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ईटीवी के दीपक मिश्र ने आरोपों का दिया जवाब, दूसरे स्ट्रिंगरों की खोली पोल

यशवंत जी, महोदय, सबसे पहले आपको इस बात के लिए साधुवाद कि आपने इस बात पर काफी जोर दिया कि जिले की इन्टरनल मीडिया पोलिटिक्स पत्रकारिता और समाज का कितना नुकसान कर रही है और किस तरह बेशर्मी के साथ सच को झूठ और झूठ को सच बनाने का खेल चल रहा है. भड़ास पर जो कुछ देखा, उससे दुखी या विचिलित होने का तो सवाल ही नहीं उठता क्योंकि झूठ की उम्र बहुत कम होती है और सत्य अंततः स्थापित रहता है.

यशवंत जी, महोदय, सबसे पहले आपको इस बात के लिए साधुवाद कि आपने इस बात पर काफी जोर दिया कि जिले की इन्टरनल मीडिया पोलिटिक्स पत्रकारिता और समाज का कितना नुकसान कर रही है और किस तरह बेशर्मी के साथ सच को झूठ और झूठ को सच बनाने का खेल चल रहा है. भड़ास पर जो कुछ देखा, उससे दुखी या विचिलित होने का तो सवाल ही नहीं उठता क्योंकि झूठ की उम्र बहुत कम होती है और सत्य अंततः स्थापित रहता है.

आपको और भड़ास के सुधी पाठकों और दर्शकों को ससम्मान अवगत कराना है कि मैं विगत लगभग 12 वर्षों से पत्रकारिता की सेवा कर रहा हूं. इस दौरान मैंने जहां काम किया वहां चैनल की प्रतिष्ठा और लोकप्रियता में वृद्धि हुई. बाराबंकी में भी 99% खबरों में  ईटीवी सबसे आगे रहता है. इसी वजह से यहाँ के कुछ अन्य टीवी पत्रकार मुझसे द्वेष रखने लगे. भूपेंद्र मिश्र नामक राष्ट्रीय सहारा अखबार के पत्रकार जो खुद को पीड़ित, गरीब, कम पहुंच वाला निरीह प्राणी दर्शाता है, उसका आलीशान बंगला बाराबंकी में केंद्रीय विद्यालय के पास बना है. ईश्वर ने इसकी शक्ल ही ऐसे बनाई है कि दूखियारा लगता है लेकिन है बहुत महीन. यह साहब अपनी घटिया हरकतों के बल पर जबरियन मनोहरलाल नामक बुजुर्ग की ज़मीन हथियाना चाहते हैं.

यहाँ ये भी गौरतलब है कि जिस ज़मीन एग्रीमेंट में अन्य लोगों ने बीस-बीस हजार खर्च किये उसी एग्रीमेंट में भूपेंद्र जी ने 2 लाख रुपये खर्च कर दिए जबकि वो और उनके साथी उन्हें गरीब, पीड़ित, निरीह बताते हैं. इनके सफेद झूठ को कोई भी इन्हीं की कही बातों से पकड़ सकता है. जो लोग खुद को पत्रकार समझते हैं, उन्हें इस मामले की हकीकत समझने में देर नहीं लगेगी. जिस 3200 sq/ft ज़मीन को लेकर फर्जी बातें की जा रही हैं उसे मेरी माता जी ने छोटे भाई राघवेन्द्र मिश्र जो कि बालिग है, उसी के नाम 31.12.2010  को ओबरी गाँव में मनोहर लाल नामक व्यक्ति से नियमानुसार खरीदी थी. इसका दाखिल ख़ारिज विधि पूर्वक राघवेन्द्र के नाम हो चुका है. पूरे  मामले को गलत ढंग से झूठ के सहारे मेरे खिलाफ बनाया जा रहा है.

भूपेंद्र मिश्र नामक राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार के नाम से मनोहरलाल के साथ जिस एग्रीमेंट और ज़मीन का हवाला दिया जा रहा है उससे इस ज़मीन का और मेरा कोई लेना देना नहीं है. वह एग्रीमेंट उसी गाँव की गाटा संख्या 629 से जुड़े दूसरे भूखंड का है जिसकी चौहद्दी और रकबा भी राघवेन्द्र द्वारा खरीदी गयी ज़मीन से अलग है. यह तथ्य ज़मीन के मालिक, विक्रेता  मनोहरलाल एफिडडेविट के माध्यम से स्पष्ट कर चुके हैं.

भूपेंद्र के द्वारा कराये गए एग्रीमेंट में, मैं नहीं बल्कि मेरे भाई राघवेन्द्र समेत पांच लोग थे. सभी ने बीस-बीस हजार रुपये (कुल एक लाख रुपये) दिए थे. लेकिन एग्रीमेंट की ज़मीन में विवाद होने के कारण सभी लोगों ने उसका परित्याग कर दिया और मेरे भाई राघवेन्द्र ने खुद को उस एग्रीमेंट से अलग कर लिया. 12.2.2011 को उस एग्रीमेंट की अवधि भी कानूनी रूप से समाप्त हो चुकी है. गौरतलब है कि जो जमीन राघवेन्द्र ने खरीदी है वह पूरी तरह भूपेन्द्र द्वारा कथित एग्रीमेंट से अलग है.

