ये जो डिप्रेशन है…

: तीन टिप्पणियां : यशवंत भाई सबसे पहले तो फ़्लैट बुक करने के लिये बधाई. वह अत्यंत आवश्यक था. दिल्ली जैसे शहर में आपके जैसे तेवर वाले को पता नहीं कब मकान मालिक कह दे कि निकलो मेरे घर से. इसलिये यह अच्छा कदम है. दूसरी बात कि जब परिवार है तो कुछ जिम्मेवारी तो निभानी पड़ेगी, अन्यथा शादी-ब्याह ही नहीं करते. अब रह गई बात डिप्रेशन की तो मुझे लगता है इस शब्द को ही अभी तक लोग नहीं समझ पाये हैं.

एक डिप्रेशनधारी तन-मन की एक्सरे रिपोर्ट

: जीवन दुख ही दुख है! सुख बिलकुल नहीं है!! : आज सुबह से नहीं बल्कि कल दोपहर बाद से ही डिप्रेशन का दौर शुरू हो गया. पी7न्यूज के तीन साथियों का कैलाश हास्पिटल में भर्ती होना और उसमें से एक पत्रकार साथी जयंत चड्ढा का अभी भी बेहोश हालत में होना, नोएडा में दो बहनों का कंकाल में तब्दील हो जाना और एक का मर जाना…, वरिष्ठ पत्रकार शेष नारायण सिंह का हफ्ते भर से अस्पताल में भर्ती रहना, खबरों-सूचनाओं से हिलती-मचलती इस दुनिया को थर्रा देने का दम रखने वाले आलोक तोमर के गुजर जाने पर अब तक यकीन न हो पाना…