क्या किसी लड़की के साथ इससे भी ज्यादा बुरा हो सकता है!

मीडिया से सीधे तौर पर जुड़ने के बाद रेप, मर्डर, चोरी, धोखाधड़ी की खबरें बहुत ज्यादा चौंकाती नहीं हैं। कन्ट्रोल रूम में बैठकर हर रोज ऐसी ही बातें सुनने, लिखने और बांचने लगी हूं। कभी 70 साल की वृद्धा के साथ बलात्कार.. फिर लूट तो कभी 2 साल की मासूम के साथ रेप के बाद कत्ल। कभी कुछ तो कभी कुछ… पहले अफेयर वर्ड सुनकर भी कान खड़े हो जाते थे पर अब तेजाब फेंकने की घटना भी कॉमन लगने लगी है…

इसका मतलब ये नहीं कि भावनाशून्य हो गई हूं… बस ये कि कानों को अब ये सबकुछ नया नहीं लगता। लेकिन कल जो कुछ पढ़ा… उससे दिल दहल गया। सदमा भी कहूं तो सच ही होगा क्योंकि पूरे दिन उसी के बारे में सोचती रही… कुछ फंसा सा हो जैसे….। इससे पहले ऐसा प्रेमचन्द की कहानियां पढ़कर ही होता था कि शब्द चित्र बनकर तैरने लगते थे लेकिन इस लड़की की कहानी पढ़कर भी वैसा ही हुआ।

16-17 साल की एक लड़की की कहानी है… सिर्फ कहानी नहीं दर्द और हैवानियत बयान करने वाली कहानी है। एक लड़की..44 दिन… और सोच से परे की यातना….। हिन्दू धर्म में स्वर्ग और नरक की मान्यता है कि स्वर्ग सुख का तो नरक दुख और तकलीफों का घर माना जाता है.. जहां प्रताणित किया जाता है… शायद ये सब कुछ काल्पनिक हो लेकिन नरक की कल्पना इस कहानी से सच लगने लगती है….

Junko Furuta. The girl who went through 44 days of torture.

DAY 1: November 22, 1988: Kidnapped Kept captive in house, and posed as one of boy’s girlfriend. Raped (over 400 times in total). Forced to call her parents and tell them she had run away Starved and malnutritioned. Fed cockroaches to eat and urine to drink. Forced to masturbate. Forced to strip in front of others. Burned with cigarette lighters. Foreign objects inserted into her vagina/anus.

DAY 11: December 1, 1988: Severely beat up countless times. Face held against concrete ground and jumped on. Hands tied to ceiling and body used as a punching bag. Nose filled with so much blood that she can only breath through her mouth. Dumbbells dropped onto her stomach. Vomited when tried to drink water (her stomach couldn’t accept it). Tried to escape and punished by cigarette burning on arms. Flammable liquid poured on her feet and legs, then lit on fire. Bottle inserted into her anus, causing injury.

DAY 20: December10, 1989: Unable to walk properly due to severe leg burns. Beat with bamboo sticks. Fireworks inserted into anus and lit. Hands smashed by weights and fingernails cracked. Beaten with golf club. Cigarettes inserted into vagina. Beaten with iron rods repeatedly. Winter; forced outside to sleep in balcony. Skewers of grilled chicken inserted into her vagina and anus, causing bleeding.

DAY 30: Hot wax dripped onto face. Eyelids burned by cigarette lighter. Stabbed with sewing needles in chest area. Left nipple cut and destroyed with pliers. Hot light bulb inserted into her vagina. Heavy bleeding from vagina due to scissors insertion. Unable to urinate properly. Injuries were so severe that it took over an hour for her to crawl downstairs and use the bathroom. Eardrums severely damaged. Extreme reduced brain size.

DAY 40: Begged her torturers to “kill her and get it over with”

संबंधित घटनाक्रम की गवाही देतीं कुछ तस्वीरें

January 1, 1989: Junko greets the New Years Day alone. Body mutilated. Unable to move from the ground.

DAY 44: January 4, 1989: The four boys beat her mutilated body with an iron barbell, using a loss at the game of Mah-jongg as a pretext. She is profusely bleeding from her mouth and nose. They put a candle’s flame to her face and eyes.

Then, lighter fluid was poured onto her legs, arms, face and stomach, and then lit on fire. This final torture lasted for a time of two hours. Junko Furuta died later that day, in pain and alone. Nothing could compare 44 days of suffering she had to go through.

When her mother heard the news and details of what had happened to her daughter, she fainted. She had to undergo a psychiatric outpatient treatment. Imagine her endless pain. Her killers are now free men. Justice was never served, not even after 20 years. They deserve a punishment much greater than they had put upon Furuta, for putting an innocent girl through the most unbearable suffering.

ये बस एक सारांश भर है…कहानी से जुड़ी बहुत सी बातें इण्टरनेट पर हैं…। खुद एक लड़की हूं… शायद इसीलिए जुंको की तकलीफ को खुद के ज्यादा करीब महसूस कर रही हूं… लेकिन शायद इसे पढ़ने के बाद आप भी कुछ वैसा ही दर्द महसूस कर रहे होंगे। घर पर पापा को नहीं पढ़ाया ये सब, क्योंकि वैसे ही बाप अपनी बेटियों की चिंता से कभी बाहर निकल पाते… ऐसे में ये सब पढ़कर कहीं न कहीं ये डर और बढ़ ही जाएगा… सच कहूं तो खुद भी थोड़ा डर गई हूं कि जो जुंको के साथ हुआ वो मेरे साथ भी तो हो सकता है या मेरे किसी जानने वाले के साथ…या आपके साथ..आपके घर में…।

अक्सर बड़ों को कहते सुना है कि कोई लड़की को तब तक परेशान नहीं कर सकता.. जब तक वो खुद ना चाहे… लेकिन सोचिए तो कितनी सच्चाई है इसमें…? समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है… हर दूसरे इलाके में कॉलेज खुल रहे हैं.. पर क्या फायदा अगर सोच का स्तर इतना गिरता जाए तो…। हालांकि ये कहानी जापान की है पर अपने देश में ऐसी कितनी जुंको होंगी… जो आज भी यही सब सह रही होंगी.. आज तरह-तरह के आन्दोलन हो रहे हैं.. महंगाई के खिलाफ, भ्रष्टाचार के खिलाफ… एक आनदोलन और भी होना चाहिए.. समाज में व्याप्त असभ्यता के खिलाफ….।

भूमिका राय पत्रकार व ब्‍लॉगर हैं. नवाबों के शहर में पत्रकारिता कर रही हैं. यह लेख उनके ब्लाग बतकुचनी से साभार लेकर प्रकाशित किया जा रहा है.

छात्रा का अश्लील एमएमएस बना दोस्तों में बांट दिया

: बरेली में हुआ शर्मनाक हादसा, सकते में है शहर : ब्लूटूथ के जरिये कई मोबाइल तक पहुंची क्लिपिंग : बहेडी थाने में दर्ज की गयी वारदात की एफआईआर : साजिश में एक महिला समेत दो करीबी भी शामिल : अमन का शहर माने जाने वाले बरेली का चेहरा इस बार अपनी ही करतूतों के चलते बुरी तरह काला हो गया। एक युवती की मदद करने के बहाने उसका अपहरण किया गया फिर उसे एक मकान में ले जाकर उसके साथ जबर्दस्ती की गयी।

विरोध करने पर युवती को बेहोशी की दवा सुंघा कर उसका अश्लील एमएमएस बना डाला। बाद में एमएमएस को ब्लूटूथ के जरिये अन्य मोबाइलों तक रवाना कर दिया। साजिश में एक नकाबपोश महिला भी शामिल थी और यह सभी लोग पीड़ित युवती के परिचित थे। यह वारदात यूपी के बरेली के एक कस्बे में हुई। पुलिस अब मामले की छानबीन में जुट गयी है। बरेली के एस.पी.सिटी ऑफिस में चहरे को नकाब से छुपाये इस युवती ने अपने साथ हुए हादसे का खुलासा किया।

देवरनियां कस्बे की रहने वाली नजमा (काल्पनिक नाम) आईटीआई की छात्रा है। नजमा देवरनियां से बरेली शहर के इज्जतनगर तक ट्रेन से और फिर वहां से टेंपो से आईटीआई तक पढाई करने जाती है। शनिवार को भी वह रोजाना की ही तरह इज्जतनगर स्टेशन के पास बाईपास मोड़ पर टेंपो का इंतजार कर रही थी। उसी दौरान छात्रा के पास एक कार रुकी, उसमें दो युवक और एक युवती थे। कार चलाने वाला देवरनियां का ही रहने वाला राशिद था जो पास के ही एक मोबाइल टावर पर गार्ड की नौकरी करता है। जबकि पीछे एक और युवक रशीद था और उसके साथ एक नकाबपोश युवती भी बैठी थी। पीछे बैठे युवक ने कार का पिछला दरवाजा खोलकर उसे साथ ले जाने का निमंत्रण देते हुए नजमा से कहा कि वे लोग आईटीआई की तरफ जा रहे हैं, उसे रास्ते में छोड़ देंगे।

चूंकि यह लोग नजमा और उसके परिजनों के परिचित थे, इसलिए वह उनके साथ बैठ गई। लेकिन जब कार आईटीआई के बजाय दूसरी ओर जाने लगी तो छात्रा को शक हुआ और उसने विरोध शरू कर दिया। विरोध बढने पर युवक ने नजमा के मुंह पर बेहोशी की दवा से भीगा रुमाल लगाकर उसे बेहोश कर दिया। नजमा को कुछ देर बाद होश आया तो वह एक कमरे में थी। यह कमरा कहां था, नजमा नहीं जानती। कमरे में उसने राशिद और शादाब को पाया, लेकिन कार में उसके साथ बैठी युवती नहीं थी। दोनों ही दरिंदों ने उसके साथ अश्लील हरकतें की और बना डाली उसकी अश्लील क्लिपिंग।