इस ज़मीन का गाटा संख्या 629 एक है, जो कि एक बड़ा भूखंड है जबकि रकबा और चौहद्दी भूपेंद्र के कथित एग्रीमेंट से अलग है. एग्रीमेंट के पक्षकार भूपेन्द्र और मनोहरलाल हैं क्योंकि भूमि के मालिक मनोहरलाल हैं. अब भूपेन्द्र और उनके कई साथी जबरन दबंगई के बल पर मनोहर से उसकी जमीन हथियाना चाहते हैं. इस बात की शिकायत मनोहरलाल शासन प्रशासन और राष्ट्रीय सहारा के संपादक से कर चुका है. इस मामले में भड़ास पोर्टल पर मेरे विरूद्ध अपमानजनक लेख लिखने वाले सभी लोग भूपेन्द्र व उनके सहयोगी हैं. मेरे छोटे भाई की विधिक संपत्ति को गलत तथ्यों से जोड़ कर मुझे घेरने का असफल प्रयास किया जा रहा है.

डीके सिंह मेरे पुराने मित्र हैं. वे पूर्व में  ईटीवी से बाराबंकी संवादाता रहे. यहां से हटा कर आगरा भेजे गए और उसके बाद निष्कासित किये गए. लम्बे समय तक उनसे सम्बन्ध बहुत प्रगाढ़ रहे लेकिन धीरे-धीरे डीके सिंह घटिया राजनीति करने वालों का शिकार हो गया. जब मैं इलहाबाद से आया तो डीके ने शुरू में मेरा काफी सहयोग किया. मैंने भी उनके लिए क्या-क्या किया, उनकी आत्मा जानती है. तीन साल वो किसी संस्थान में नहीं रहे लेकिन बतौर पत्रकार की हैसियत से मैं उन्हें पूरा सम्मान देता और हमेशा अपने साथ रखता था.

आई.बी.एन.7 के श्री मनोज राजन त्रिपाठी का मैं आजीवन आभारी रहूँगा कि उन्होंने मेरे कहने पर डी.के. की योग्यता को समझा और अपना स्ट्रिंगर बनाया. डीके धीरे-धीरे जैसे-जैसे मजबूत होते गए, मुझसे दूर होते गए. विशन इसलिए मुझसे नाराज है क्योंकि उसे लगता है कि मेरी वजह से वो सहारा का स्ट्रिंगर नहीं बन पाया. जबकि वो लाइव इंडिया और times now दोनों में काम कर रहा है. यहां कुछ लोग चाहते हैं कि मैं इनके अनुसार काम करूं और कोई भी खबर चलने से पहले इन सभी से शेयर करूं. ऐसा न करने के कारण ये मुझसे कुपित हैं. इसी कारण मेरे खिलाफ प्रोपेगंडा कर रहे हैं.

ये सभी चाहते है कि मैं इन हरकतों से विचलित हो कर इनके अधीन हो जाऊं. इस पूरे मामले से मेरा यानि दीपक मिश्र का कोई लेना देना नहीं है और मेरे छोटे भाई का जमीन से सम्बंधित कोई भी विवाद नहीं है. जिस जमीन का भूपेन्द्र मिश्र एग्रीमेंट के हवाले से जिक्र कर रहे है, वो मनोहरलाल की एक अलग भूमि है और एग्रीमेंट भी एक्सपायर हो चुका है. इसके बाद भी यदि कोई विवाद बनाना चाहता है तो वो मनोहरलाल से होगा क्योंकि एग्रीमेंट के लिए कानूनी रूप से मनोहरलाल और भूपेन्द्र आपस में उत्तरदाई हैं.

मेरे मेल के साथ वो पत्र भी है जिसे मनोहरलाल जो कि पूरी भूमि के स्वामी हैं और जिससे भूपेन्द्र ने एग्रीमेंट कराया था, जो उसने सहारा के संपादक और शासन प्रशासन के अफसरों को भेजा है. साथ ही उसका प्रमाणित शपथ पत्र भी है, उसे भी पाठको को दिखायें. इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि भूपेन्द्र  अपने साथियों के संग मिलकर मनोहरलाल पर दबाव बना कर गलत ढंग से उसकी जमीन हथियाना चाहता है. जो जमीन मेरे छोटे भाई ने खरीदी है उसका भूपेन्द्र के एग्रीमेंट से कोई वास्ता नहीं है.

महोदय, आशा है सभी तथ्य आपके समक्ष स्पष्ट हैं और आप भी भलीभांति जानते हैं कि मेरे आत्मबल और स्वाभिमान को तोड़ने के लिए इस प्रकार की घटिया राजनीति और हरकतें पहले भी कई बार हो चुकी हैं. मैं पूरी निष्ठा से ईटीवी में अपनी सेवाएं दे रहा हूँ जिसके परिणामस्वरूप यहां ईटीवी की लोकप्रियता चरम पर है. मैं सभी आलोचक भाइयों को यही कहूँगा कि भारत की कोई भी जांच या पुलिस एजेंसी या अदालत इस पूरे मामले की जाँच कर ले, मैं किसी भी जांच का स्वागत करूँगा.

