अमर उजाला, आगरा की शहीद को यह कैसी श्रद्धांजलि?

कभी अपने लेखन के लिए प्रसिद्ध आगरा के अमर उजाला की स्थिति मानसिक दिवालिएपन के कगार पर पहुंच चुके संस्थान जैसी हो चुकी है। इसका जीता-जागता उदाहरण हाल ही में प्रकाशित एक खबर है। इस खबर में सीमा के एक सजग प्रहरी की याद को ताजा रखने के लिए दस साल से किए जा रहे दोस्तों के संघर्ष की खबर पर एक क्षण में पानी फेर दिया गया। खबर इतनी अधिक गलत है कि खुद अमर उजाला को इसका खंडन करते हुए शर्म महसूस हो रही है।