इस हादसे के बाद से नजमा बेहद सहमी हुई थी। मुन्ना (लड़की के पिता का बदला हुआ नाम) का कहना है कि राशिद और शादाब ने जब अपने दोस्तों में क्लिपिंग बांट दी तो मामले का खुलासा हुआ। यह क्लिपिंग घूमते हुए छात्रा के घरवालों तक पहुंच गई। तब इस छात्रा की अस्मत के लुटेरों की करतूत के बारे में परिवारवालों को पता चला। एक दोस्त के जरिए छात्रा के भाई तक वह क्लिपिंग पहुंच गई। तब नजमा के भाई ने घर बताया और फिर मां-बाप ने नजमा से पूछताछ की। इस पर उसने पूरी घटना बताई जिसके बाद परिजनों ने बिना देर किये पुलिस में दोनों आरोपितों की शिकायत की।

एसपी सिटी अतुल सक्सेना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस वारदात में बहेड़ी पुलिस को एफआईआर दर्ज करने और आरोपितों की तत्काल गिरफ्तारी का आदेश दिया है। उधर इस जघन्य कांड के आरोपित फिलहाल फरार हैं। लेकिन पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिशें दे रही है। नजमा, उसके परिवारीजनों और पुलिस के सामने सबसे बड़ी समस्या और चिंता का विषय है युवकों द्वारा अश्लील क्लिपिंग को ब्लूटुथ के जरिए अपने दोस्तों में बांट देना।

अतियों को जीता एक न्यूज चैनल

एक ऐसा न्यूज चैनल जिसमें सुबह और शाम डेढ़-डेढ़ घंटे गुरुद्वारा से सीधा प्रसारण होता है, गुरुवाणी का. ऐसा इसलिए क्योंकि ये मालिकों का आदेश है. इस आदेश का पालन राहुल देव ने भी किया और अनुरंजन झा भी कर रहे हैं. आजकल की पत्रकारिता में मालिक ऐसा प्राणी होता है जो सारे महान महान संपादकों के लिए आदरणीय और भाई साहब और चेयरमैन सर या एमडी सर होता है.

बाकी दुनिया में चाहें जितने ऐब या गुण हों लेकिन मालिक में कोई ऐब-कमी की गुंजाइश नहीं क्योंकि मालिक मालिक होता है और मालिक इसलिए मालिक होता है क्योंकि वो लाखों रुपये और ढेर सारे सुख हमें देता है. वो चाहे सहारा हो या सीएनईबी, पी7न्यूज हो या इंडिया न्यूज, हर जगह चेयरमैन सर सर्वोच्च होते हैं. हर जगह मदर कंपनी अपनी असली मां से सगी होती है कर्मियों के लिए. और इन इन कंपनियों में काम करने वाले लोग अपनी मदर कंपनीज के खिलाफ कुछ नहीं सुनना चाहते. अन्ना हजारे में, प्रशांत भूषण में लाखों गुण दोष ये लोग निकालेंगे लेकिन अपनी अपनी कंपनीज के फ्राड, अपने अपने चेयरमैनों के फ्राड पर आंख मूंदे रहेंगे.

बात कुछ और कर रहा था और लिख कुछ और गया. लेकिन मुद्दा यही है कि मालिक ने कह दिया तो कह दिया. सीएनईबी के मालिक पंजाबी हैं. उनका अरबों खरबों का कारोबार है और सीएनईबी पर जो इनवेस्टमेंट है वो कारोबार से होने वाले मुनाफे में चुटकी बराबर है. सीएनईबी उनके लिए किसी आध्यात्मिक शांति की तरह है. इसीलिए इन मालिकों ने राहुल देव के जमाने में राहुल देव से कह रखा था कि क्राइम की खबर, अपराध की खबर न दिखाइए और सुबह शाम नियम से गुरुद्वारे की गुरुवाणी का सीधा प्रसारण करवाइए. राहुल देव मालिकों के आदेश को अच्छे शब्दों में ढालकर तार्किक तरीके से पेश करने की कला में माहिर हैं. उन्होंने मालिकों की इस उदारता को पत्रकारिता से कनेक्ट कर सीएनईबी को एनडीटीवी जैसा बता डाला.

खैर, सीएनईबी कभी एनडीटीवी तो बन नहीं पाया लेकिन हां इतना जरूर हुआ कि चैनल की बची-खुची साख खत्म होने लगी और चैनल से जुड़े प्रमुख लोग एक एक कर अलविदा कहते गए. अचानक अनुरंजन झा परिदृश्य में आए. छंटनी, इनक्रीमेंट, रंगरोगन, लेआउट-कलेवर, कंटेंट, विजन, लोगो, टीम… सभी में बदलाव की घोषणा की और सबको एक एक कर बदल डाला. अब जिस तरह का सीएनईबी सामने आया है, वो कितना अच्छा-बुरा है, ये तो नहीं पता लेकिन हां, पिछले कुछ दिनों तक चैनल देखने के बाद लगने लगा है कि ये चैनल अतियों को जीता है.

मतलब ये कि सुबह-शाम गुरुवाणी का सीधा प्रसारण और आधी रात को सेक्स समस्याओं का निराकरण. कोई डाक्टर जैन हैं जो सेक्सोलाजिस्ट हैं वह आधी रात में लिंग और योनि की सभी समस्याओं को एंकर के श्रीमुख से सुनते हैं और उसका मौखिक समाधान पेश करते हैं. सेक्स समस्याओं का प्रोग्राम आना चाहिए टीवी पर. अखबारों में भी इसे प्रकाशित होना चाहिए. मैं तो इसके पक्षधर हूं. हालांकि भारतीय परंपरा को हर बात पर सामने रखने वाले लोग कह सकते हैं कि सेक्स समस्याओं पर खुलेआम चर्चा नहीं होनी चाहिए क्योंकि बच्चों पर गलत असर पड़ सकता है लेकिन आधी रात को न्यूज चैनल पर सेक्स समस्याएं तो दिखाई ही जा सकती हैं.

पर सवाल ये भी है कि अपराध की खबरें न दिखाने वाले चैनल पर घनघोर सेक्सी सवाल जवाब आधी रात को भी कितना उचित है. लगता है कि सीएनईबी के मालिकों को भी सेक्स समस्याओं वाले कार्यक्रम में अच्छी खासी रुचि है तभी तो वे शाम को जनता को गुरुवाणी सुनाने के बाद देर रात को गुप्तांगवाणी सुनाने वाले कार्यक्रम को प्रसारित करा रहे हैं. मैं इन दो अतियों वाले कार्यक्रम को लेकर संशय में हूं कि इन्हें अच्छा कहूं या बुरा. हां, लेकिन ये अटपटा जरूर लगता है कि शाम के वक्त गुरुवाणी और रात के वक्त सेक्स समस्याएं. है न कंट्रास्ट. और, ये कंट्रास्ट ही किसी को भीड़ से अलग बनाता है. तो कह सकते हैं कि अनुरंजन झा ने सीएनईबी को कुछ अलग बना दिया है.

”यशवंत, ऐसे सेक्स की पैरोकारी पर अपना इरादा स्पष्ट करो”

”जेएनयू में सेक्स….” शीर्षक से लिखे मेरे लेख पर कई लोगों के कमेंट आए हैं. मैं कुछ उन कमेंट्स का जवाब देना चाहूंगा जिन्होंने मेरे लिखे पर गंभीर आपत्ति जताई और इसके एवज में अपने तर्क पेश किए हैं. इनमें से खासकर 4 कमेंट्स को प्रकाशित करूंगा और इन चारों के सामने अपना पक्ष रखूंगा. ये चार कमेंट्स देने वालों के नाम हैं- श्रीवास्तव एस., अखिलेश, कबीर और प्रकाश. अपना पक्ष रखने से पहले इन चारों लोगों को थैंक्यू कहूंगा कि इन लोगों ने अपनी बात रखने का साहस किया.

पहले इन चारों कमेंट्स को एक-एक कर फिर से पढ़ लें, जो इस प्रकार हैं…

shrivastav.s : यशवंत! पत्रकार हो, सो इतने नादान तो नहीं ही होओगे कि तस्वीरों की भाषा को न समझो। लेकिन, किसी की मशा भांप सको, इतने इनलाइटेंड भी नहीं हो। तुम लिख रहे हो कि ब्लू फिल्म बना रहे छात्र-छात्रा की मंशा पेशेवर पोर्नस्टार बनने की नहीं थी अथवा वे कोई सेक्स रैकेट चला रहे हो, ऐसा नहीं लगता। समझदार आदमी, तुम्हारे दावे के पक्ष में सुबूत क्या है। विद्या के मंदिर में कुकृत्य करते वे तुम्हें बड़े मानवीय और सहज लग रहे हैं, तो तनिक यह बताओ, चोर-डकैत-हत्यारे किसी वारदात को क्या असहज होकर अंजाम दे सकते हैं। हर माहिर आदमी अपनी फील्ड में सहज होकर ही काम करता है। तुम कह कैसे सकते हो कि यह सेक्स रैकेट नहीं है। वीडियो आटोमोटिव कैमरे से शूट किया गया है, या किसी थर्ड पर्सन ने किया है, जरा बताओगे। ​ तुम कह रहे हो, ​हगना, खाना, मूतना, संभोग करना, सांस लेना, सोना…. सारी जिंदगी हम हगने-मूतने-संभोगने-खाने को ही अंतिम लक्ष्य मानकर जीते रह जाते हैं और मरते हुए पाते हैं कि हम अब तक जिए क्यों थे?)​ ​जरा बताओ तो, तुमने जिंदगी का कौन सा लक्ष्य शर किया है। शब्दों-शब्दों में परमहंस बनने चले हो। ​​​तुम और कुछ नहीं, एक सवाल का जवाब दो, ​रसोई घर में हगोगे तो खाना कहां और कैसे खाओगे। पुराने जमाने में, जब आदमी के पास साधन कम थे, टट्टी करके उसपर राख डाल देता था, ताकि संक्रामक रोग न फैले। तुम चाहते हो, नई पीढ़ी सरेराह हगकर उसे शरीर में लपेट कर घूमे? यह बेशर्मी ही नहीं होगी, बल्कि महामारी भी फैलाएगी। सेक्स ​में मौज किसको न आएगी, पर हर लड़की जिस दिन नंगी होगी, हर युवक उत्तेजित होगा, उस दिन ब्लूफिल्म नहीं बनेगी। हर गली-चौराहा सेक्स का अड्डा होगा। तुम्हारी भाषा में इसे वेश्यावृत्ति नहीं कहा जा सकता, लेकिन तब कहने-न कहने की जरूरत ही नहीं रह जाएगी। जो कार्य तुम्हें बड़े प्राकृतिक समझ आ रहे हैं, वे तो पशु भी करते हैं। तो फिर तुम हो क्या। बुद्धिमान पशु, या बुद्धिहीन मनुष्य। यह मत समझना कि मै ​तुम्हारी पीड़ा समझ नहीं रहा हूं। सच तो यह है कि तुम उपचार गलत कर रहे हो। समर्थन व्यक्ति उसी का करता है, जिसमें खुद इंट्रेस्टेड होता है। अपना इरादा स्पष्ट करो। ​ ​जिनके नक्शे को फॉलो करने की कोशिश कर रहे हो, वे ही रजनीश बोले तो ओशो, एक गलती कर जीवन भर पछताए। संभोग से समाधि का प्रलाप किया, तो उनके चेले-चांटी जुट गए। समाधि तो भूल गई, सम्भोग में ही डूबे पड़े हैं और जमकर मौज कर रहे हैं। गुरु भी धन्य हो गया, चेले भी। उम्मीद करता हूं, गलत चीज की फर्जी पैरवी बंद करोगे। दो-चार-दस, जितने भी इस ब्लाग के पाठक हैं, उनको बरगलाने का प्रयास नहीं ही करोगे।