और जो लोग गंदे और झूठे शब्दों का जाल बुनकर मेरी छवि ख़राब करना चाहते हैं, वो अपने मानव शरीर और जीवन का सदुपयोग करें. अगर भूपेन्द्र और उनके साथी सही हैं तो उनकी जीत तय है लेकिन वो पूरे झूठे हैं. इसलिए उन्हें हिम्मत जुटा कर के सच्चाई को स्वीकार कर लेना चाहिए.

यशवंत जी आपकी सलाह पर मैं ये तथ्य सामने रख रहा हूँ. इस मामले से सम्बंधित शायद यह मेरा पहला और अंतिम मेल है क्योंकि मेरा मानना है कि ज्यादा शोर मचाने से दिन को रात और रात को दिन नहीं बनाया जा सकता. झूठ को सच और सच को झूठ नहीं बनाया जा सकता. इसलिए मैं शोर मचाने में विश्वास नहीं रखता क्योंकि सच्चाई के साथ हूँ. अंत में मुझे दुश्मन या दोस्त मानने वाले सभी भाइयों को और उनको भी जो भटक गए हैं हार्दिक शुभकामनायें. सही मार्ग पर आयें, और अपने जीवन को समाज और राष्ट्र के कल्याण पर लगायें.

पत्रकारों के सामने बहुत से मुश्किल लक्ष्य हैं लेकिन ये दुखद है कि उनका ज्यादातर समय और ताकत अन्य पत्रकारों के विरोध में खर्च हो जाता है. ये भी ध्यान रखें कि किसी भी मामले में वही आपका सच्चा शुभ चिन्तक है जो बातचीत के जरिये मतभेद और समस्याओं को सुलझाने की सलाह देता हो, जबकि जो व्यक्ति आपको लड़ने और नफरत में जलने की सलाह दे रहा है, वह खुद भी कुंठित और मूर्ख है, साथ ही आपको भी मोहरा बनाकर बर्बाद करना चाहता है ताकि आप मस्त हो के ना घूम सकें बल्कि तनाव में रहें और उसे तेल लगाते रहें. साथ ही उसकी घटिया मानसिकता का राज आप के दिमाग पर भी हो जाये.

इस मेल के साथ मेरे भाई राघवेन्द्र के जमीन की प्रमाणित खतौनी, मनोहरलाल का एफीडेविट और भूपेन्द्र के विरूद्ध मनोहरलाल का शिकायती पत्र संलग्न है.

भूपेंद्र के खिलाफ मनोहरलाल का एफिडेविट

भूपेंद्र के खिलाफ मनोहरलाल का शिकायती पत्र

राघवेंद्र के जमीन की प्रामाणिक खतौनी देखने के लिए इन दो लिंक्स पर क्लिक करें-

खतौनी पार्ट एक

खतौनी पार्ट दो

उम्मीद है मेरे बयान, प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों से सभी शंकाओं का समाधान हो गया होगा. अगर फिर भी किसी को कोई शंका है तो वो मुझसे मेरी मेल पर पूछ सकता है, जान सकता है या फिर उसका बाराबंकी में स्वागत है ताकि वे समस्त चीजों को अपनी आंखों से जान देख सकता है.

धन्यवाद

आपका
दीपक मिश्र

संवाददाता, ईटीवी
बाराबंकी

[email protected]

इस विवाद / प्रकरण की शुरुआती खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें- कई पत्रकारों की इच्छा, ये खबर भड़ास पर जरूर छापें

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0 Comments

  1. pankaj

    April 12, 2011 at 1:52 pm

    yashwant ji dipak se puchhiye. ki bhai inka nabalik hai. khud sarkari gest house ke mahman bane hai. nabalik bhai ne itni rakam kiske raham se kamayi hai. aur jiske sir par par rahne ke liye chhat nahi hoti wo kheti nahi khareeda karte . wo bhi nabalik jisko apni nak ponchhne ka sahur bhi na ho.etv ke 10-12 hazar me babarabanki jaise mahanagar se jude shahar me mahal bhi nahi khade ho sakte. jiske pariwar me 5 sadasya ho. ye mere jitne prashan hai agar unka jawab dipak ke pas ho to ham man le ki. rahi bhopendra ki bat to jo aadmi sahi se khada bhi nahi ho sakta, khada bhi ho jaye to punk do to ud jaye aise shareer wale vyakti kis par kabja karega jisko khud par kabja karne ki himmat na ho. dm awas ke bagal ki 420 ka mukadma d.m. ne khud likhwaya tha dipak sahab aap ko yaad hoga jab band kamre me pair pajkde the aapne.

  2. naqui

    April 12, 2011 at 2:03 pm

    ye sari baate jo adarniya etv ke patrkaar bata rahe hai inka rajistry ki date to dekh lijiye aur prarthna patra hai uski date dekh lijiye kya ye sari baate uthne ke baad us vykti se prathna para likhaya gaya hai ya etv ke kisi adhikari ne likhne ko kaha hai….

  3. Vardhman Jain

    April 12, 2011 at 2:45 pm

    Patrakaro ke beech yeh war bahut dukhad hai.

