गडकरी बोले- आडवाणी पीएम पद के दावेदार नहीं

: किशोर मालवीय ने की भाजपा अध्यक्ष से बातचीत : बातचीत के एक अंश को यहां देखिए :  In an exclusive talk with CNEB news channel BJP Party president said that Senior BJP Leader Lalkrishna Adwani is no longer a key candidate for PM’s chair. While speaking with CNEB for its programme (weekly) close encounter Gadkari said in one of his answers that there are many leaders in BJP who are capable and promising candidate for the PM’s post.

Answering the next question he counted the names of such candidates. He gave the names of Sushma Swaraj, Arun Jaitly, Narendra Modi, Rajnath Singh and Murali Manohar Joshi. When he was asked that why he doesn’t count L K Adwani as a candidate for PM’s post he said that due to age factor his candidature even for the next polls is not ensured. Gadkari never counted himself too as candidate for PM’s post. The detailed talk with Nitin Gadkar BJP Party President will be telecasted on CNEB in the programme “Close Encounter” on Saturday. प्रेस विज्ञप्ति

नितिन गडकरी ने किशोर मालवीय से बातचीत के दौरान पीएम पद के दावेदारों के सवाल पर क्या-क्या कहा, किनका-किनका नाम लिया, आप खुद देखें-सुनें, क्लिक करें…

भाजपा अध्यक्ष के इंटरव्यू का एक अंश

पहली जनवरी से सीएनईबी का कायापलट

बहुत कम समय में सीएनईबी ने दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाई है. सीएनईबी ने समाज और सरोकार से जुड़ी खबरों पर लगातार फोकस किया है और मुद्दों पर आधारित बहस को आगे बढ़ाया है. नए साल में सीएनईबी एक नए कलेवर में सामने आ रहा है. पहली जनवरी से चैनल बदले हुए लुक में नजर आयेगा.

इसके अलावा चैनल पर कई नए कार्यक्रमों की शुरुआत होगी. बेहतर तरीके से खबर दिखाने के लिए न्यूज बुलेटिन को अलग अंदाज दिया जायेगा. राज्यों की खबर के लिए ‘स्टेट न्यूज’ और मेट्रो की खबरों के लिए ‘राजधानी एक्सप्रेस’ जैसे न्यूज प्रोग्राम शुरू किए जा रहे हैं. इसके अलावा चैनल का आकर्षण होगा रात 8 बजे का ‘सीएनईबी प्राइम’ और रात 9 बजे का- ‘न्यूज रुम एट नाइन’. दिन भर की खास खबरों को समेट कर रात 11 बजे दिखाया जायेगा- ‘कंप्लीट न्यूज’. तेज रफ्तार खबरें शाम साढ़े छह बजे दिखाई जाएंगी. न्यूज बुलेटिन के अलावा कुछ विशेष कार्यक्रम भी नए साल में प्रसारित किए जाएंगे. जानी मानी हस्तियों के साथ बातचीत होगी, कार्यक्रम ‘क्लोज एनकाउंटर’ में. रविवार को दिखाये जाने वाला प्रोग्राम ‘यंग टॉक’, उभरती हुई प्रतिभाओं पर आधारित है. नए साल पर नए कलेवर के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए सीएनईबी टीम पूरी तरह तैयार है. प्रेस विज्ञप्ति

सीएनईबी में ”राहुल राज” था कब?

आलोक तोमरअचानक सीएनईबी टीवी चैनल की इतनी ज्यादा चर्चा होने लगी है कि अगर यह चर्चा पहले से होती रहती तो चैनल की टीआरपी कुछ और बढ़ जाती। इस खबर का शीर्षक दिया गया है कि सीएनईबी में राहुल राज का खात्मा हो रहा है। शीर्षक आपत्तिजनक भले ही न हो मगर पत्रकारिता के संदर्भों को दूसरी ओर मोड़ कर ले जाता हैं।

सीएनईबी में राहुल राज था कब? आखिर एक टीवी चैनल में या किसी भी पत्रकारिता संस्थान में एक संपादक होता है और वह नेतृत्व करता है। राहुल देव ने भी नेतृत्व किया मगर राज तो उनका था और उनका है जिन्होंने इस चैनल में निवेश किया है और घाटा सह कर भी तीन साल चलाया है। बंद करने का उनका कोई इरादा नहीं हैं और अनुरंजन झा को लाया ही इसलिए गया है कि उनकी प्रतिभा से चैनल को चलाने में साधनों और संसाधनों का विकास हो सके। वैसे आप जानते हैं कि अनुरंजन झा पत्रकार भी हैं और कम से कम उन्होंने अभी तक राहुल देव के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा है।

आपको सीएनईबी में काम करने वाले किसी पत्रकार की टिप्पणी उसके असली नाम से नहीं मिलने वाली है। लेकिन मैं डंके की चोट लिख रहा हूं कि सीएनईबी और राहुल देव का साथ कभी किसी संशय में नहीं रहा। न सीएनईबी चलाने वाले पहली बार रोजगार कर रहे हैं और न राहुल देव पहली बार किसी मीडिया समूह का नेतृत्व कर रहे है। रही बात नए लोगों के आने की तो वे हर चैनल में आते जाते रहते हैं और इस पर खबर तो बनती है मगर विश्लेषण का इतना लंबा चौड़ा आयाम नहीं बनता। खबर में लिखा गया है कि राहुल देव के करीबी अपूर्व और पंकज शुकल ऑफिस नहीं आ रहे। मुद्रा कुछ ऐसी है कि या तो इनको निकाला जा रहा है या फिर ये विरोध में छुट्टी पर हैं। अपूर्व लगातार आ रहे हैं, पंकज शुक्ल ने एक दिन बीमारी की वजह से छुट्टी ली थी और कामाक्षी लगातार काम कर रही है।

