एक अमरउजालाइट की नज़र में ‘जनवाणी’

: पहले दिन के अखबार की समीक्षा : महीनों का शोरगुल सन्नाटे में टूटा। उनके आमद की हवा ऐसी बनाई गई जैसे मायावती के किसी जिले में आने की होती है। लेकिन आए तो दीवालिया होकर… विचारों से… और खबरों से भी। मेरठ की मार्केट में आज से गॉडविन ग्रुप के अखबार जनवाणी ने प्रवेश कर लिया है। जनवाणी ने अपने आने की खबर से जो जलवा पैदा कर रखा था, आया तो फ्लाप शो हो गया। मेरठ के जमे-जमाए अखबारों ने अपने दाम गिराकर और दहशत पैदा कर दी थी। लेकिन जनवाणी आज बाजार में आया तो मार्केट और पत्रकार बिरादरी की प्रतिक्रिया अजीब रही।

दृष्टि बाधित कौन? मैच जीतने वाला या खबर लिखने वाला

: गणित में कमजोर हिन्दुस्तान! : हिन्दुस्तान अखबार में लखनऊ के स्टाफ की मैथमेटिक्स आजकल कुछ कमजोर पड़ गयी है। इसे मार्केट का प्रेशर कहें या फिर स्टाफ की कमजोरी। लखनऊ में खेल पेज पर छपी चार कालम की एक खबर में न सिर्फ हिन्दुस्तान वालों की मैथ गड़बड़ है, बल्कि उसी खबर में लगे एक छोटे से बाक्स में लिखे गये सत्तर अस्सी वर्ड में भी ग्रामर की आधा दर्जन मिस्टेक। मैथ की बात करें तो यूपी ने 220 रन बनाये और कर्नाटक ने 172 रन।

मजाक बनी उत्तराखण्ड में प्रेस मान्यता

: आंख मूंदकर दी गयी राज्य में पत्रकार मान्यता : आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को मिली पत्रकार मान्यता : एलआईयू जांच पर उठने लगे सवाल : देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य में पत्रकार मान्यता एक मजाक बनकर रह गयी है। सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा दी जाने वाली पत्रकार मान्यता से ऐसे लोगों को लाभान्वित कर दिया गया है जो आपराधिक प्रवृत्ति के हैं। इतना ही नहीं, कई लोग तो स्वयं को दूसरे राज्यों में मृत भी घोषित कर चुके हैं।

उत्तर प्रदेश में सूचना विभाग के स्वीपर तक पत्रकारों की सेवा में लगे

ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश में सूचना विभाग के पास कर्मचारियों की कमी है। यह कमी उस वक्त और महसूस की गयी जब रविवार को फतेहपुर रेप काण्ड में पुलिस की ओर से सफाई देने के लिए आनन फानन में स्पेशल डीजी कानून व्यवस्था बृजलाल की प्रेसवार्ता आयोजित की गयी। लालबहादुर शास्त्री भवन एनेक्सी में आयोजित इस प्रेस वार्ता में सूचना विभाग के कर्मचारी और अधिकारी संडे का दिन होने की वजह से नदारद थे।

तहलका मैग्जीन की ये कौन सी मानसिकता है?

: लालू को टाप टेन महानायकों में से एक बताया और नितिश कुमार को सूची से बाहर रखा : दिल्ली से प्रकाशित एक जानी-मानी हिन्दी की पत्रिका ने बिहार के दस नायकों के ऊपर एक बड़ी सी स्टोरी की है. पत्रिका का नाम है, तहलका.  इस पत्रिका ने अपनी इस स्टोरी में बिहार में दो बार से मुख्यमंत्री नितिश कुमार को जगह नहीं दी. जबकि ये सर्वविदित है कि नितिश कुमार बिहार में नया इतिहास लिख रहे हैं. नितिश इस राज्य में विकास पुरुष की तरह उभरे हैं और देखते ही देखते समूचे देश में छा गए हैं.

ये हाल है हिंदी पायनियर के पत्रकारों का!

एडिटर, भड़ास4मीडिया, महोदय, भड़ास इतनी भरी है कि अगर अब न बोला तो शायद मैं मनोरोगी हो जाऊं. मजबूरी ये है कि पहचान उजागर नहीं कर सकता. पर उम्मीद करता हूं कि मैं जो कुछ कहूंगा, उसके तथ्यों को आप अपने स्तर पर पता करने के बाद मेरी भड़ास को जरूर प्रकाशित करें ताकि कई बेचैन आत्माओं को राहत मिल सके. शायद पत्रकारिता ने अपनी दशा और दिशा कुछ तथाकथित भंड़ुए संपादकों के कारण खो दी है.

