पैसे मांगने वाले पत्रकारों की शिकायत करेंगे नेता

पटना में सभी दलों के नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में पेड न्यूज के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई. इन लोगों ने संकल्प लिया कि वे घोषित या दबे-छिपे किसी भी रूप में खबरों के व्यापार में शामिल नहीं होंगे. नेताओं की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति इस प्रकार है- ”हम सभी राजनीतिक एक स्वर में पेड न्यूज़ (ख़बरों की ख़रीद-बिक्री) का विरोध करते हैं। हम मानते हैं कि पेड न्यूज़ के कारोबार ने हाल के वर्षों में विकराल रूप धारण कर लिया है और ये समूची लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ख़तरा बनता जा रहा है। चुनाव के समय ये प्रवृत्ति ख़ास तौर पर सबसे विकृत रूप में सामने आती है जब कुछ मीडिया संस्थान कई तरह से दबाव बनाकर धन वसूली करने लगते हैं। इससे चुनावी प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित होती है, क्योंकि जो प्रत्याशी या दल धन नहीं देते उन्हें या तो वाजिब कवरेज से भी वंचित कर दिया जाता है या फिर उनके विरूद्ध अनर्गल प्रचार शुरू कर दिया जाता है। पेड न्यूज़ की वजह से चुनाव में धनबल का प्रभाव भी बढ़ता है जो कि निष्पक्ष चुनाव की भावना के ख़िलाफ़ है। पेड न्यूज़ को रोकने के लिए चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए क़दमों का हम सभी दल स्वागत करते हैं। हम वचन देते हैं कि इस मामले में उसे हमसे जिस तरह के सहयोग की आवश्यकता होगी हम देंगे।

बज गया बिगुल

गिरीश मिश्रबिहार का आगामी विधानसभाई चुनाव क्या जातियों का पारंपारिक व्यूहचक्र तोड़ रहा है? चुनावी शतरंज पर जातियों की बिसात क्या नई शक्ल अख्तियार कर रही है? क्या जातियों का नया गठजोड़ अब सिर्फ जातीय संदर्भ में न होकर सुशासन, विकास और शांति-व्यवस्था के नए पैमाने पर भी निर्मित होगा, जिसकी संरचना कुछ-कुछ वर्गीय होगी? क्या ऐसे अनेक सवाल बिहार को एक नए खांचे में वाकई बांट रहे हैं या फिर एक तबके द्वारा इसे एक नए चश्मे से देखने-दिखाने का प्रयास भर है?