akhilesh : tab to bhaiya swami Nityanand ka kaya kasoor. Unhone kaya galat kiya. Mathura me ek Tathakathit sanyasi apni biwi ka blue film banata hai, Uska kaya kasoor. Ummid hai yashwant, In Mahapurusho ka bhi aap naitik samarthan denge.

kabeer : yashwant ji, ladki aapki beti hoti to? kya aapki patrakarita isi tarah ubaal marti. imaandari se likhiyega.

prakash : अरे भाई साहब, आपने भी तो हिट के लिए क्या शब्दों की चासनी में लड़की की इज्जत बेंच दी। क्या आपको नहीं लगता कि आपको कम से कम इस खबर से दूर रहना चाहिए था। आपने फोटो फीचर बनाकर कौन सा सामाजिक सरोकार दिखाया है।

उपरोक्त चारों लोगों को उनकी टिप्पणियों पर मेरा जवाब इस प्रकार है–

श्रीवास्तव एस. जी को जवाब- विद्या के मंदिर में रहने वाले छात्र-छात्राएं बच्चे नहीं होते. वे जवान हो चुके होते हैं और जवान युवक-युवती सबसे ज्यादा सेक्स आग्रही होते हैं. इसी कारण प्राचीन काल से ही विद्या के मंदिरों में युवतियों के अभाव में युवकों में गे रिलेशन बना करते थे. देश के किसी भी पुरुष हास्टल को खंगाल लीजिए. आपको कई गे रिश्ते मिल जाएंगे. मैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के हास्टलों में रहा हूं. मैं कई युवकों को जानता था, या उनके बारे में सुनता था, कि वे जो दो-दो लोग एक ही हास्टल में रुम पार्टनर बनकर रहते हैं, आपस में शारीरिक संबंध स्थापित करते हैं. साथ ब्लू फिल्म देखते हैं. ब्लू फिल्म तो इन हास्टलों के छात्र सामूहिक तौर पर देखा करते हैं. तब चंदा मंगाकर सीडी व सीडी प्लेयर को मंगाने का काम हुआ करता था और ब्लू फिल्मों का सामूहिक प्रदर्शन होता था, हास्टल के कामन हाल में. और यह रुटीन हुआ करता था. कोई चूं चपड़ नहीं करता था. सब इसे रुटीन मानते थे. कई लड़के प्रयोग करने शहर के कोठों पर पहुंच जाया करते थे. तब सीडी व सीडी प्लेयर हुआ करते थे. अब मोबाइल व लैपटाप हैं. जिन विश्वविद्यालयों में युवक-युवतियों को साथ रहने या एक दूसरे के हास्टल में दिनदहाड़े आने-जाने की सुविधा है, वहां ये लड़की-लड़की आपस में शारीरिक संपर्क बनाते हैं. और फिर ऐसे अलग अलग हो जाते हैं जैसे कुछ हुआ ही न हो. कई दुस्साहसी युवक-युवती अपने रिश्ते का सरेआम इजहार किया करते थे. और ज्यादातर आपस में शादी कर लिया करते थे. जिनके घरों की ओर से ज्यादा पाबंदी लगा करती थे, वे शादी तो नहीं कर पाते थे लेकिन अपने रिश्ते बनाए रखते थे और हास्टल से बाहर जाने के दौरान एक दूसरे को अलविदा कहते थे. और यह सब अब ज्यादा होता है. इसलिए विद्या के मंदिर में सेक्स करना कोई कुकृत्य नहीं, एक सहज परिघटना है और यह वाकई बेहद सहज और मानवीय है. अब अगर कोई दुस्साहसी युवक युवती आपसी सहमति से अपने शारीरिक रिश्ते के क्षण को फिल्मा भी रहे हों तो इसे सुपर स्पेशल केस भले मान लें, लेकिन यह कामन केसेज से अलग नहीं हो जाता. फिल्माने की सुविधा तब आसानी से उपलब्ध नहीं थी. अब आसानी से उपलब्ध है इसलिए मोबाइल से एमएमएस बन जा रहे हैं और वेब कैम से या हैंडीकैम से सीडी तैयार हो जा रही है. चोर-डकैत-हत्यारे जो करते हैं वो सहज नहीं होता क्योंकि वो खाने-पीने-हगने-मूतने-संभोग करने से अलग कृत्य है और वे जान बूझकर इरादतन दूसरों की संपत्ति पर डाका डालते हैं. इसे भी उन जगहों पर जायज माना जाता है जहां अभाव, गरीबी और भूख के चलते यह कृत्य किया जाता है. क्योंकि जब आपका सिस्टम धन को कुछ लोगों तक केंद्रित कर देता है और भुखमरों की तादात बढ़ती जाती है तो नतीजे में जो अराजकता, चोरी, डकैती, हत्या की घटनाएं होती हैं, उसका स्थायी इलाज पुलिस प्रशासन नहीं कर सकता, उसका स्थायी समाधान नीतियों को बनाकर किया जाता है ताकि पैसा और साधन समाज के अंतिम आदमी तक पहुंच सके. जेएनयू वाले लड़की लड़के अगर सेक्स रैकेट चला रहे होते तो शायद उनमें से कोई जेएनयू में नहीं होता, और जाने कबके पुलिस के हत्थे चढ़ गए होते क्योंकि सेक्स रैकेट संचालित करने वाला आदमी बहुत देर तक पढ़ाई नहीं कर सकता. ज्यादा पैसे का अचानक आने लगना उसे कृत्य को बड़े पैमाने पर संचालित और प्रसारित करने पर मजबूर करता. वीडियो किसी थर्ड पर्सन ने ही शूट किया हो तो क्या, वो भी तो उनका मित्र रहा होगा और उनकी सहमति आपस में थी, कोई मजबूर करके किसी को नहीं लाया था. और वे लोग सेक्स किसी चौराहे, गली या पब्लिक प्लेस पर नहीं, जैसा कि आप लिख रहे हैं, अपने बंद कमरे में कर रहे थे. इसलिए यह अपराध नहीं. मित्र दिक्कत यही है कि पशु को जब इच्छा होती है तो उनकी इच्छा भी शांत हो जाती है क्योंकि उन्हें सब कुछ सहज उपलब्ध है. पर मनुष्य ने सेक्स को ऐसा भयानक बाजार बना दिया है कि पूरा माहौल वैसे तो सेक्सी सेक्सी है लेकिन जब कोई संवेदनशील व संकोची युवा असल सेक्स तलाशने निकलेगा तो उसे हाथ कुछ न लगेगा, बल्कि कह सकते हैं कि उसका हाथ ही उसे हाथ लगेगा. वेश्यावृत्ति दबाने-मना करने-प्रतिबंध लगाने से फैलती है. जो चीज सहज उपलब्ध हो जाए और सहज उपलब्धता के बाद की परिघटना में किसी किस्म की आशंका या भय न हो तो यकीन मानिए वेश्यावृत्ति की दुकान बंद हो जाएगी. मेरा इरादा आपने पूछा है तो मैं तो अपने इरादे लगातार अभिव्यक्त करता जाता हूं, लेकिन आपने यह नहीं बताया कि आपके सेक्सुअल जीवन की क्या कहानी है. क्या आप लिंग-योनि विहीन हैं या कभी किसी के साथ सेक्स किया है. अगर सेक्स किया है, इस सेक्सी माहौल में सेक्स को फैंटेसाइज करते हैं तो आपके मन-मस्तिष्क हर रात मन ही मन कई तरह के पाप कर रहा होगा. पर इसे आप कुबूलेंगे नहीं कि क्योंकि आदमी जब सच को कुबूल लेता है तो वो आदमी नहीं, देवता हो जाता है. हम आदमियों की नियति है कि हम ढोंगी व पाखंडी होते हैं इसलिए दूसरों को लेक्चर देने सबसे पहले चले आते हैं, अपने घरों के पाप-पुण्य को ढंक-छिपा कर. आपके आखिरी बात का मैं भी आखिर में जवाब देकर अपनी बात खत्म करूंगा. मुझे तो लगता है कि अब तक सभी ने जिन जिन सही चीजों की पैरवी की हैं, वे सही चीजें सही होने की बजाय बिगड़ती ही चली गई हैं. तो आइए, हम आप कुछ दिन तक बुरी बुरी चीजों की ही पैरवी करके देख लेते हैं. शायद इससे बुराई के प्रति प्यार कम हो जाए क्योंकि प्यार उसी से होता है जो हासिल नहीं होता. जो हासिल होता है उससे कुछ दिनों बाद मोहभंग होता है और उससे आगे की तलाश होती है. यही मोहभंग व तलाश मनुष्यता को यहां तक ले आई है. लेकिन यह परिघटना कामन मैन के साथ नहीं हो पाती क्योंकि उसका जीवन तो खाने के लिए जीने और जीने के लिए खाने में बीत जाया करती है. गांधी से लेकर आइंस्टाइन तक के सेक्स प्रसंगों को पढ़ डालिए. समझ में आएगा कि सेक्स हर मनुष्य के जीवन में टेढ़ी खीर रहा है जिसे साहसी लोगों ने स्वीकार करके उदघाटित किया है और बौने लोगों ने इसे अपने जीवन का डार्क एरिया मानकर जिंदगी भर छिपाए रखा और काल कवलित हो गए.

