समाधान : वह जहर खा ले, फांसी लगा ले, पागल हो जाए!

: चंद सवाल शेष रह गए थे बादल दा : बादल दा, जब अनायास ही एक साइट पर आपकी मृत्यु का समाचार पढ़ा तो थोड़ी देर के लिए भरोसा ही नहीं हुआ. भरोसा इसलिए भी नहीं हो पा रहा था क्योंकि आपसे करने के लिए चंद सवाल जो रह गये थे. हां, बादल दा एक इच्छा थी कि आपसे एक दिन जरूर मिलूंगा और मिल कर कुछ अटपटे और अनसुलझे सवाल करूंगा.

सरकारी पैसे पर फ्री थिएटर नहीं चल सकता : बादल सरकार

प्रख्यात रंगकर्मी बादल सरकार के निधन के बाद शम्सुल इसलाम ने मेल के जरिए बादल सरकार से की गयी अपनी एक बातचीत की कटिंग भेजी है. यह इंटरव्यू द संडे टाइम्स ऑफ इंडिया के 11 अक्तूबर, 1992 संस्करण के अंक में प्रकाशित हुआ था. हाशिया ब्लाग के माडरेटर रेयाज उल हक ने बातचीत का हिंदी अनुवाद किया है. बादल और उनके रंगमंच के बारे में इससे काफी कुछ समझा जा सकता है.