अपने पुराने पत्रकारों को परेशान कर रहा है पत्रिका प्रबंधन!

राजस्थान पत्रिका में आजकल पुराने वफादार साथियों की काफी अनदेखी की जा रही है। उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है। पन्द्रह साल पहले जब दैनिक भास्कर राजस्थान में आया था, तब पत्रिका से कोई भी नौकरी छोड़ कर भास्कर में नहीं गया था। भास्कर के तमाम तरह के टोटकों का मुकाबला राजस्थान पत्रिका ने अपने कर्मचारियों की ताकत के जरिए किया था। इसके बाद पत्रिका के मालिकों को भास्कर का ऐसा जुनून सवार हुआ कि भास्कर के कर्मचारियों की जमकर भर्ती की गई।

क्या गुलाब कोठारी ने भूमाफिया से सम्‍मान करवाया!

[caption id="attachment_18899" align="alignleft" width="74"]गुलाब कोठारीगुलाब कोठारी[/caption]कुछ दिन पहले तक जिसे भूमाफिया बताकर खबरें छापी, आज उसी से सम्‍मान, उसी की संस्‍थान में प्रोग्राम और उसी संघवी समूह से लाखों का विज्ञापन. वाह कोठारी जी. इंदौर में भूमाफिया के खिलाफ अभियान चलाने का तमगा लेकर घूमने वाले पत्रिका का नया कारनामा है यह. पत्रिका समूह के प्रधान संपादक और संस्‍कार की दुहाई देने वाले गुलाब कोठारी ने 14 दिसम्‍बर को इंदौर में स्‍कूली बच्‍चों के लिए दिशा बोध कार्यक्रम आयोजित किया था.

आगरा में हिंदुस्तान बांट रहा है डॉक्टरेट की डिग्री!

आगरा से प्रकाशित हिंदुस्तान अखबार के रविवार के अंक यानी 5 दिसंबर में पृष्ठ 10 पर 7-8 कालम पर ‘सूरज सा चमकूं मैं, चंदा सा दमकूं मैं’ शीर्षक से समाचार है कि आज बाल साहित्यकार द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की जयंती है. इस समाचार में दिवंगत बाल साहित्यकार को डाक्टर द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी दो बार लिखा है. जबकि इस सच्चाई को आगरा के सभी पत्रकारों सहित साहित्यकार भी जानते हैं कि माहेश्वरी जी ने डॉक्टरेट नहीं की, जब उन्होंने पीएचडी की ही नहीं तो फिर हिंदुस्तान का वरिष्ठ संवाददाता यह क्यों लिख रहा है. लगता है कि हिंदुस्तान ने डॉक्टरेट की डिग्री बांटने का काम शुरू कर दिया है.

सुभाष पांडेय की गलती मामूली नहीं थी!

सुभाष पांडे जी के साथ तो ऐसा होना ही था। उनकी गलती मामूली नहीं है…। चले थे नीतीश कुमार के खिलाफ लिखने। सच्ची खबर लिखने। हो गया न…। भाई, उन्हें सोचना चाहिए था कि जहां सारी मीडिया नीतीश चालीसा के अलावा कुछ नहीं लिखते दिखाते तो भला उनको क्या सूझा कि…खैर। वे सीनियर थे, सो उनका तबादला हुआ वरना तो कितनों की तो नौकरी खा गए नीतीश बाबू उर्फ सुशासन बाबू। अब आप सोच रहे होंगे कि क्या बकवास लिख रहा है, मगर ये सच्चाई है।

प्रकाश दुबे के सितारे गर्दिश में?

