होली का हुड़दंग पिचकारी बाबा संग

होली ना कोई साजन ना कोई गोरी… खेले मशाने में होली दिगंबर…खेले मशाने में होली… आप सभी बंधू-बांधवों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं. खैर होली का त्यौहार जहाँ सम्पूर्ण जहाँ में जोश और उल्लास का रंग भरता हैं वही इस जोश से पत्रकार और टीवी चैनल के मालिकान भी अछूते नहीं रहते. होली की बात हो और भोजपुरिया रंग की बात ना हो तो होली का मज़ा कुछ अधूरा सा लगता है और अगर भोजपुरिया टीवी इंडस्‍ट्री की बात की जाये तो सबसे पहला नाम आता है लइया का.

बुरा न मानें, होली है संतोष भारतीय जी!

संतोष भारतीय का मैं दिल से इज्जत करता हूं. भड़ास4मीडिया जब मैंने शुरू किया, और उस वक्त ज्यादातर वरिष्ठ पदों पर बैठे लोग इस प्रयोग को हेय नजरों से देख रहे थे, तब संतोष भारतीय ने न सिर्फ इसे सपोर्ट किया बल्कि इसे चलाए रखने को आर्थिक रूप से मदद भी की, एकमुश्त एक वर्ष तक विज्ञापन देकर. जाहिर है, जब कोई चीज चल जाती है तो उसके दस यार प्रकट हो जाते हैं.

खबर से नाराज ग्रामीणों ने भास्‍कर की होली जलाई

भास्‍करमध्‍य प्रदेश के नीमच जिले में एक खबर छपने से नाराज ग्रामीणों ने भास्‍कर की होली जला दी. खबर एक स्‍थानीय डाक्‍टर के खिलाफ लिखी गई थी. खबर पढ़ने के बाद ग्रामीण नाराज हो गए और अखबार की दर्जनों प्रतियां आग के हवाले कर दिया.

‘हाट सीट’ का नाम ‘गरम पिछवाड़ा’ हुआ!

आज तक न्यूज चैनल से खबर आ रही है कि होली की पूर्व संध्या पर दारू पीकर आजतक आफिस में पहुंचने पर प्रभु चावला बुरी तरह फंस गए. ब्रेथ एनालाइजर यंत्र लेकर टहल रहे नकवी जी के आदमियों ने प्रभु चावला को घेर लिया और उनके मुंह में शराब सूंघक यंत्र जबरन घुसेड़कर कई पैग दारू की खोज कर डाली. सूत्रों के मुताबिक मदिरा प्रभु चावला के शरीर के ज्यादातर हिस्सों में असर दिखा चुकी थी. शरीर के रोएं-रोएं, कोने-कोने तक में इसका फैलाव हो चुका था. प्रभु के शरीर में मदिरा की पर्याप्त मात्रा की जानकारी मिलते ही नकवी जी ने एक लिखित रिपोर्ट अरुण पुरी के पास भेज दी.  रिपोर्ट की एक प्रति भड़ास4मीडिया के पास है. इसमें कहा गया है कि इंडिया टुडे मैग्जीन में कम, आजतक में ज्यादा रुचि लेने से प्रभु चावला जैसे वरिष्ठ पत्रकार मतिभ्रम के शिकार हुए लगते हैं. इस मतिभ्रम को दूर करने के लिए ही वे पर्याप्त मदिरा सेवन करने लगे हैं.

तेज-तेज न बोल आशुतोष भइया….

बुरा न मानो होली है… : सवर्णों की दुनिया-मीडिया में….. दिलीप मंडल हैं बड़े परेशान….. होली के मौके पर दिक्खे चिंतित….. रंग डालन को न मिले दलित महान…. ले पिचकारी रामकृपाल पे तानी….. डाल दूंगा रंग सवर्ण महाराज….. रामू भइया बोलें धीरे से….. टाइम्स ग्रुप में न करो ऐसी बात….. वैसे भी अब दलित हैं ब्राह्मण….. सवर्ण भाई तो बन गए बेचारे….. न आरक्षण न है प्रोटेक्शन….. देखो लड़के घूमे हैं मारे-मारे…. वो देखो आ रही एक टोली…. भाग ले भइया एकजुट ये हमजोली…. अनिल चमड़िया एंड कंपनी आई…. साथ प्रगतिशील पिचकारी लाई…. तलाश रहे हैं शहर में कर्फ्यू…. घेर कर डाला गोबर पानी…. याद दिला दी सबकी नानी…. वर्धा से आया अनाम दलित मेल…. लिखा, यशवंत करते भड़ास पर खेल…. मुद्दा खोज आग लगावें….. आग लगे तो आगे बढ़ जावें… पैसे लेकर आग बुझावें…. न बुझे तो आंख बंद कर जावें…..