  4. GOPAL

    April 12, 2011 at 3:08 pm

    [b]yashwant ji Parkar Rupi Randio Aur Dalalo K Chakkar Me Mat Pado[/b]
    Pura Pada Ab Pata chala
    Dk,Bishon Bhupndar k saat Deepak bhi Makkar nikal Gaya,
    Isne shatirana Chal chali,Ek suljhe hue Bhu mafia ki tarah bachne Ki koshish ki Lekin Pol khul gayee,
    Affidavit Bhadas par aane se 2 din pahle banwakar manoharlal ka istemaal kar bachne ki koshish ki hai,haqiqat alag Hai
    ye sab dalal hai
    patrkar rupi Randi Hai,deepak ab Pata Chala Inka Guru Hai:'(:'(:'(:'(

  5. Deepak Mishra

    April 12, 2011 at 5:53 pm

    यशवंत जी, धन्यवाद आपने अपने वचन को पूरी ईमानदारी से निभाया और सभी तथ्यों को भड़ास पर प्रमुखता से प्रकाशित किया ! बाराबंकी में ज़्यादातर पत्रकार बहूत अच्छे है, कुछ लोगो को न जाने क्यों लड़ाने भिड़ाने की पोलिटिक्स में मजा आता है ! भगवान् सबको सदबुद्धि दे !

    Deepak MIshra

  6. Raghvendra Mishra

    April 12, 2011 at 6:00 pm

    यशवंत जी, अब आपने दूध का पानी का पानी कर दिया.. हर जिले में अच्छा काम करने वाले पत्रकारों के खिलाफ, घटिया टाइप के पत्रकार लाबिंग कर के राजनीति करते है !

  7. Deepak Mishra

    April 12, 2011 at 6:54 pm

    यशवंत जी सातवे पैरा में निष्काषित शब्द को एडिट कर दे, मेरा उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं केवल सत्य स्पष्ट करना है !
    goodwishes to all ….

  8. chintu

    April 12, 2011 at 7:23 pm

    Agar deepak itney imandar ho phir Zila Parishad key daak bangley mei kyo rah raeho kabza kar key, uski bhi photo dalo.

  9. chintu

    April 12, 2011 at 7:25 pm

    Deepak abhi zara apna address barabanki mei batao, Zila Parishad Ka Dak Bunglaw Kabza kar key

  10. chandrkant

    April 12, 2011 at 8:31 pm

    Insan k Sharir k Chutad Mat Dekho,Chehra dekho,Jism Dekho,Imandari Dekho,Sachaee Dekho tab faisala karo ki wo manav kaisa hai
    isi tarah
    Barabanki Ki Patrkarita Aur Patrkar k Chutad Mat Dekho
    Ye Sab Gande Hai,Bahut Kuch hai barabanki me,Imandar,Sache,Insan ke liye Ladne Walo Ki lIne hai
    Barabanki k hi Grija guru,Hisam siddique, Nadeem,Ubaidullah Nasir,Boby Naqvi,ashish Khetan,Rakesh verma,Sanjay dhiman,Narendar Mishra,KP Tiwari,Hasmatullah,Suresh bahadur Kaushik,Munawwar tahseen,Ahsan tahseen,Arvind kumar Singh,Rizwan Mustafa,mohd aqil, MOhd Nawab ,Faisal,Etamad,Iftida Bhatti,sanjay sharma,Vikas,Annad Sharma,Mohan Merotra,Saleem,Aleem,Sudheer,SM Jafar,,jaise log hai jo india me sikka jamaye hai,jinki imandari k charche jagah hote hai,in par barabanki ko garv hai,
    aap barabanki ko in tuchcho ki harkato se badnam na karein
    aaj bhi barabanki k patrkar aur yaha ki soch,imandari har koi pasand karta hai

  11. sudhakar

    April 13, 2011 at 4:00 am

    यशवंत जी , सभी प्रतिक्रियाओ से साफ़ जाहीर हो रहा है कुछ बाहरी लोग जिनका मीडिया से लेना देना नहीं है, वो लोग सिर्फ इस मामले मैं भड़ास का मंच भी दुरुपियोग कर रहे है और अलग अलग नामो से स्तरहीन घटिया बाते लिख रहे है ! ये लोग चाहते है, की कहते है की बाराबंकी के पत्रकार आपस में लड़े और ये लोग मजा ले, हर वो व्यक्ति को जो खुद को पत्रकार समझता है इस घटिया मेलबाजी से और इस विवाद से खुद को अलग कर लेना चाहिए !
    भाई साहब, अगर हो सके तो पुरे मामले को भड़ास से हटा दे तो ही अच्छा होगा !
    बाकि आप स्वयं काफी अनुभवी और विद्वान् है !

