भारतीय मीडिया में कोई भी खबर आसानी से प्लांट कराई जा सकती है!

सुमंत भट्टाचार्यादेश की मीडिया का हाल वाकई दुखदाई है। खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का। कल की बड़ी खबर से साफ था, भारतीय मीडिया में कोई भी खबर आसानी से प्लांट कराई जा सकती है। उदाहरण है कांग्रेसनल रिसर्स सर्विसेस (सीआरएस) की रिपोर्ट। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाबत सीआरएस की रिपोर्ट में जुटाई गई टिप्पणियों पर खबरिया चैनल्स ने कल दिन भर हंगामा ही बरपा दिया।

न्यूज चैनलों के पागलपन से दहशत में हैं अरुंधति

अमेरिका की पोलिटिकल और सोशल मैग्जीन ‘गेरनिका’ के फरवरी, 2011 के अंक में अरुंधति राय का एक लंबा इंटरव्यू छपा है. इंटरव्यू लेखक हैं अमिताव कुमार. कई मामलों में ये शानदार इंटरव्यू है. इस इंटरव्यू को बेहद सरल, सहज तरीके से पेश किया गया है, और पढ़ते हुए लगता है कि जैसे आंखों के सामने इंटरव्यू चल रहा हो. अरुंधति राय बहुत शानदार महिला हैं, बहुत उम्दा चिंतक हैं, बेहद संवेदनशील मनुष्य हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है.

The Dirty Media War : The Fall Of Corporate Media In India

The western media – unlike the Indian establishment media which till eighties and mid nineties had a quivering semblance of some sanity and impartiality with a faint flickering light of honesty – had no such qualms of selling itself to highest bidder and using the platform to disseminate disinformation and keep the dissent under wraps.. The Sunday Times of London recently carried a story of the sway of pelf in the Indian news world.