा हूं. ज़रा सुनिए. TIMESNOW पे एक बहस हुई थी, जैतापुर, महाराष्ट्र , में बनने वाले आणविक रिएक्टर पे. नेट लिंक है  http://www.timesnow.tv/Debate-Row-over-Nuke-project-1/videoshow/4361419.cms इसमें भारत के, DRDO के पूर्व निदेशक K. Santhanam बात करते-करते उत्तेजित हो जाते हैं, और कहते है…. ”..our coal is low grade, our hydroelectricity potential has been nearly exhauted, than what do we do SCRATCH OUR BALLS..”

क्या ‘बकचोदी’ वाकई बुरा शब्द है?

एचटी के सीईओ राजीव वर्मा के नए साल के संदेश को प्रकाशित करने के साथ मैंने अपनी जो टिप्पणी लिखी, उससे कुछ लोग आहत हैं. वे आहत इस बात से हैं कि मैंने ‘बकचोदी’ और ‘बौद्धिक मैथुन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों कर दिया. अंग्रेजी के एक पत्रकार साथी अश्विनी भटनागर ने और एक किन्हीं महेंद्र कुमार ने अपनी तल्ख टिप्पणी इस पोस्ट पर दी. अश्विनी ने ‘बकचोदी’ और ‘बौद्धिक मैथुन’ जैसे शब्द हटाने का अनुरोध किया जबकि कथित महेंद्र कुमार ने तो मुझे इतना भला-बुरा कहा है कि पढ़कर लगा कि अगर मैं उनके सामने होऊं तो वे मुझे गोली मार दें. खैर, जाके रही भावना जैसी. राजू नाम से एक साथी ने टिप्पणी की है कि उन्हें राजीव वर्मा के पत्र में कुछ गलत समझ में नहीं आया. मैं पहले अश्विनी, महेंद्र और राजू के प्रकाशित कमेंट को नीचे फिर प्रकाशित कर रहा हूं, फिर उसके बाद अपनी बात रखूंगा.