अखिलेश जी को मेरा जवाब : स्वामी नित्यानंद का कसूर ये है कि उन्हें पहले सेक्स से मुक्त हो जाना चाहिए था फिर स्वामी बनना चाहिए था. आज के धर्म गुरुओं की दिक्कत यही है कि वे धर्म गुरु का चोला धन-समृद्धि के लिए पहनते हैं, न कि दुखी जनों की पीर हरने के लिए. मैं किसी ईमानदार गृहस्थ को सबसे बड़ा साधु-स्वामी मानता हूं क्योंकि वो बिना चोला बदले अपने रिश्तों में ज्यादा सहज व ईमानदार होता है, उत्पादक होता है, शिक्षक होता है, प्यार करता है और प्यार बांटता है. धर्म गुरु ज्यादा बड़े पाखंडी और अनैतिक होते हैं. स्वामियों के सेक्स स्कैंडल को महापाप मानना चाहिए क्योंकि उन्होंने अपनी इंद्रियों को बिना जीते ही साधना व स्वामी क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है. और जो इंद्रियों में ही अंटका है, भोगों में ही लगा है, वो स्वामी काहे का. ऐसे स्वामियों का पहले लिंग मोचन करना चाहिए फिर उन्हें संकट मोचक मानना चाहिए. इसीलिए मैंने स्वामी नित्यानंद या मथुरा के संन्यासियों के स्कैंडलों का कभी पक्ष नहीं लिया और इन्हें हृदय से घृणित मानता हूं. और, सिर्फ ये दो ही नहीं हैं, क्योंकि ये दो तो पकड़े गए, ऐसे स्वामियों की संख्या 99.99 फीसदी है. इनकी तुलना उन दो जेएनयू के युवक-युवतियों से नहीं करना चाहिए जिन्होंने कभी संन्यासी या स्वामी होने का दावा नहीं किया.

कबीर जी को मेरा जवाब : भाई, अगर आपने कबीर को थोड़ा भी समझा होता तो ये सवाल नहीं करते कि ”यशवंत जी, आपकी बेटी होती तो क्या आपकी पत्रकारिता इसी तरह उबाल मारती.” मैं पूरी ईमानदारी से लिख रहा हूं कि मेरी बेटी है और किशोर उम्र की होने की ओर है. उसके शरीर में वे सारी इंद्रियां हैं, जो किसी बेटी या युवती के शरीर में जन्मना होते हैं और उम्र के अनुरूप विकसित-सक्रिय होते हैं. जब उसे जिस इंद्रिय की जो जरूरत महसूस होगी, अपनी चेतना, बुद्धि, परिवेश, संस्कार के अनुरूप उसका सही-गलत अपने विवेक के हिसाब से इस्तेमाल करेगी / कर रही होगी. और, उसके कभी किसी तथाकथित गलत कदम पर मैं उसे गोली नहीं मारने जा रहा और न ही हाकी स्टिक से पीटकर उसे मौत के मुंह में सुलाने जा रहा. किसी समय की गई कोई गलती अगले समय रियलाइज कर लिए जाने पर गलती नहीं होती, बल्कि वह एक शिक्षाप्रद अध्याय होता है जिससे लेसन लेकर आगे की ओर हम आप बढ़ लेते हैं. मैं इस बात को लेकर ज्यादा सचेत रहता हूं कि मेरी सोच जो मेरे बेटे के प्रति है, उससे ज्यादा उदार सोच मैं अपनी बेटी के प्रति रख सकूं.

प्रकाश जी को मेरा जवाब : हमें और आपको अब लड़कियों की इज्जत की चिंता करने का काम छोड़ देना चाहिए. उनकी इज्जत की चिंता कर कर के हम लोग मरे जा रहे हैं और उनको जान से मार डाल रहे हैं. अगर आपकी इज्जत इज्जत नहीं तो उनकी इज्जत कैसे इज्जत हो गई. आपको मुंह मारने की पूरी छूट है, इसमें आपकी इज्जत नहीं जाती तो कोई किसी एक से सेक्स कर लेगी तो उसमें उसका क्या घिस जाएगा और कौन सी इज्जत चली जाएगी. ऐसी खबरों से क्यों दूर रहा जाए. पत्रकारिता केवल श्लोक बांचने के लिए है? पत्रकारिता केवल सुभाषतानि गाने के लिए है? पत्रकारिता के लोगों को उन विषयों पर ज्यादा बहस करने में जुटना चाहिए जो ज्यादा ढंके-छुपे और विवादित व दुरुह विषय हैं.

यशवंत

एडिटर, भड़ास4मीडिया

yashwant@bhadas4media.com

जिस खबर पर उपरोक्त टिप्पणियां आई हैं, उस खबर को पढ़ने के लिए इस शीर्षक पर क्लिक करें- जेएनयू में सेक्स : आइए लड़का-लड़की को गोली मार दें

सरकार चिंतिंत- सेक्स करने की उम्र ज्यादा क्यों?

: बिल पास हुआ तो 12 साल की उम्र में सेक्स लायक माने जाएंगे बच्चे : कहीं करप्शन और महंगाई से ध्यान हटाने के लिए इस सनसनी तो नहीं परोसा! : घोटालों और घपलों में उलझी कांग्रेसी सरकार ने बोल्ड और ब्यूटीफुल विषय छेड़ दिया है. सेक्स का. कसम से, देखिएगा, सब इसी पर अब बतियाएंगे. मिस्र जैसा हाल कहीं भारत में न हो जाए, इससे घबराई केंद्र सरकार रोज नई तरकीब भिड़ा रही है ताकि मूल समस्या से सबका ध्यान हटे.

महंगाई और भ्रष्टाचार पर बहस बंद हो क्योंकि इन मुद्दों से कांग्रेस और इसके युवराज के करियर का अंत होने वाला है. सो, बोल्ड एंड ब्यूटीफुल सब्जेक्ट सेक्स को सरकार ने पब्लिक डोमेन में ला दिया है. सरकार चाहती है कि अभी तक जो आपसी सहमति से सेक्स करने की आयु भारत में है, वो 16 साल है. अब सरकार इस आयु को घटाकर 12 साल करने जा रही है. ऐसा कदम बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा दिलाने के लिए किया जा रहा है. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इससे संबंधित बिल प्रोटेक्शन आफ सेक्सुअल आफेंस 2010 को राज्य सरकारों के पास भेज दिया गया है.

इस बिल के मुताबिक 12 से 14 साल के आयु वर्ग के मामले में सेक्स करने वाले बच्चों की उम्र में कम से कम दो साल का अंतराल होना चाहिए, जबकि 14 से 16 साल के आयु वर्ग के मामले में तीन साल का अंतर होना चाहिए. अमेरिका में आपसी रजामंदी से सेक्स की आयु 16 से 18 साल है. अमेरिका के हर प्रांत में इस बारे में अलग-अलग आयु सीमा है. वहीं, ब्रिटेन में 16 साल और स्पेन में 13 साल के बच्चों को आपसी सहमति से सेक्स करने की सरकार ने अनुमति दे रखी है. पाकिस्‍तान में आपसी सहमति से सेक्‍स के लिए पुरुष को 18 साल और महिला के लिए 16 साल है.  चीन में यह आयु सीमा 14 साल है.

इन देशों के मौजूदा कानून के तहत आपसी सहमति से पार्टनर बिना किसी बंदिश के सेक्‍स कर सकते हैं. स्‍पेन की तर्ज पर ही दक्षिण कोरिया, नाइजीरिया और बुर्किना फासो में 13 साल के बच्‍चों को भी आपसी सहमति से सेक्‍स की इजाजत है. ग्रीस में 15 साल और इससे ऊपर के लोगों आपसी सहमति से सेक्‍स की इजाजत है. जिब्राल्‍टर में यह आयु सीमा 18 है. यहां हेट्रोसेक्‍सुअल और लेस्बियन को 16 साल में ही आपसी सहमति से सेक्‍स की छूट मिली है. बाकी यूरोपीय देशों में सहमति से सेक्‍स करने की आयु सीमा करीब बराबर ही है चाहे वाले किसी हेट्रोसेक्‍सुअल हों या लेस्बियन.

भारत के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस बिल को राज्य सरकार को भेजने की पुष्टि की है, जबकि केन्द्रयी मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नही है. उन्होंने कहा कि 12 साल के उम्र में सेक्स की अनुमति देने के लिए उपयुक्त नहीं है. फिलहाल तो कम उम्र में ही सेक्‍स करने की इजाजत देने के सरकार के प्रस्‍ताव से सभी हैरान हैं. कुछ लोग इसका स्वागत भी कर रहे हैं क्योंकि वास्तविकता तो यही है कि 12 से 14 साल की उम्र में बच्चे सेक्स के लिए तैयार हो चुके होते हैं.

आपको क्या लगता है, सेक्स वाली बात सरकार ने जानबूझकर मीडिया में उछाला है या यह जेनुइन सब्जेक्ट है, जिस पर काम विचार-विमर्श किया जाना चाहिए?