  12. pankaj mishra

    April 13, 2011 at 4:45 am

    १ आप बाराबंकी में कितने सालो से रिपोर्टिंग कर रहे है ! आपने लिखा ९९% खबर सबसे पहले देता हू बहुत बड़ी खबर जो होती है वो ई टी वी पर नहीं चलती है बल्कि नेशनल चैनल पर चलती रहती है !
    २ क्या आप बता सकते जो अमर उजाला पेपर में प्रकाशित किया था उसके बारे में बता सकते है (M .A . Kiddwai )
    ३ बाराबंकी में आप इस समय कहा पे रहते है
    ४ मनमोहन लाल वर्मा ने जो पाच लोगो का अग्रीमेंट कराया था आपने जो रजिस्ट्री कराइ है उसकी तिथि क्या है
    ५ आपने लिखा है की मै बहुत इमानदार हू तो जरा यह बताइए की ई टी वी का एक रिपोटर के पास कई गाडिया हो आपका आय का सूत्र कहा से है कृपया करे

  13. AJAY 9415774324

    April 13, 2011 at 1:39 pm

    यशवंत सर अब मुझ से बर्दास्त नहीं हो रहा तो मै आगरा में ई टी वी स्टाफ में हूँ डी के भाई से मेरा एक सालतक साथ रहा | डी के भाई कुल मिलकर ठीक आदमी लगे दारू तो पीते हैं लेकिन एक साल के के कार्यकाल में दारू पी कर किसी से मार पीट या धमकी जैसा कुछ नहीं हुआ किसी से पैसे मांगना या ब्लैकमेलिंग भी नहीं की | यशवंत जी पता नहीं आप के साथ उन्होंने ऐसा क्यों किया आप की क्या बात चीत हुई थी | वास्तव में मुझे दीपक के कथित सफाई के उल्लिखित उस अंश से घोर आपत्ति है डी के भाई को बाराबंकी से हटाया गया और आगरा से निष्काषित किया गया ये सरासर बेहूदी और झूठ है | हलाकि डी के भाई ने आज सुबह जब मैंने बात की तो मुझे मना किया था की कम्मेंट वगैरह मत लिखो लेकिन अब चुप रहना भी न्यायोचित नहीं है | लेकिन दीपक तुम अपने अधिकारी ब्रजेश मिश्र को जानते हो उन्ही के कहने पर डीके भाई ने रियाज के नाबालिग बेटे के मामले में पुलिस का स्टिंग किया था | दारू पीने के बाद डी के भाई ये बात जरूर बताते थे| की सारा कुछ कोर्ट के फैसले पर है | 5 फ़रवरी २००६ को इलाहाबाद की लखनऊ बेंच में जस्टिस भंवर सिंह और जस्टिस जे एम पालीवाल ने व्यापक जनहित में फ़ोन टैपिंग को जायज ठहराया| डी के भाई के अधिवक्ता प्रिंस लेनिन थे |ये फैसला मीडिया के लिए जनहित में पत्रकारों द्वारा के जाने वाली फ़ोन टैप्पिंग को जायज ठहराने वाला था देश भर के कई पत्रकारों ने इन फैसले के नजीर दिखाकर पुलिस और राज्य द्वारा लादे गए मुकदमो से निजात पाई आज भी ये फैसला मीडिया के लिए सजीवनी है | जीत के बाद खुद ब्रजेश जी ने कहा था डी के अब घर लौट आओ |लेकिन हुआ क्या दीपक हटने को तैयार नहीं हुआ | मैंने कई बार दीपक को देर रात बात करते समय सुना था के डी के भाई मै आप का खडाऊ रख कर बाराबंकी में आप का इन्तजार कर रहा हूँ | लेकिन वक़्त आने पर डी के भाई को इस दीपक ने धोका दे दिया | डी के भाई भरी मन से घर लौट गए हलाकि ब्रजेश जी ने दीपक से कहा की तुम दोनों लोग साथ काम करो | ई टी वी प्रबंधन ने बाराबंकी में इस बात के इजाजत नहीं दी | ब्रजेश जी ने कुछ प्रयास किया लेकिन फिर उन्होंने भी बाद में बहुत रूचि नहीं दिखाई ,ब्रजेश जी अगर आप इस को पढ़े और दीपक के सफाई नामा में डी के भाई को बाराबंकी से हटाने और आगरा से निष्काशन जैसे सफ़ेद झूठ देखे तो आप को यकीन हो जायेगा के दीपक कितना बड़ा झूठा है | आप उस समय भी ई टी वी में थे | पूर स्टिंग और कोर्ट का फैसला आप के जान कारी में था | डी के भाई हम लोग आप को बहुत मिस करते हैं आप का कैमरा मैन अखिलेश दूबे भी आप की रट लगाये रहता है | वो आप से नाराज है के डी के भाई हमें भूल गए आप के हाथ की मछली खाए बहुत दिन हो गया | हफ्ते में तीन दिन नॉनवेज की आप के पार्टी सूर्यनगर वाले ऑफिस के किचेन में आप करते थे | कभी कभी चंदा भी ले लेते थे | लेकिन जायदातर दावत फ्री होती थी | क्योकि डी के भाई खुद के लिए खाना बनाते थे | हम भी उसी में खा लेते थे | भाई आप कहाँ इन नीचो के चक्कर में पड़ गए खुद को सम्हाल कर रखिये दुनिया में सब आप जैसा नहीं सोचते |आप बहादुर हैं| लेकिन चतुर(धूर्त) नहीं हैं | यही आगरा के उस वक़्त के ई टी वी प्रभारी अखिलेश तिवारी डी के भाई से हमेशा खुंदक रखता था | क्यों की डी के भाई आगरा में छाए हुए थे | मालपुरा में सेना का मिग जब गिरा तो डी के भाई ई टी वी को एक्सक्लूसिव दिया | इस के बाद अखिलेश के अजलन बाद गयी थी | आगरा के बैनारा इंडस्ट्रीज(ये एक्सपोर्टर हैं और आगरा के धनाढ्य लोगो में एक हैं ) के माली मुकेश बैनारा ने होली के दिन शराब के नशे में ३ साल के बच्चे को रोंदिया छः सात लोग कार में सावर थे | लेकिन नंबर प्लेट मौके पर गिर गयी थी | पुलिस ने रफा दफा के कोशिश के डी के भाई ने आर टी ओ आफिस से मुकेश के रजिस्ट्रेशन फ़ाइल से मुकेश के फोटोनिकाल कर खबर चला दी मुकेश के पक्ष में उस वक़्त के क्षेत्राधिकारी स्टार के अधिकारी ने डी के भाई से पांच लाख लेकर खबर न चलने की बात कही थी | मैंने कहा था पैसा ले लो यही काम आएगा लेकिन डी के आप नहीं माने थे याद है आप ने क्या कहा था उस मासूम की फोटो दिखाते हुए मुझसे आप ने कहा था गौर से देखो क्या ये तुम्हारे बेटे जैसा नहीं है | मेरी आँखों में आंसू आ गए थे| आप ने इस क्षेत्राधिकारी के बाईट के साथ पूरी खबर भेज दी थी | अखिलेश भी आप को डरा रहे थे | ये लोग कुछ भी कर सकते हैं | डी के भाई फिर आप को याद है | उसी बच्चे के पिता को मुकेश बैनारा ने अपनी फैक्टरी में मोटी पगार देकर समझौता लगा दिया था | खैर मै भुत कुछ लिखना चाहता हूँ ब्रजेश जी अपनी आत्मा को टटोल कर देखिये कही कुछ गलत हो रहा है उसे समय रहते थी कर लीजिये तो बेहतर है | खैर ये मेरी बात थी मैंने कह दी| डी के भाई आप के सम्बन्ध में एक पश्चिमी विचारक की एक बात हमेशा याद आती है | इस दुनिया ने हमेशा अच्छे लोगो के साथ बुरा किया है…..डी के भाई मुझे क्षमा करियेगा आप के मना करने के बाद भी लिख रहा हूँ .,…
    |

