ईटीवी के दीपक मिश्र ने आरोपों का दिया जवाब, दूसरे स्ट्रिंगरों की खोली पोल

यशवंत जी, महोदय, सबसे पहले आपको इस बात के लिए साधुवाद कि आपने इस बात पर काफी जोर दिया कि जिले की इन्टरनल मीडिया पोलिटिक्स पत्रकारिता और समाज का कितना नुकसान कर रही है और किस तरह बेशर्मी के साथ सच को झूठ और झूठ को सच बनाने का खेल चल रहा है. भड़ास पर जो कुछ देखा, उससे दुखी या विचिलित होने का तो सवाल ही नहीं उठता क्योंकि झूठ की उम्र बहुत कम होती है और सत्य अंततः स्थापित रहता है.

कई पत्रकारों की इच्छा- ये खबर भड़ास पर जरूर छापें

आमतौर पर हम लोग जिलों की इंटरनल मीडिया पालिटिक्स से बचते हैं. वजह यह कि हर जिले में कुछ महा भ्रष्ट पत्रकार होते हैं, कुछ भ्रष्ट पत्रकार होते हैं, कुछ कम भ्रष्ट पत्रकार होते हैं, कुछ अवसरवादी पत्रकार होते हैं, कुछेक संतुलित भ्रष्ट व संतुलित ईमानदार पत्रकार होते हैं, कुछ एक बेहद ईमानदार होते हैं और कई सारे मौका देखकर बेईमान और ईमानदार बनते-बदलते रहते हैं. इसी कारण हर जिले में पत्रकारों में आपस में टांग-खिंचव्वल होती रहती है.