होटल में आओगी तो चैनल में नौकरी पाओगी

अमर आनंद
अमर आनंद
उसके लिए वो दिन बेहद सदमे वाला था। प्रिंट और टेलीविजन मीडिया को 10 साल दे चुकी उस महिला पत्रकार को ऑफर किया गया- तुम्हारे लिए किसी भी चैनल में 45,000 की नौकरी दिला सकता हूं… बस एक रात तुमको फलाने होटल के कमरे में आना होगा। टेलीफोन पर ये घिनौना प्रस्ताव सुना रहा वो शख्स जो पत्रकारिता के नाम पर धब्बा था, कहता जा रहा था….

”…उस होटल में मैं होऊंगा और वो… जो तुम्हें नौकरी देगा…” शर्म से गड़ी जा रही उस महिला के लिए ये अंदाज़ा लगाना बहुत कठिन नहीं था, उससे क्या ‘उम्मीद’ की जा रही है। वो बस इस बात से परेशान थी, उसे ऐसे दिन देखने पड़ रहे हैं, कि लोग उसके लिए ऐसे प्रस्ताव ला रहे हैं। एक अच्छे संस्थान में अच्छे वेतन पर काम कर रही महिला पत्रकार अब उन दिनों को भूल जाने की कोशिश कर रही है।  कोई भी शरीफ आदमी इस नीच हरकत की हिमायत नहीं कर सकता और किसी की मजबूरी से खेलने वाला शख्स तो इंसान की जमात में ही नहीं माना जा सकता, और वो शख्स तो सचमुच गलीज है… और पत्रकार के नाम पर कलंक है। अपनी करतूतों से खुद को कई बार मुश्किल में डालने वाला वो शख्स अब एक जगह सलाहकार की हैसियत में है। यह शख्स खुद मीडिया में तो पांच साल से भी कम समय से है, लेकिन वो 10 साल के अनुभव वाली एक महिला पत्रकार को अपने झांसे में लेने की कोशिश कर रहा था, हालांकि वो अपने इरादों में नाकाम रहा, लेकिन खतरा इस बात का है कि ऐसे नीच लोगों का शिकार कभी भी बन सकती है कोई मजबूर महिला या लड़की।

एक और ऐसा  ही वाकया है। मूल रूप से बिहार-झारखंड से ताल्लुक रखने वाली एक तेज़ तर्रार नई लड़की, जब नोएडा के एक चैनल में इंटर्नशिप करने गई, तो उससे टकरा गया एक शख्स.. जिसने उसे शाम को अचानक फोन किया… और नौकरी का प्रलोभन दिया… इधर-उधर की बात की, फिर साफ तौर पर बोला तुम नोएडा के फलाने बार में मिनी स्कर्ट पहन कर आ सकती हो। उसने कहा, मेरे साथ वो भी होंगे… जो फलाने चैनल में एचआर में सीनियर पद पर हैं। बस तुम आ जाओ… फिर नौकरी मिलना तुम्हारे लिए आसान हो जाएगा। उसका कहना था, वो शख्स दूसरे चैनलों में भी अच्छी खासी पकड़ रखता है इसलिए नौकरी की तो गारंटी समझो।

मीडिया में काम करने वालों की ये कड़वी हक़ीक़त उस लड़की के सामने थी, जिसने मीडिया को समाज की बुराइयों से लड़ने का ज़रिया बनाने का ख्वाब देखा था।  फिल्मों में कास्टिंग काउच के बारे में तो उसने खूब सुना था, लेकिन नई-नई मीडिया से रूबरू हो रही उस लड़की के लिए सचमुच ये हैरत में डालने वाली सच्चाई थी। उसने उस शख्स से साफ-साफ कहा, सुनिए अगर इससे आगे आपने कुछ कहा, तो मुझसे बुरा कोई और नहीं होगा। मुझे आप जैसे लोगों से नौकरी नहीं चाहिए और आइंदा हमें फोन मत करिएगा।

मैं उन दोनों लड़कियों के हौसले को सलाम करता हूं और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए कोटि-कोटि शुभकामनाएं देना चाहता हूं। मीडिया ही नहीं पूरे समाज में लड़कियों को ऐसे ही पेश आना चाहिए और भेड़ की खाल में छुपे ऐसे भेड़ियों के मंसूबे पर पानी फेर देना चाहिए। हालांकि ये ज्यादा ज़रूरी है कि ऐसे गंदी मानसिकता वाले लोगों का चेहरा सबके सामने लाया जाए.. लेकिन कई कारणों से ऐसा कर पाना भी आसान नहीं होता। लेकिन ऐसे लोग जो भी करते हैं उसका खामियाजा उन्हें कहीं न कहीं भुगतना पड़ता है। क्योंकि यही क़ुदरत का क़ानून है।

लेखक अमर आनंद टीवी जर्नलिस्ट हैं.

हिंदुस्तान, आगरा के युवा एनई पर युवती ने लगाए आरोप

हिंदुस्तान के आगरा आफिस में इन दिनों काम कम, बातें खूब हो रही हैं. और बातें करने का मौका उपलब्ध कराया है युवा न्यूज एडिटर ने. दरअसल उनके अधीन काम करने वाली एक युवती ने भरे आफिस में आरोप लगा दिया कि न्यूज एडिटर साहब उसको प्रमोट करने के बदले ओबलाइज करने की मांग करते हैं और ओबलाइज करने का उनका आशय शारीरिक संबंध बनाने से होता है.

सूत्रों का कहना है कि पहले तो न्यूज एडिटर ने युवती को खूब प्रमोट किया. इस प्रमोशन के चक्कर में ‘हिन्दुस्तान’ आगरा में ‘सिटी भास्कर’ भोपाल की खबरें बाइलाइन छापी जाने लगी. मजे की बात यह है कि स्टोरी का मैटर और हेडिंग तक बदलने की जहमत नहीं उठाई गई. अनुराधा श्रीवास्तव के नाम से छपीं इन खबरों की कटिंग और भास्कर की मूल खबर की कटिंग भड़ास4मीडिया के पास मौजूद है. ‘हिन्दुस्तान’ आगरा के न्यूज एडीटर का नाम है मनोज पमार. यहां के संपादक दिनेश मिश्रा ने न्यूज एडिटर मनोज पमार का भरपूर बचाव करते हुए लड़की को काम से हटा दिया.

सूत्रों के मुताबिक नौकरी से हटाए जाने के बाद युवती ने न्यूज एडिटर के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया और वो सारी बातें सरेआम कर दीं, जो अब तक मनोज पमार और उस लड़की के बीच थी. सूत्रों का कहना है कि वो लड़की अपनी मां के साथ एक दिन आफिस आई और सबको न्यूज एडिटर के कारनामें की जानकारी दी. उधर, संपादक और न्यूज एडिटर का कहना है कि लड़की हटाए जाने के फ्रस्ट्रेशन में अनाप-शनाप आरोप लगा रही है. न्यूज एडिटर मनोज पमार ने लड़की द्वारा आरोप लगाए जाने की किसी घटना से इनकार किया है.

प्रदीप आर्या और अशोक यादव ने मुझे फंसाया

: स्टिंग के शिकार टीवी पत्रकार ने किया पूरे घटनाक्रम का खुलासा : यशवन्त जी, नमस्कार, इससे पहले की मैं अपनी बात शुरू करूं, मैं आपको चन्द शब्दों में अपनी पारिवारिक स्थिति बयान करना चाहता हूं. मैं कुरुक्षेत्र के एक संभ्रांत व राजनीतिक परिवार से सम्बन्ध रखता हूं. ईश्वर की कृपा से अच्छी खासी जायदाद क़ा मालिक हूं.हम दो भाई हैं. मैं कुछ साल पहले अमेरिका से वापस आया.

अमेरिका से वापस अपनी पत्नी को पैरालिसिस का अटैक होने के कारण आना पड़ा. मेरा छोटा भाई अब भी अमेरिका में ही रह्ता है. मेरे दो लड़के वा एक बेटी है. बडा लड़का एम.बी.बी.एस डाक्टर है जो की बेल्जियम में रहता है व बेटी को भी एमबीए करवाने के पश्चात मैंने बेल्जियम के एक अच्छे परिवार में शादी करा दी है. छोटा बेटा पिछले 4 वर्षों से आस्ट्रेलिया में रह रहा है. मेरे बुजुर्ग मां बाप यहीं कुरुक्षेत्र में मेरे घर पर मेरे साथ रहते हैं. मेरी पत्नी आजकल मेरी बेटी के बच्चा होने के कारण पिछ्ले कुछ समय से बेल्जियम गई हुई हैं. मैं भी गया था मगर चैनल से ज्यादा दिन की छुट्टी ना मिलने के कारण चन्द दिन पश्चात ही वापस आना पड़ा.

अब सर मैं आता हूं मुद्दे पर. मै एमएच वन न्यूज चैनल का पिछ्ले तीन वर्षो से स्टाफर हूं. 2006 में अमेरिका से आने के पश्चात मैं पहले चैनल नंबर वन जो लुधियाना पंजाब से चलता था, उसका स्टेट ब्यूरो चीफ रहा. खुद डबल एमए एलएलबी हूं इसलिए थोड़े समय में ही समाज व मीडिया जगत में अपनी काबलियत के कारण इलाके में सभी वर्गों पर अपनी छाप छोड़ने में कामयाब तो हो गया मगर मेरी यह कामयाबी मेरे शहर के मेरे कुछ मीडिया के साथियों के गले से नीचे नहीं उतर रही थी. इसके चलते उन्होंने मेरे कैमरामैन अशोक यादव के साथ मिल कर मुझे बदनाम करने की घटिया व इन्सानियत से गिरी हुई साजिश रची. साजिश रचने वाले व्यक्ति जिसका नाम प्रदीप आर्या है ओर जो सुदर्शन टी.वी. का कुरुक्षेत्र से रिपोर्टर है, ने मेरे कैमरामैन अशोक यादव, जो कि एक गरीब परिवार से सम्बन्ध रखता है और जिसका मेरा कैमरामेन होने के चलते मेरे घर मे बेरोकटोक आना जाना था, को किसी तरह बहका फुसला कर मेरे घर में गुप्त कैमरे लगवा दिए. इसके जरिये मेरी एक महिला मित्र जिसकी लगभग 50 वर्ष की उम्र है वा मेरी नजदीकी पारिवारिक संबंध है, के साथ मेरी कुछ वीडियो बनवा लिए और फिर शुरू हुआ इनका मुझे वदनाम करने व बलैकमेल करने का दौर.