  14. sndeep shukla

    April 13, 2011 at 2:16 pm

    पोल तो खुल गयी यशवंत जी लेकिन अभी आप के दिल में डी के सिंह और विशन से नाराजगी कम नहीं हुई है | क्या पोल खुली क्या खुलेगी बहुत जल्द ये दीपक महोदय चार सौ बीस में जेल की सलाखों के पीछे होंगे आप को की सुबूत दे दिए जायेंगे हैं भड़ास फॉर मीडिया पर भड़ास तो निकलेगी ही | लेकिन बहुत जल्द आप को हम आइसे सुबूत भेज रहे हैं जिस से आप की आँखे खुल जाएगी | सब कुछ इतना साफ़ है की आप को इस खबर की हैडिंग पर अफ़सोस होगा | आप सोचो की डी के के खिलाफ साजिस किस स्तर की है खुद डी की सिंह के खिलाफ ११अप्रेल को सुबह १० बजे आप भड़ास के छद्म नाम से एक मैस्सेज चलाया गया | जिसका टाइटिल था TD – भड़ास जबकि आप का मैस्सेज bhadas4meedia से चलता है | आप ने खुद कहा की हमारा मैसेज सेवा दो महीने से बंद है तो आखिर कौन है जो डी के सिंह के खिलाफ साजिस कर रहा है | आप को कम से कम स्पतिकरण दे देना चाहिए था क्योकि ये मैस्सेज दिल्ल्ली यु पी के सारे पत्रकारों को जान बूझ कर भेजा गया की डी के का नुक्सान हो जाए लेकिन इस सब पर आप की खमोशी चकित करने वाली है | डी के ने आप से भूपेन्द्र के लिए ही तो झगड़ा किया था | उन्हों ने अपने लिए तो कुछ माँगा भी नहीं आप ने उन को इस तरह पेश किया की शराब के नशे में धुत्त किसी घटिया व्यक्ति ने आप को धमकाया हो |मानसिकता की बात है आप खुद लिखा है| की वो मुझ से दिल्ली आशीर्वाद लिया था | खैर भाई साहब जिलो की पोलिटिक्स और दिल्ली की पोलिटिक्स में अंतर क्या है | सिर्फ फर्क रुतबे और पैसे का है बाकी सब जीव जंतु तो हैं ज्यादातर यु पी बिहार के ही | फिर जिले की भड़ास कहाँ निकले | बरखा दत्त के बदनामी की बरसात में आप लीन हैं | तो जिले के के बदसूरत तंगहाल पत्रकार कहाँ जाये आप को भी उसी पूजीवाद के तिलिस्म में आनंद आने लगा जरा अपने ज्ञान ध्यान को फिर टटोलिये की आप ने क्या किया | भूपेंद्र द्वारा भेजी खबर अब आप को मजा नहीं आता सच है बरखा और सिघवी की चमक दमक के आगे बाराबंकी के पत्रकार कहाँ ठहर ते हैं आप ने डी के की भाद कर दे और ये भी सिखा दिया परेशां गरीब की मदद मत करो तो उस मशाल का क्या होगा जो आप लेकर चले थे फिर तो मकसद ही बदल गया | एक आप का मंच था अगर आप दीपक की खबर छाप भी देते तो क्या पहाड़ टूट जाता कौन सा दीपक को फांसी हो जाती | जिसमे अभद्र भाषा का प्रयोग कर डी के और विशन पर आरोप लगाये गए थे | हलाकि इस की जांच साइबर क्राइम सेल कर रही है | की ये फर्जी मस्सेज कहाँ से चला था | क्या इन दोनों के खिलाफ ये साजिस नहीं इस मामले पर आप का मौन क्या उचित है | आप के संबंद दीपक से मधुर हो सकते हैं | लेकिन किसी से फोन पर आप की गरमा गर्मिहो जाए तो मामला ही पलट देते हैं | आप के पोर्टल की लोकप्रियत आप की निष्पक्ष और बेबाक शैली के कारन रही है | सम्हालिए और अब जब मामला है तो पूरी जानकारी और निष्पक्षता के साथ सत्य का साथ दीजिये आप की महान उर्जा और अभ्व्यक्ति शैली को हम सलाम करते हैं लेकिन धैर्य के साथ पूरे तथ्य लेकर ही किसी के बारे में राय बनाये तो बेहतर होगा |

