सवाल हिसार में कांग्रेस की गई या बची ज़मानत का नहीं

: हरियाणा को गुजरात हुआ समझिए : सवाल हिसार में कांग्रेस की गई या बची ज़मानत का नहीं, हरियाणा में नेस्तनाबूद हुई अस्मत का है. जैसे उसने कभी महाराष्ट्र में मराठों, यूपी में ब्राह्मणों और पंजाब में सिखों को खोया वैसे ही उसने हरियाणा में जाटों और गैरजाटों दोनों को खो दिया है. हिसार के चुनाव और उसके परिणाम को मतदाताओं के जातिगत तौर पर हुए बंटवारे के रूप में देखिए.

हिसार में खामखा वाहवाही लूटेंगे अन्नावाले

जगमोहन फुटेला: क्योंकि हिसार कभी कांग्रेस का था ही नहीं : मैंने एक न्यूज़ चैनल पे देखा. सी वोटर के एग्जिट पोल के सहारे वो बता रहा था कि हिसार में अन्ना टीम के हक़ में फैसला आता है या कांग्रेस के! ये अन्ना आन्दोलन की प्रशंसा है तो ठीक हैं. भक्ति है तो भी ठीक है और चमचागिरी हो तो तब भी उनकी मर्ज़ी. लेकिन ये व्यावहारिक नहीं है. ये सच नहीं है.

हिसार में अन्ना टीम की जीत तभी मानें जब कांग्रेस की जमानत जाए

विनोद मेहता: अगर कुलदीप हारे तो समझो ट्रक पंचर था : हिसार उपचुनाव के परिणाम से पहले दो बातों की चर्चा खूब है. कुलदीप जीत गए और अन्ना फैक्टर काम कर गया. पहले अन्ना फैक्टर की बात करे. अन्ना फैक्टर का असर उस सूरत में नजर आता है जब कांग्रेस की जमानत जब्त होती है. लेकिन ये नही हो रहा. सीएम कांग्रेस की जमानत बचाने में कामयाब हो गए हैं.

हिसार चुनाव में दो रीजनल न्यूज चैनलों की राजनीति

जगमोहन फुटेला: टोटल तो एक बहाना है… : टोटल टीवी या उस के मालिकों में इतना दम नहीं है कि हरियाणा में अपना प्रसारण बंद होने पर वे खापों की पंचायत बुलवा कर उन से सरकार के खिलाफ संघर्ष का ऐलान करा सकें. ये मान लेना भी सरासर गलत होगा कि चैनल चौटाला का है या कि टोटल के हक़ में खाप का फतवा उन ने जारी कराया होगा. सहानुभूति हो सकती है.