आज से लगभग डेढ वर्ष पहले इन्होंने मेरे चैनल पर ये क्लीपिंग्स भेजी व मेल करनी शुरू की. मुझे चैनल पर बुलाया गया व मेरे से सारी बात की तसल्ली की गई. मैंने बताया कि सर यह कोई लड़की नहीं है जो पत्रकार बनना चाहती है बल्कि यह तो लगभग 50 वर्षीय एक महिला मित्र है जिससे मेरे पारिवारिक सम्बन्ध हैं ओर हम दोनों पिछ्ले काफी समय से एक दूसरे की सहमति से अच्छे मित्र हैं. उसके बाद मैंने अशोक यादव को हटा दिया व खुद ही अपना काम सम्भाल लिया. जब प्रदीप आर्या ने देखा की उसका यह वार खाली चला गया है तो उसने फिर मुझे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया.

मैं अपनी इज्जत को बचाने की खातिर में काफी समय तक उसका मुंह बन्द करता रहा मगर सहने की भी एक हद होती है. गल्ती से एक दिन मेरे मुंह से निकल गया कि जो तुम्हें करना है कर लो, बस फिर क्या था, इसने सोचा की जितना जूस निकालना था वो तो निकाल लिया, अब इस व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ करना शुरू कर दो. आज से लगभग ४-५ दिन पहले मुझे कुरुक्षेत्र में पत्रकार बन्धुओं के व अन्य लोगों के फोन आने शुरू हो गए की प्रदीप आर्या आपकी कोई फिल्म हम सब को दिखाता फिर रहा है. इस तरह उसने समाज में मुझे वदनाम करने की खातिर आपके जैसे प्रतिष्ठित वेबसाइट को एक माध्यम बनाया.

मेरी साथी महिला भी एक राजनीतिक परिवार से है ओर जिले की एक राजनीतिक दल की पदाधिकारी है वा लगभग ५० वर्षीय है, ना की 16 वर्ष की लड़की, जैसा कि अपना गिरा हुआ उद्देश्य हाल करने की खातिर प्रदीप आर्या आरोप लगा रहा है. उस महिला को तो बेचारी को कम्प्यूटर भी चलाना नहीं आता. यह कहना भी सरासर झूठ है कि मैं अकेला रह्ता हूं. आप अपने किसी भी नुमाइंदे को कुरुक्षेत्र भेज कर मेरे घर की तसल्ली कर सकते हो. मेरे बुजुर्ग मां-बाप मेरे साथ रहते हैं व अगर पिछ्ले तीन-चार महीनों की बात छोड़ दी जाये तो मेरी पत्नी भी यहीं घर पर रहती थी जो की अब किसी भी समय बेल्जियम से वापस आ सकती है. ऐसे में कैसे सम्भव है कि एक व्यक्ति सारे परिवार के साथ रहते हुए घर में लड़कियो को बुलाये व उनके साथ शारीरिक संबंमध बनाता रहे. मैं कुरुक्षेत्र के सेक्टर 13 मे 765 नंबर मकान में रहता हूं ओर मुझे अपनी तहकीकात कराने में या कोई भी सच्चाई बताने में आपति नहीं है.

इस आदमी प्रदीप आर्या की सामाजिक रेपुटेशन यह है कि एक बार कुरुक्षेत्र के द्रोणाचार्य स्टेडियम में सांसद नवीन जिन्दल के एक कार्यक्रम में इसने माइक पकड़ कर नवीन जिन्दल के खिलाफ ही ऊल जुलूल बोलना शुरू कर दिया था. तब उसके मार्शलों ने इसे उठा कर नीचे फेंक दिया. झगड़ालू प्रवृति का व्यक्ति है ओर निम्नता के किसी भी स्तर तक जा सकता है. कुरुक्षेत्र के जिन्दल हाउस में इसका प्रवेश वर्जित है. इस घटना की बाबत सारा कुरुक्षेत्र जानता है. एक महिला, जैसा कहा गया है कि वो पीड़ित लड़की है, सेंडस्पेस से फाइलें भेजना तो जानती है मगर पब्लिक टेलीफोन बूथ से आपसे बात कर अपना नंबर देना नहीं जानती, अपनी पहचान की पुष्टि कराना नहीं जानती. मेरे खयाल में इंडिया मे काम करने वाले 90 फीसदी से ज्यादा व्यक्तियों को सेंडस्पेस का इस्तेमाल करना नहीं आता. इससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक पीड़ित लड़की का काम ना हो कर मीडिया जगत के एक व्यक्ति का कारनामा है जो आपकी अति प्रतिष्ठित साइट के माध्यम से मुझे वदनाम करना चाहता है.

मेरे चरित्र की तसल्ली आपने करनी हो तो आप कुरुक्षेत्र के उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, उपमंडल अधिकारी, सिटी मजिस्ट्रेट व अन्य उच्च अधिकारियों से कर सकते हो. या मेरे बारे में मेरे चैनल के पदाधिकारियों से पूछ सकते हो कि किस तरह क़ा मेहनती, इमानदार शख्सीयत का मालिक हूं. महज मुझे वदनाम करने की साजिश इस प्रदीप आर्या नामक व्यक्ति ने रची है जो मेरी सफलता को बर्दाशत नहीं कर पा रहा. खुद ईर्ष्या की आग में जलते हुए मुझे बदनाम कर रहा है और कुरुक्षेत्र में लोगों को मेरा वो क्लीपिंग्स दिखाता फिर रहा है.

अगर आप चाहें तो अपने प्रतिनिधि को कुरुक्षेत्र भेज दें, मैं आपको व आपके नुमाइंदे को उक्त महिला से मिलवा भी सकता हूं. जनाब आपसे गुजारिश है कि हमारे सम्बन्ध अगर किसी हद तक थे भी तो वो आपसी सहमति से बने हुए हैं, ना कि जोर जबर्दस्ती से. रही बात लोगों को ब्लैकमेलिंग की तो आप सर अन्दाजा लगा सकते हैं कि जिस व्यक्ति के तीनों बच्चे विदेश मे रह रहें हों और जो खुद जायदाद का मालिक हो वो भला पैसे कमाने में विश्वास रखेगा या सामाजिक प्रतिष्ठा पाने में. यह सब मनगढ़ंत बाते हैं जिनका कोई वजन नही है. मेरे उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए ही मेरे चैनल ने मेरी एक्रीडेशन भी इस फरवरी २०१० में करवा दी. यह बात भी इन लोगों के गले से नीचे नहीं उतर रही है.

अगर मैंने उस औरत के साथ कोई जोर-जबर्दस्ती की होती तो भला इन लोगों से कोइ पूछे कि क्यों नहीं आज तक मेरे खिलाफ उसने किसी भी थाने में कोई रपट वगैरह लिखवायी. मेरी साफ कहना है कि यह सब प्रदीप आर्या जैसे खिसियाये हुए व्यक्ति की एक ओछी सोच है जो मुझे पूरी तरह से नोचने के पश्चात अब मेरी सामाजिक प्रतिष्ठा आपकी साईट के माध्यम से दांव पर लगा रहा है. मैंने अपने वकील से राय करने के पश्चात कोशिश कर रहा हूं कि इस व्यक्ति वा इसके साथी अशोक यादव जिसने इस जघन्य कार्य में उसका साथ दिया है, के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करुं. इसलिए आप से अनुरोध है कि आप मेरी सहायता करें व प्रदीप आर्या जैसे फरेबी व्यक्ति द्वारा भेजी गई इस मनगढ़ंत कहानी को अपनी प्रतिष्ठित साइट से डिलीट करवाने के आदेश जारी करें. इसके अतिरिक्त भी अगर कोई इस संबंध में जानकारी चाहिए तो मुझे देने में खुशी होगी.

के.पी.एस.मारवाह

७६५/१३ अर्बन इस्टेट

कुरुक्षेत्र

मोबाइल- 09050700019

मेल- kmarwaha887@gmail.com

लड़कीबाज टीवी पत्रकार स्टिंग का शिकार – (तीन)

यहां वीडियो से ली गईं वो तस्वीरें प्रकाशित की गई हैं जिसमें दरवाजे के बाहर घंटी बजने के ठीक पहले की कुछ मुद्राएं हैं. घंटी बजते ही टीवी जर्नलिस्ट और लड़की, दोनों अचानक झटके से उठ जाते हैं. लड़की कपड़े ठीक करने लगती है, दुपट्टा डालने लगती है, टीवी जर्नलिस्ट चश्मा उठाते – लगाते हैं और पैंट की बेल्ट कसते हुए गेट की तरफ बढ़ते हैं. लड़की बहुत जल्द खुद को दुरुस्त कर सोफे पर एक कोने में चुपके से बैठ जाती है, जैसे कुछ हुआ ही न हो वाली मुद्रा में. जिस कमरे में टीवी जर्नलिस्ट यह सब करता दिख रहा है, वहां कोने में पति-पत्नी की तस्वीर है, दीवार पर देवता लोग टंगे हैं.

