निहत्थे होकर ही समाज को जान सकते हैं

उदय प्रकाशजयपुर में ‘लेखक-पाठक’ संवाद में उदय प्रकाश बोले…. : ताकतवर हों तो समाज बहुत अच्छा लगता है : ताकत से बदला जा रहा है भारत को : यह भारत माल संस्कृति के 28 करोड़ लोगों का है : गांधीजी की तरह गढऩे होंगे नए रूपक : कैसे बनता है कोई लेखक? कोई उदय प्रकाश कैसे बन जाता है? क्या होती है एक लेखक की रचना प्रक्रिया? कैसे देखता है वह दुनिया को? ये और ऐसे बहुत सारे सवालों-जवाबों का दरिया बहता रहा एक बरगद के पेड़ के नीचे। अवसर था जयपुर में जवाहर लाल केन्द्र के शिल्पग्राम में आयोजित पुस्तक मेले के समापन के दिन लेखक-पाठक संवाद का। पाठकों के सामने मुखातिब थे हमारे समाज के हिन्दी के सबसे बड़े कथाकार उदय प्रकाश। उदय प्रकाश के मुख से जैसे हमारे समाज की तस्वीर के अलग-अलग रंगों के झरने बह रहे थे। उदय प्रकाश से संवाद किया साहित्यकार दुर्गा प्रसाद अग्रवाल और युवा रचनाकार डॉ. दुष्यन्त ने।