विश्‍व सिनेमा में इतिहास से जुड़ी यादें

पणजी, गोवा। भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह में विश्‍वप्रसिद्ध फिल्‍मकार रोमन पोलांस्‍की की नयी फिल्‍म ‘द घोस्‍ट राइटर’ राजनैतिक कारणों से इन दिनों दुनिया भर में चर्चा में है। पोलांस्‍की ने इस फिल्‍म की पटकथा पिछले वर्ष तब पूरी की थी, जब स्विटजरलैंड पुलिस ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के आग्रह पर उन्‍हें गिरफ्तार किया था।

यातना, संघर्ष और स्‍वप्‍न का नया सिनेमा

[caption id="attachment_18685" align="alignleft" width="147"]नई कन्‍नड़ फिल्‍म ‘मानासाम्‍बा कुदुरेयानेरी’(राइजिंग ड्रीम्‍स) का एक दृश्यनई कन्‍नड़ फिल्‍म ‘मानासाम्‍बा कुदुरेयानेरी’(राइजिंग ड्रीम्‍स) का एक दृश्य[/caption]पणजी, गोवा : भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह के पैनोरमा खंड में दिखाई गई सुप्रसि‍द्ध फिल्‍मकार गिरीश कासरवल्‍ली की नई कन्‍नड़ फिल्‍म ‘मानासाम्‍बा कुदुरेयानेरी’ (राइजिंग ड्रीम्‍स) अपने विषय और बर्ताव के कारण हमारा ध्‍यान खींचती है। भूमंडलीकरण के बाद भारतीय समाज में उपभोक्‍तावाद की नकली चमक-दमक के पीछे लगभग 80 करोड़ लोगों के जीवन की यातना, संघर्ष और स्‍वप्‍न को यह फिल्‍म सामने लाती है। अब तक 12 फिल्‍में बना चुके गिरीश कासरवल्‍ली को 4 बार सर्वश्रेष्‍ठ फीचर फिल्‍म एवं निर्देशन का राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार मिल चुका है।

विश्‍व सिनेमा में स्त्रियों का नया अवतार

[caption id="attachment_18656" align="alignleft" width="179"]ईरानी फिल्‍म  - 'इराक, इवनिंग ऑफ द टेंथ डे' का एक दृश्‍यईरानी फिल्‍म – ‘इराक, इवनिंग ऑफ द टेंथ डे’ का एक दृश्‍य[/caption]पणजी, गोवा : भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह में विश्‍व सिनेमा खंड में दिखाई जा रही अधिकतर फिल्‍मों में स्त्रियों का नया अवतार चकित कर देने वाला है। यह संयोग नहीं है कि ईरान, जापान और चीन से लेकर स्‍वीडन, पौलेंड, फ्रांस और जर्मनी तक की फिल्‍मों में हमें जो स्त्रियां दिखाई दे रही हैं, उनके सामने निजी सुखों से अधिक सामाजिक अस्मिता की चुनौती ज्‍यादा है।

दिल चुरा कर चली गयीं ममता

ममता बनर्जी का संबोधन: गोवा फिल्म फेस्टिवल : गोवा में चल रहे भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह में जब यह घोषणा की गयी कि रेल मंत्री ममता बेनर्जी बतौर मुख्य अतिथि गोवा आयेंगी तो लोगों ने नाक भौं सिकोड़ लिए. एक तो वह रेल मंत्री, दूसरा जमीन से जुड़ी नेता और तीसरा हमेश गुस्से में रहने वाली मंत्री. लेकिन 22 नवम्बर शाम साढ़े छह बजे गोवा के कला अकादमी में जब वो भाषण देने मंच पर पहुंची तो वह लोगों के लिय एक प्रेरणादायी कहानी बन गयीं. 900 की क्षमता वाले कला अकादमी में इससे ज्यादा लोग थे.