इस पूरे प्रकरण के बारे में टीवी जर्नलिस्ट महोदय, जो खुद को इन तस्वीरों के जरिए अच्छी तरह पहचान रहे होंगे, अपना कोई पक्ष, अपना बयान, अपनी सफाई पेश करना चाहते हैं तो उनका दिल से स्वागत रहेगा. हर व्यक्ति को सफाई देने का मौका मिलना चाहिए. गंभीर से गंभीर आरोपों में फंसे व्यक्ति को भी पूरी बात कहने-रखने का मौका जरूर मिलना चाहिए. यह लोकतंत्र की आत्मा है. यही अभिव्यक्ति की आजादी का दूसरा समानांतर पहिया, दूसरा समानांतर पक्ष है. सो, आरोपी टीवी जर्नलिस्ट महोदय से अनुरोध है कि वे अपना पक्ष भेजें. उनकी इच्चा अगर होगी तो उनके पक्ष को उनके बिना नाम के, उनकी पहचान छुपाकर भी हम लोग प्रकाशित कर सकते हैं.

वैसे भी कहा जाता है कि एक पक्ष को ही कभी सत्य नहीं मानना चाहिए,  सत्य के कई पक्ष होते हैं, कई बार सत्य छोटे-छोटे रूपों में महापाप के आरोपों से घिरे लोगों के दिलों में भी बसते दिखते हैं. लड़की के बयान और उसके द्वारा भेजे गए वीडियो के आधार पर ही किसी को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता. वह भी तब जब लड़की की तरफ से मेल आना बाकी है, उस जवाबी मेल पर जिसमें भड़ास4मीडिया की ओर से उसकी पहचान पर सवाल खड़े किए गए हैं. कौन सही और कौन गलत, कौन अच्छा और कौन बुरा, यह सब तय करने-कराने का ठेका लोकतंत्र में पुलिस और कोर्ट के पास है. भड़ास4मीडिया ने यहां इस प्रकरण को उठाकर केवल यह बताया है कि पत्रकारिता के नाम पर बह रहे गंदे पानी का प्रवाह कितना तेज हो चुका है. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

-समाप्त-

इससे पहले के दो पार्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें-

पार्ट एक

पार्ट दो

लड़कीबाज टीवी पत्रकार स्टिंग का शिकार – (दो)

तस्वीरें गवाह होती हैं. जो वीडियो भड़ास4मीडिया के पास है, उससे ली गई तस्वीरें काफी कुछ कहानी बयान कर देती हैं. वीडियो को देखने से साफ जाहिर होता है कि टीवी जर्नलिस्ट व लड़की के बीच अच्छी अंडरस्टैंडिंग है. बार-बार साथ सोना, उठना, बातें करना, मोबाइल से बात करना, बाहर घंटी बजने पर दोनों का अचानक उठकर कपड़े ठीक करते हुए अलग-अलग होना… ये सब बताता है कि दोनों में ट्यूनिंग ठीकठाक थी. लेकिन जब खटक गई, चाहे जिस भी वजह से, तो दोस्ती के अच्छे दिनों के राज जगजाहिर हो रहे हैं. ये भी संभव है कि लड़की को स्टिंग के बारे में बिलकुल अंदाजा न हो.

उसे बिलकुल न पता हो कि वो जो प्रेमालाप कर रही है, उसका वीडियो उसका बॉस उर्फ प्रेमी उर्फ टीवी जर्नलिस्ट बना रहा है. जब दोस्ती काफी गहरी हो गई होगी और टीवी जर्नलिस्ट लड़की को दूसरों को परोसने के बारे में उससे बात करने लगा होगा तब संभवतः लड़की सचेत हुई होगी. इस प्रकरण में कई पेंच हैं. सबके अलग-अलग दावे हैं. लेकिन एक बात तय है कि पूरा मामला जांच के योग्य है, पूरा मामला स्टडी केस की तरह है. एक टीवी जर्नलिस्ट कबूतरबाज है, ब्लैकमेलर है, धंधेबाज है, ये संगीन आरोप हैं. आरोप के प्रमाण में जो  वीडियो है वो यह बताने के लिए काफी है कि पत्रकार बाकायदा लड़कियों को शूट कर वीडियो तैयार करता था. उसी वीडियो से ली गई कुछ तस्वीरें आपके सामने पेश की जा रही हैं. तस्वीरों को निगेटिव (रिवर्स, Invert) रूप में पेश किया जा रहा है ताकि पत्रकार और लड़की के पहचान का खुलासा न हो सके.

….जारी…

पार्ट एक और पार्ट तीन पढ़ने के लिए क्लिक करें…

पार्ट एक

पार्ट तीन

लड़कीबाज टीवी पत्रकार स्टिंग का शिकार – (एक)

: वीडियो भड़ास4मीडिया के पास :  पत्रकार पर कबूतरबाजी, ब्लू फिल्म बना विदेश बेचने व अफसरों-लड़कियों को ब्लैकमेल करने के आरोप :  भड़ास4मीडिया के पास एक मेल के जरिए कुछ वीडियो भेजे गए हैं. इसमें एक टीवी जर्नलिस्ट का स्टिंग है. वह एक लड़की के साथ आपत्तिजनक अवस्था में है. मेल भेजने वाले का दावा है कि वो वही लड़की है जो वीडियो में टीवी जर्नलिस्ट के साथ सोते, बतियाते दिख रही है. आरोपी जर्नलिस्ट को हरियाणा के एक जिले का बताया है. मेल भेजने वाली कथित लड़की का लिखा पत्र इस प्रकार है-

”आदरणीय यशवंत जी, मैं अक्सर भड़ास4मीडिया पढ़ती हूं. मैं हरियाणा के …. जिले में …. चैनल में कार्यरत रिपोर्टर के हाथों वक्त की मारी हूं. इस रिपोर्टर के हाथों कई लड़कियां अपनी आबरू खो बैठी हैं और ब्लैकमेल हो रही हैं. इस रिपोर्टर के काले कारनामे प्रमाण के साथ …. चैनल के मालिक …. को व्यक्तिगत तौर पैर दिए जा चुके हैं. ये ड्राईवर से पत्रकार बना …. नाम का आदमी शहर में धड़ल्ले से लड़कियों को ब्लैकमेल करने के साथ दुकानदारों व अधिकारियों तक को ब्लैकमेल कर मन्थली ले रहा है. इसके प्रमाण भी सार्वजनिक हैं. मुझे पता है जब न्याय नहीं मिलता तो पत्रकारिता के नाम को काला करने वालों को आप ही उजागर करते हो. अब आपसे ही न्याय की उम्मीद है. इस आदमी ने पत्रकार बनाने के नाम पर मेरी आबरू लूटी थी. पत्रकार तो नहीं बनी पर इसकी वास्तविकता तो दुनिया को बताउंगी. इस मेल के साथ प्रमाण के लिए कुछ वीडियो भेजे जा रहे हैं. कृपया न्याय दिलाएं. कृपया अगर मुझ वक्त की मारी का नाम उजगर न करें तो बेहतर होगा. नोट करें, लड़कियों को ब्लैकमेल करने का छोटा सा प्रमाण सेंडस्पेस से भेजा जा रहा है, वीडियो के रूप में. नीचे वो पत्र है, जिसे मैंने …. चैनल के मालिको को दिया था.”


चैनल के मालिक को भेजा गया शिकायती पत्र

सेवा में

आदरणीय श्री …. जी

उम्मीद है कि आपको व्यक्तिगत तौर पर दिए गए प्रमाणों के बाद ….चैनल के ….जिले के ठगराज व ब्लैकमेलर रिपोर्टर ….के लिए और प्रमाणों की जरूरत नहीं पड़ेगी. पर यह बाज नहीं आ रहा है. दो दिन पहले भी दारू पीकर मेरे घर आया और हंगामा किया. हवस क़ी मांग करते हुए बदनाम करने क़ी धमकी दी. आदरणीय …. जी मैं, आपकी जानकारी में अब सभी प्रमाणों के साथ इस आदमी को देश क़ी सारी मीडिया में नंगा करुंगी. जो आदमी अपने ही घर में अपने बेड पर लड़कियों को नंगा कर हवस का खेल खेलता है, फिर ब्लैकमेल करता है, उसे छोड़ना नहीं चाहिए. उसे भडास4मीडिया पर प्रमाणों के साथ नंगा कर देना चाहिए. उम्मीद है कि इससे आप भी सहमत होंगे.  कुरुक्षेत्र के एसपी और डीसी को भी इसके प्रमाण देने जा रही हूं ताकि और लड़कियों क़ी आबरू न लूटे और बदनामी न हो. इसके द्वारा कबूतरबाजी के जरिए लाखों की ठगी व इनेलो नेता सहित शहर के दर्जनों लोगों के साथ ब्लैकमेलिंग और ठगी के मामले प्रशासनिक अधिकरियों सहित हर जगह सार्वजनिक हो चुके हैं. अब तक आपके कारण बचा है.

मैं माता वैष्णो देवी की दासी हूं पर पिछले कई दिनों से रिपोर्टरों के नाम पर कलंक एक आदमी के हाथों चढ़ गई जिसने असिस्टेंट रिपोर्टर बनाने के नाम पर मेरी आबरू के साथ जानवरों से भी बुरा हाल किया. कई दिनों से आग दिल में थी पर ड़र के मारे चुप थी. अब रिपोर्टर तो नहीं बनी पर यह आदमी मुझे कबूतरबाजी के नाम पर अफसरों के लिए यूज करना चाहता है. आपको बताना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आप के चैनल से जुड़ा यह आदमी मेरे इलावा कई लड़कियों क़ी नंगी तस्वीरें तथा ब्लू मूवी बना कर ब्लैकमेल कर रहा है. इसका प्रमाण आपके पास भेजा जा रहा है. आपके ऑफिस में दो बार आई पर मिलने नहीं दिया गया. इसके आदमी आपके ऑफिस में भी हैं.

आपके पास इस माध्यम से पहुँचने का मेल एड्रेस व ऍफ़टीपी एड्रेस लेने के लिए भी पिछले हफ्ते मुझे दो बार इस बूढ़े के नीचे आना पड़ा. आप को बता दूँ क यह बूढा ब्लू फिल्म बनाकर अमेरिका व इंग्लैण्ड भी भेजता है. एक लड़की को ब्लैकमेल करने क़े लिए इस आदमी द्वारा बनाई ब्लू फिल्म आपके पास भेजी जा रही है. अब माता रानी के नाम पर वक्त क़ी मारी लड़कियों को आप ही बूढ़े ….. से बचा सकते हैं. नहीं तो लोग इस आदमी के नाम पर आत्महत्या को मजबूर होंगे. 15 लोग पहले ऐसा कर भी चुके हैं.

