मैंने खुले शब्दों में गंगेश मिश्र पर उंगली उठाई थी

[caption id="attachment_19547" align="alignleft" width="80"]व्यालोकव्यालोक[/caption]: व्‍यालोक बनने की पूर्व शर्त है शरीर में एक अदद रीढ़ होना : बर्बाद गुलिस्तां करने को बस….. : तो आखिर अभिषेक श्रीवास्तव का भी भास्कर से मोहभंग हो ही गया। वजह, एक बार फिर से वही…। भास्कर दरअसल एक ऐसा संस्थान बन चुका है, जहां यथास्थितिवाद को तो सराहा जा सकता है, लेकिन प्रगतिशीलता, नई सोच और आपकी गत्यात्मकता को नहीं। भास्कर के दिल्ली कार्यालय में हॉट सीट पर ऐसे बुजुर्ग विराजे हैं, जो किसी भी तरह अपनी नौकरी बचाने की ही जुगत में लगे हैं।

भास्कर, दिल्ली 2 सितंबर को री-लांच होगा

संजय सिंह, गंगेश मिश्र और विमल झा ने ज्वाइन किया : दैनिक भास्कर का दिल्ली संस्करण दो सितंबर से री-लांच होने जा रहा है। इसी क्रम में कई वरिष्ठ और प्रतिभाशील लोगों को भास्कर प्रबंधन ने अपने साथ जोड़ा है। इनमें सबसे पहला नाम है संजय सिंह का। न्यूज एक्स में डिप्टी पोलिटकल एडिटर पद पर काम करने के बाद संजय ने अब भास्कर, दिल्ली में पोलिटिकल एडिटर के रूप में नई पारी शुरू कर दी है। संजय इससे पहले डीएनए, पायनियर, स्टेट्समैन आदि अखबारों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं। पटना के रहने वाले संजय सिंह का पत्रकारीय करियर 18 वर्षों का है। इसी तरह ‘चौथी दुनिया’ में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार गंगेश मिश्र ने डिप्टी एडिटर के रूप में भास्कर, दिल्ली ज्वाइन किया है।

गंगेश मिश्र की नई पारी ‘चौथी दुनिया’ के साथ

संडे इंडियन (हिंदी) मैग्जीन से गंगेश मिश्र ने इस्तीफा दे दिया है। वे यहां एक्जीक्यूटिव एडिटर  पद पर कार्यरत थे। उन्होंने नई पारी दिल्ली से हाल में ही पुनर्प्रकाशित हुए ऐतिहासिक अखबार ‘चौथी दुनिया’ में बतौर एडिटर (प्रोडक्शन)  के रूप में शुरू की है। गंगेश 21 वर्षों से पत्रकारिता की मुख्य धारा में सक्रिय हैं। पत्रकारिता से पहले वे रंगमंच से जुड़े हुए थे।