  15. sanjay

    April 16, 2011 at 4:13 am

    वह रे, विद्वान और सत्यवादी लोग, एक बार फिर अपने बुने झूठ के जाल में फस गए ! अजय नामक आगरा ई टी वी के कथित कर्मी के नाम से लम्बा कमेन्ट आया है जिसमे अजय का मोबाइल न. 9415774324 दर्शाया गया है, यही पर गलती हो गयी क्योकि लिखने वाला नफरत और झूठ में डूबा हुआ था, ये मोबाइल न. 9415774324 हुँबहू राष्ट्रीय सहारा के भूपेंद्र मिश्र का न0 है जिससे उन्होंने अपने लेख और फोटो पर दर्शाया है ! साफ़ जाहिर है की एक दो लोग ही इस पुरे मामले में तमाम झूठे और अस्तित्वविहीन नामो के सहारे कमेन्ट और मेल भेज रहे है, ऐसे लोग भड़ास के मंच को दुरुपियोग कर रहे है क्योकि उनके पास कोई काम धाम नहीं है ! इन्हें दुसरो को लड़ा कर सिर्फ मजा लेना है इन्हें ये जान लेना चाहिए की दुसरो के लिए आग जलने वाले खुद ही उसमे जल जाते है !

    सुधर जाओगे तो सुखी रहोगे…….

  16. vikash

    April 15, 2011 at 7:54 am

    mukesh ji bina kisi saboot k kisi v channel par aroop lana galat hai. paise lene k mamale me jab ashutosh g se baat hue to unhone saaf inkar kar diya ki hamse von channel k koi v vyakti ne paise ki maang nahi ki hai.ashutosh ne bataya ki mauya news channel ka reporter MUKESH hi news chalane k naam par logo se paisa aithata hai. mukesh g aap ek reporter hai aap ko pata hona chahiye ki bina puri janakari k report chalane par reportero ki maa- bahan tak ho jati hai. aap ki janakari k liye bata du ki voice of nation channel pahale ‘janta ki awaz’ thi or ab ‘desh ki awaz’ ho gaee hai. so pahale apani jankari puri kare tab ungali uthaye. is mamale me agar channel chahe to aap jaise jhoola chhap patrakaro ki aukat bata sakti hai.

  17. vikash

    April 15, 2011 at 7:55 am

    mukesh ji bina kisi saboot k kisi v channel par aroop lana galat hai. paise lene k mamale me jab ashutosh g se baat hue to unhone saaf inkar kar diya ki hamse von channel k koi v vyakti ne paise ki maang nahi ki hai.ashutosh ne bataya ki mauya news channel ka reporter MUKESH hi news chalane k naam par logo se paisa aithata hai. mukesh g aap ek reporter hai aap ko pata hona chahiye ki bina puri janakari k report chalane par reportero ki maa- bahan tak ho jati hai. aap ki janakari k liye bata du ki voice of nation channel pahale ‘janta ki awaz’ thi or ab ‘desh ki awaz’ ho gaee hai. so pahale apani jankari puri kare tab ungali uthaye. is mamale me agar channel chahe to aap jaise jhoola chhap patrakaro ki aukat bata sakti hai.

  18. shubhchintak

    April 15, 2011 at 5:21 pm

    वाह रे, विद्वान सत्यवादी लोग, खुद को आगरा ई.टी.वि. के कर्मी बताने वाले अजय जी ने, अपना जो मोबाइल न० 9415774324 दर्शाया है, वही मोबाइल न० 9415774324 राष्ट्रीय सहारा के भूपेंद्र मिश्र जी का है , जो की उनके फोटो और लेख पर भी दर्शाया गया है ! इन सब से यही मालूम होता है की एक दो लोग ही इस पुरे मामले में पुराने पत्रकारों को लड़ाने के लिए फर्जी नामो से भड़ास पर झूठ का पुलिंदा तैयार कर रहे है ! और सबको गुमराह कर रहे है, और यह साबित होता है की, कुछ खलियर टाइप के लोग दिन भर फर्जी E . Mail टाइप किया करते है, ताकि दुसरे लोग नफरत की आग में जले, और ये लोग अपनी रोटिया सेकते रहे ! लेकिन दुसरो को जलने की कोशिश में लोग, खुद ही जल रहे है !