इसका प्रमाण …… जिले के थाना में मुकदमा नम्बर  47 डेट 27 जनवरी 2009 धारा 309 में है. थाने में आपके रिपोर्टर के कारनामे दर्ज हैं.  इस लेटर के साथ प्रमाण अटैच हैं. यह आदमी रिश्वत से कमाए पैसे से 2 लाख क़ी रिश्वत देकर बचने का प्रयास कर चुका है. इसके मकान नम्बर …… में इसके परिवार का कोई आदमी नहीं रहता है. ये बूढा अकेला ही रहता है और लड़कियों को बुला कर गलत कामों में लगा है. यह आदमी अपनी कार ……. इंडिका और …… इंडिगो में लड़कियों क़ी सप्लाई देता है और मोबाइल नम्बर ……. व …….. से ब्लैकमेल करता है. अब ….. जी आप ही माता वैष्णो देवी का ध्यान कर लोगों को आत्महत्या करने से बचा सकते हैं.

आपसे न्याय क़ी उम्मीद लगाये बैठी

एक बेटी समान

कमजोर वक्त क़ी मारी लड़की

प्रति

प्रेषित पुलिस महानिरीक्षक हरियाणा

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग


भड़ास4मीडिया की तरफ से लड़की को भेजा गया जवाब

आपका मेल मिला. वीडियो देखे. आपका पत्र पढ़ा.

आपके पहचान का खुलासा नहीं किया जाएगा.

लेकिन मैं निजी तौर पर गारंटी करना चाहता हूं कि आप महिला ही हैं और इनसे पीड़ित हैं.

आप अपना मोबाइल नंबर तस्वीर पता आदि भेजें, प्रकाशन के लिए नहीं, सिर्फ इस बात की तसल्ली के लिए कि आपकी आड़ में कोई दूसरा तो चरित्र हनन का खेल नहीं खेल रहा है.

भड़ास4मीडिया


लड़की की तरफ से भड़ास4मीडिया के पास आया जवाब

आदरणीय सर

आपका मेल मिला, सहयोग के लिए धन्यवाद. …..की हरकतों के कारण घर के लोगों ने मोबाइल लेकर तोड़ा है. अभी घर की इच्छा के बिना किसी हालत में फोन नंबर नहीं दे सकती. बाकी जैसे आप को उचित लगे. क्या मैं लड़की हूं, इस बात को चैनल से पूछ सकते हो. पत्रकारों से पता करवा सकते हैं. फोटो भी भेज रही हूं. सबसे बड़ा प्रमाण चार वीडियो फाइल हैं जो सेंडस्पेस से भेजी गई हैं. …..की हरकतें और आवाज देख सकते हैं. ….जिले में आप का बंदा हो तो पता करवा सकते हैं. कोई लड़की ऐसे बदनाम नहीं होती. फिर भी मेरा पूरा नाम व पता इस तरह है. …. पुत्री श्री ….. मकान नंबर …. वार्ड …, …. नगर, … रोड, …. ! मेरे घर की इज्जत का ख्याल रखें !

आशा के साथ

…..


भड़ास4मीडिया की तरफ से लड़की को फिर भेजा गया मेल

….. जी

आपका जवाब मिला. मुझे आपकी पहचान पर संदेह है. मुझे ऐसा लग रहा है कि कोई दूसरा रिपोर्टर आपके नाम के बिहाफ यह सब कर रहा है. आपकी तस्वीर व नाम से यह साबित नहीं हो पाता कि यह सब आपने लिखकर भेजा है. सवाल कई हैं. जैसे-

  1. स्टिंग किसने किया और कैसे हुआ.

  2. क्या कोई तीसरा शख्स था, जो वीडियो बना रहा था. या फिर हिडेन कैमरा पहले से लगा था.

  3. क्या वीडियो बनाए जाने में आपकी सहमति थी.

  4. पूरे वीडियो में आपकी मर्जी दिख रही है. पुरुष जो कुछ कर रहा है, उसमें आपकी सहमति और भागीदारी है. आपने तब विरोध क्यों नहीं किया.

  5. क्या आपको पता नहीं था कि आप जो कर रही हैं, वह गलत कर रही हैं.
  6. कैसे माना जाए कि वह रिपोर्टर आपको एक्सप्लायट कर रहा है.

  7. क्या आपने किसी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है? तहरीर दी है?

  8. अगर वो आदमी आपके साथ कुछ जबरन कर रहा होता तो दरवाजे की घंटी बजने पर आप क्यूं ऐसे हो गईं जैसे कुछ हुआ ही न हो.

  9. मतलब यह हुआ कि आप दो लोगों ने अपनी सहमति से संबंध बनाए, रिश्ते रखे. फिर इसे कैसे गलत साबित किया जा सकता है.

  10. जो मेल आपने भेजे हैं, उससे कहीं यह नहीं जाहिर हो रहा है कि मेल भेजने वाली पीड़ित महिला ही है.

  11. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जो तीसरा शख्स है, जिसने यह सब रिकार्ड किया है, वे आपके बिहाफ पर मेल भेज रहे हैं.

  12. अगर ये वीडियो आरोपी पत्रकार ने बनाए हैं तो ये वीडियो आपके हाथ कैसे लगे.

  13. कहीं ऐसा तो नहीं कि कोई पत्रकार, जो आरोपी पत्रकार से खार खाए है, इस वीडियो को किसी तरह हालिस करने के बाद पीड़ित लड़की के नाम का आड़ लेकर आरोपी पत्रकार की शिकायत कर रहा हो.
  14. घरवालों द्वारा फोन तोड़ने की आपकी बात गलत लग रही है. जब आप ये मेल वगैरह भेज सकती हैं तो फोन क्यों नहीं कर सकतीं. आप इंटरनेट यूज कर सकती है, हिंदी में इतना कुछ टाइप कर सकती हैं, सेंडस्पेस पर वीडियो के कई टुकड़े अपलोड कर भेज सकती हैं तो मोबाइल फोन कैसे नहीं इस्तेमाल कर रहीं होंगी.

मेरी कोशिश केवल यह है कि खबर प्रकाशन से पहले बार-बार सत्यापित कर लूं. मैं फिर अनुरोध करूंगा कि आप मुझे खुद एक बार फोन करें या फिर अपना मोबाइल नंबर दें ताकि आपसे बात कर आपकी पहचान को लेकर मन में आए कनफ्यूजन को दूर कर सकूं.

यशवंत


तो ये थी मेलों की आवाजाही. मेरे इस मेल के बाद से अभी तक उस लड़की का कोई जवाब नहीं आया है. पूरे प्रकरण को लेकर जब भड़ास4मीडिया की टीम ने टीवी जर्नलिस्ट के जिले के कुछ लोगों से संपर्क कर सच्चाई जानने की कोशिश की तो पता चला कि जिसके बारे में कथित लड़की ने आरोप लगाए हैं, वह बदनाम किस्म का टीवी जर्नलिस्ट है. लड़कीबाजी और कबूतरबाजी में उसकी लिप्तता को लेकर किसी को कोई संदेह नहीं है. उसके द्वारा ब्लैकमेलिंग किए जाने को लेकर भी कोई शक नहीं है. लोगों ने बताया कि वह प्रलोभन देकर पहले लड़कियों को अपने साथ जोड़ता है फिर अपने उस कमरे में, जहां वह अकेले रहता है और गुप्त कैमरे लगा रखे हैं, वहां उनको वह शारीरिक संबंध के लिए राजी करता है. संभव है, जिस कथित लड़की ने यह शिकायती मेल भड़ास4मीडिया के पास भेजा हो, उसके हाथ अन्य लड़कियों के कुछ वीडियो लगे हों और उसमें से किसी एक के कुछ वीडियोज को भड़ास4मीडिया के पास इसलिए भेजा हो ताकि टीवी जर्नलिस्ट द्वारा लड़कियों को फंसाने व शोषण किए जाने की स्टोरी में किसी को कोई शक न हो.

उस वीडियो को हम यहां इसलिए नहीं दिखा रहे हैं क्योंकि उसमें लड़की की पहचान साफ-साफ उजागर हो रही है. वीडियो की कुछ तस्वीरें निगेटिव (invert) फार्मेट में, जिससे किसी शख्स की पहचान उजागर न हो, को अगली पोस्ट में प्रकाशित करने जा रहे हैं. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि ये वीडियो दरअसल उसी पत्रकार ने बनाए हैं लेकिन किसी और के हाथ लग जाने से यह मार्केट में लीक होता जा रहा है. संभव है, उस जिले के कुछ ऐसे पत्रकार जो इस आरोपी पत्रकार से खफा हों, बदला चुकाने के लिए पास आए वीडियो को प्रकाशित कराने के लिए खुद नकली पीड़िता बन बैठे हों और भड़ास4मीडिया के पास भेज दिया हो. जाहिर है, उन पत्रकारों को ये तो पता ही होगा कि किस लड़की से इस पत्रकार का झगड़ा हुआ और वो कहां रहती है. तो इनका कहना है कि टीवी पत्रकार स्टिंग का शिकार नहीं हुआ बल्कि लड़कियों का स्टिंग करने वाला पत्रकार खुद अपने ही बनाए वीडियो से बदनामी के दलदल में गोता लगाने जा रहा है.

इस मामले पर आप पाठकों से सलाह चाहेंगे कि क्या लड़कीबाज टीवी जर्नलिस्ट को दोषी मानते हुए उसके नाम व पहचान का खुलासा कर देना चाहिए. वीडियो को भी अपलोड कर देना चाहिए या फिर आरोप लगाने वाली लड़की की पहचान की सत्यता के बाद ही खबर का प्रकाशन करना चाहिए. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

….जारी…

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