और फिर आप अगर सीएनईबी की तुलना एस वन जैसे धोखेबाज चैनल या आजाद न्यूज जैसे अदृश्य चैनल या वाइस ऑफ इंडिया जैसे ठग चैनल से करेंगे तो सीएनईबी की ओर से कम से कम मेरा ऐतराज दर्ज कर लीजिए। मै कोई पट्टा लिखवा कर नहीं आया हूं और हो सकता है कि कल आप मुझे भी सीएनईबी में न पाए लेकिन इसके पीछे बहुत सारी कहानियां बनाना नादानी हैं और यशवंत सिंह आप इस नादानी से बचिए।

अनुरंजन झा की प्रतिभा और अतीत से सब परिचित है। उसे बार बार याद दिलाने से आपका या भारतीय पत्रकारिता का कोई लाभ नहीं होने वाला। जहां तक मुझे पता है, अनुरंजन झा आपके निजी मित्र भी हैं और इसके बावजूद आपको उनके बारे में अगर सूत्रों के हवाले से लिखना पड़े तो ऐसी दोस्ती पर खाक डालिए। प्रतिक्रियाओं में जैसा कि होता है, कुछ लोग राहुल देव को कोस रहे हैं तो कुछ अनुरंजन झा को। उनके पास अपने अपने कारण होंगे।

राहुल देव के बारे में, उन्हें लगभग पच्चीस साल से जानने के बाद उनके बारे में लिखने के लिए मेरे पास बहुत सारे कारण है मगर विस्तार में नहीं जाऊंगा। हिंदी और अंग्रेजी दोनों पर और वह भी शानदार अधिकार से लिखने और बोलने वाले पत्रकारों में राहुल देव जैसे कम ही मिलेंगे। इसके बावजूद वे हिंदी को लेकर लगभग आंदोलन की मुद्रा में जूझते रहते हैं और छोटी सी गोष्ठी से लेकर वॉशिंगटन के सेमिनार तक में जाने में उन्हें कोई दिक्कत महसूस नहीं होती। चरित्र पर लांछन आज तक लगा नहीं, कोई घोटाला घपला किया नहीं मगर यदि सीएनईबी में पैसा लगाने वालों को अनुरंजन झा में संभावना दिखती है तो इसमें भाई लोगों को तकलीफ क्यों हो रही है?

सीएनईबी में राहुल देव के रहते अभिव्यक्ति का एक लोकतंत्र सदा से मौजूद है और अगर आपकी कल्पना की उड़ान आपको यह कहने पर विवश करती है कि हमारे राजनैतिक संपादक प्रदीप सिंह को आने वाले दिनों का आभास हो गया था इसलिए छोड़ कर चले गए तो आप गलत कह रहे हैं। वे अनुरंजन के आने के पहले ही जा चुके थे और अच्छे पद पर और अच्छी संभावनाओं के साथ गए थे। अपूर्व, पंकज और कामाक्षी कोई नौसिखिए नहीं हैं और काम जानते हैं और जिन्हें अपना चैनल ठीक से चलाना होगा उनके यहां अगर इन्हें जरूरत पड़ी तो पर्याप्त जगह है।

और अगर आपको तुलनात्मक अध्ययन करना ही है तो इतना तो ज्ञान होगा ही कि आयु, प्रतिभा, अनुभव और दृष्टि के हिसाब से राहुल देव और अनुरंजन झा के बीच तुलना करके आप दोनों के साथ अन्याय कर रहे हैं और दोनों का अपमान कर रहे हैं। अनुरंजन और राहुल देव एक दूसरे के कपडे सरेआम नहीं फाड़ रहे हैं। राहुल देव को अगर कोई तकलीफ है भी तो उसे वे विलाप का विषय नहीं बना रहे हैं। मामले में सुलझने के लिए अगर कुछ बचा है तो उसे सीधे मालिकों से सुलझाने की कोशिश की जा रही है। सबसे बड़ी बात ये है कि राहुल देव पत्रकारिता के अपने सरोकारों से समझौता नहीं नहीं करना चाहते। अपनी शैली पर और अपनी शर्तों पर कायम रहना चाहते हैं। और शायद इसी बात पर सीएनईबी से कुढ़ने वालों को तकलीफ हो रही है। रही मालिकों की बात तो, ये उन पर निर्भर है कि उन्हें क्या पसंद है, कैसी पत्रकारिता चाहिए, और उनकी राय में कौन महान है और कौन मामूली। चैनल उनका है, फैसला भी वे करेंगे और नतीजे भी उनके हिस्से आयेंगे। बाज़ार में अमिताभ बच्चन भी हैं और शक्ति कपूर भी–पसंद अपनी अपनी।

यह हमारा मामला है, हमे जैसे सुलझाना होगा, सुलझा लेंगे और नहीं सुलझा तो बहुत सारे विकल्प खुले हैं लेकिन अगर लोगों ने अपनी कुंठाए जाहिर करना शुरू किया तो फिर नाम लेकर सामने आएं और उन्हें उनकी जन्मपत्री सहित जवाब मिलेगा।

लेखक आलोक तोमर जाने-माने पत्रकार हैं और सीएनईबी न्यूज चैनल से जुड़े हुए हैं.