    सुधर जाओ , सुखी रहोगे,

  19. Ajay sharma

    April 16, 2011 at 11:55 am

    Yashwant ji mere cmment ke saath maine aap ko koi nambar nahi bheja fir ye number kyo laga? aap ki galti se kisi bhee tucchhe ko kuch bhee kahne ka adhikar mil jayega sheh tathya theek hain comment pramukta se lagane ke liye dhanyawad

  20. AJAY BBK

    April 21, 2011 at 6:39 am

    AJAY BBK

    ” चिर कुटाही खबरों का हीरो ,बड़ी खबर में जीरो “–कुत्ते के मरने पर सर के बल दौड़ जाने वाला बाराबंकी का ईटीवी रिपोर्टर बड़ी खबरों से ऐसे गायब हो जाता है जैसे गधे के सर से सींग , ऐसा ही हुआ तब जब जिले की ९९ प्रतिशत खबरे पहले कवर करने का दावा करने वाला ईटीवी रिपोर्टर फतेहपुर में करोडो के नोट दीमक द्वारा खा जाने पर भी दुसरे दिन तक सोता रहा ,अपनी खबरों के दम पर अधिकारियो को डराने वाला यह रिपोर्टर इस समय पूरी तरह से खबरों के मामले में अपने चिरकुट चेले पर निर्भर है जो इस समय सहारा समय उत्तर प्रदेश का रिपोर्टर है ,गौरतलब है की दोनों एक ही कैमरे से खबर कवर करते हैं और साथ ही एक ही लप्ताप से खबर भेजते हैं यहाँ तक की २४ घंटो मरे से १८ घंटे दोनों साथ रहते हैं जबकि देखा जय तो दोनों ही प्रादेशिक चैनल हैं और दोनों में गजब की प्रतिस्पर्धा है इस तरह से यह दोनों ही अपने अपने संसथान के साथ गद्दारी कर रहे हैं और यही कारन है की जब फतेहपुर की खबर न तो ईटीवी ने कवर की न तो सहारा ने संस्थानों को ऐसे दलालों पर कार्यवाही जरूर करनी चाहिए क्योकि संसथान रिपोर्टर को खबर के लिए रखता है न की अफसरों की चापलूसी के लिए अगर यही करना है तो मेरी दोनों ईटीवी व सहारा के रिपोर्टरों को यही सलाह है की वह कल से चैनल की आईडी छोड़ तेल की शीशी और एक चटाई ले कर निकला करें ………………….

  21. ajay bbk

    April 21, 2011 at 6:41 am

    ” चिर कुटाही खबरों का हीरो ,बड़ी खबर में जीरो “–कुत्ते के मरने पर सर के बल दौड़ जाने वाला बाराबंकी का ईटीवी रिपोर्टर बड़ी खबरों से ऐसे गायब हो जाता है जैसे गधे के सर से सींग , ऐसा ही हुआ तब जब जिले की ९९ प्रतिशत खबरे पहले कवर करने का दावा करने वाला ईटीवी रिपोर्टर फतेहपुर में करोडो के नोट दीमक द्वारा खा जाने पर भी दुसरे दिन तक सोता रहा ,अपनी खबरों के दम पर अधिकारियो को डराने वाला यह रिपोर्टर इस समय पूरी तरह से खबरों के मामले में अपने चिरकुट चेले पर निर्भर है जो इस समय सहारा समय उत्तर प्रदेश का रिपोर्टर है ,गौरतलब है की दोनों एक ही कैमरे से खबर कवर करते हैं और साथ ही एक ही लप्ताप से खबर भेजते हैं यहाँ तक की २४ घंटो मरे से १८ घंटे दोनों साथ रहते हैं जबकि देखा जय तो दोनों ही प्रादेशिक चैनल हैं और दोनों में गजब की प्रतिस्पर्धा है इस तरह से यह दोनों ही अपने अपने संसथान के साथ गद्दारी कर रहे हैं और यही कारन है की जब फतेहपुर की खबर न तो ईटीवी ने कवर की न तो सहारा ने संस्थानों को ऐसे दलालों पर कार्यवाही जरूर करनी चाहिए क्योकि संसथान रिपोर्टर को खबर के लिए रखता है न की अफसरों की चापलूसी के लिए अगर यही करना है तो मेरी दोनों ईटीवी व सहारा के रिपोर्टरों को यही सलाह है की वह कल से चैनल की आईडी छोड़ तेल की शीशी और एक चटाई ले कर निकला करें ………………….

  22. pankaj

    April 22, 2011 at 7:52 am

    ९९% खबरों का दवा कर वाले ई टी वी और सहारा बाराबंकी के स्ट्रिंगरो कुछ तो शर्म करो घटना होती है फतेपुर में जिसको नेशनल चैनल वाले सही सही दिखाते है जी U P को लाइव करता है वही पर तुम अपनी संस्था (सहारा ई टी वी ) बाराबंकी की मेन ब्रांच को दिखाते हो थोड़े बहुत शर्म तो आती तो होगी लोगो की जमीने हतियाने को छोड़कर कर काम पर ध्यान दो !

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