इन दिनों दैनिक भास्कर नागपुर में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कई लोगों के सितारे गर्दिश में करने वाले यहां के संपादक प्रकाश दुबे के सितारे अब गर्दिग में आने लगे हैं। इसका ताजा उदाहरण हर रविवार को नागपुर से तैयार होने वाले कला संस्कृति पृष्ठ का बंद होना है। प्रबंधन ने इस पेज का प्रकाशन बंद करा दिया है। इस पेज पर स्थानीय लेखकों की रिपोर्ट और आलेख होते थे। सूत्रों के मुताबिक इसे प्रधान संपादक मनमोहन अग्रवाल ने सीधे निर्देश देकर बंद कराया है। वे इस पृष्ठ में प्रकाशित होने वाली सामग्री की गुणवत्ता से नाराज थे।

भस्मासुरों के भंवरजाल में फंसा सहारा परिवार

[caption id="attachment_18357" align="alignleft" width="77"]सुनील पांडेयसुनील पांडेय[/caption]मैं सहारा परिवार का सदस्य रहा हूं। मई 2003 में जुड़ा। मेहनत-ईमानदारी से काम करते हुए कई जिम्मेदारियां संभाली। क्षेत्रीय चैनल बिहार झारखंड के शुरुआती टीम में बतौर इनपुट हेड काम संभाला। तब बिहार-झारखंड में इस चैनल का क्रेज था। विश्वसनीयता, गंभीरता और खबरों में सबसे पहले का पर्याय बन चुका था सहारा समय बिहार-झारखंड।

सहारा के पुराने लोग गालियां खा रहे हैं?

एक चिट्ठी आई है. किन्हीं महिला की मेल आईडी से. उन्होंने अपना परिचय व फोन नंबर आदि नहीं भेजा दिया है. उन्होंने मेल में सहाराश्री को एक पत्र भेजे जाने की बात बताई है और पत्र की कापी को भड़ास4मीडिया के पास भेजा है. इस पत्र के जरिए उन्होंने अपना दर्द बयान किया है. सहारा में वरिष्ठ पद पर नए आए कुछ लोगों पर उन्होंने गाली-गलौच करने का आरोप लगाया है.

यशवंत जी, डीआईजी प्रेम प्रकाश को हीरो न बनाएं

: दिव्या प्रकरण में कानपुर पुलिस झुकी : प्रबंधक के बेटे को गिरफ्तार करना पड़ा : यशवंत जी, दिव्या प्रकरण में हिन्दुस्तान की तथ्यपरक रिपोर्टिंग के बाद आखिरकार कानपुर पुलिस को स्कूल प्रबंधक के बेटे को गिरफ्तार करना पड़ा। पुलिस शुरू से ही इस मामले में लीपापोती में लगी रही यह प्रमाणित करने के लिए इस केस में पुलिस द्वारा 19 दिनों में दिए गए बयान, उनकी करतूत काफी है। इतना ही नहीं इसी बौखलाहट का नतीजा है कि कानपुर पुलिस प्रशासन ने हिन्दुस्तान पर चौतरफा हमला बोल दिया।

क्या पंजाब सरकार चला रही है दैनिक जागरण को?

[caption id="attachment_18314" align="alignnone" width="505"]पंजाब में दैनिक जागरण की पत्रकारिता पर उठने लगा सवालपंजाब में दैनिक जागरण की पत्रकारिता पर उठने लगा सवाल[/caption]


: जागरण की एकतरफा रिपोर्टिंग से पंजाब के मीडिया वाले हतप्रभ : जागरण को भले ही सरोकारों की कोई परवाह न हो लेकिन उसे याद रखना चाहिए कि पंजाब में अधिकतर पाठक एक से ज्यादा अख़बार पढ़ रहे हैं और ऐसे में जागरण की विश्वसनीयता खतरे में है क्योंकि यह पब्लिक है यह सब जानती है : देश में सबसे ज्यादा पढे जाने वाला अख़बार होने का दावा करने वाला दैनिक जागरण यूं तो अपने कुकृत्यों के लिए पहले ही काफी बदनाम है लेकिन हाल ही के दिनों में पंजाब में उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के दबाव में इसने जिस किस्म की पत्रकारिता की है, उसके कारण उसकी हर ओर थू थू हो रही है.

सुधांशु महराज उर्फ छोटे शशि शेखर

: पुराने हिन्दुस्तानी हिंदुस्तान से जाएं तो जाएं कहां : नई दिल्ली। किसी अखबार में बदलाव का सबसे बुरा दौर हिंदुस्तान देख रहा है। यहां के एडीटोरियल विभाग में इस्तीफा देने का दौर लगातार जारी है। शशि शेखर की अमर उजाला नोएडा की लगभग पूरी टीम यहां आ चुकी है। छोटे ओहदे से लेकर बड़े ओहदे तक अमर उजाला के कर्मियों की फौज यहां पर पूरे अस्त्र-शस्त्र के साथ मोर्चा संभाल चुकी है।