धर्मवीर भारती दफ़्‍तर में ‘डिवाइड एंड रूल’ में विश्‍वास रखते थे

‘धर्मयुग’ का माहौल अत्‍यन्‍त सात्‍विक था। संपादकीय विभाग ऊपर से नीचे तक शाकाहारी था। ‘धर्मयुग’ का चपरासी तक बीड़ी नहीं पीता था। सिगरेट-शराब तो दूर, कोई पान तक नहीं खाता था। कई बार तो एहसास होता यह दफ़्‍तर नहीं कोई जैन धर्मशाला है, जहाँ कायदे-कानून का बड़ा कड़ाई से पालन होता था। दफ़्‍तर में मुफ्‍त की चाय मिलती थी, जिसे लोग बड़े चाव से पीते थे।